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24 वन गूर्जरों के परिवारों को 10 लाख रुपये देने के निर्देश

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 15 Dec 2021 09:30 PM IST
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Instructions to give 10 lakh rupees to the families of 24 Van Gujjars
नैनीताल। हाईकोर्ट ने सरकार को वन गूर्जरों के विस्थापन व उनके रहन सहन के लिए कई दिशा निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा है कि कॉर्बेट पार्क के सोना नदी क्षेत्र के 24 वन गूर्जरों के परिवारों को 10 लाख रुपये तीन माह के भीतर दें। कोर्ट ने वन गूर्जरों के इन परिवारों को छह माह के भीतर प्लॉट देने के निर्देश भी दिए हैं। वन गूर्जरों के सभी परिवारों को जमीन के मालिकाना हक संबंधी प्रमाणपत्र छह माह के भीतर देने के लिए भी कोर्ट ने कहा है। उत्तराखंड में वन गूर्जरों के संरक्षण व उनके पुनर्वास मामले में दायर जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 12 जनवरी की तिथि नियत की है।
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पूर्व के आदेश के क्रम में सचिव समाज कल्याण, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून, टिहरी, पौड़ी और उत्तरकाशी के जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने सभी जिलाधिकारियों को 12 जनवरी को फिर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने के लिए कहा है।
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मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने राजाजी नेशनल पार्क के वन गूर्जरों को जीवन यापन के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी कहा है। उनके पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करने तथा पशुओं के इलाज के लिए पशु चिकित्सक उपलब्ध कराने के लिए कहा है। राजाजी नेशनल पार्क के वन गूर्जरों के विस्थापन के लिए सरकार से एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए भी हाईकोर्ट ने कहा।
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एनजीओ थिंक एक्ट राइजिंग फाउंडेशन व हिमालयन युवा ग्रामीण व अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई हुई। पूर्व में कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए थे कि वन गूर्जरों के मामले में दोबारा से कमेटी का पुनर्गठन कर उन सक्षम अधिकारियों को कमेटी में शामिल करें जिनको वन गूर्जरों के रहन सहन का पता हो। पूर्व में सरकार की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया था कि कोर्ट के आदेश पर नई कमेटी गठित कर दी गई है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने वन गूर्जरों के विस्थापन के लिए जो कमेटी गठित की है उसकी रिपोर्ट पर सरकार अमल नहीं कर रही है। वन गूर्जरों को 10 लाख का मुआवजा देने के लिए गया कहा था लेकिन सरकार ने आधे परिवारों को ही मुआवजा दिया।

याचिकाकर्ता का कहना था कि सरकार ने वन गूजरों के विस्थापन के लिए जो नियमावली बनाई है वह भ्रमित करने वाली है। इसमें उनके मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था नहीं की गई है। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि उन्होंने अधिकतर परिवारों को मुआवजा दे दिया है और उनके विस्थापन की प्रक्रिया चल रही है। शीघ्र ही इन लोगों को मालिकाना हक संबंधी प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं।
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