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71 लाख के नाले निर्माण में घटिया गुणवत्ता
ब्यूरो/अमर उजाला, भ्ाीमताल
Updated Fri, 22 May 2015 01:35 AM IST
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मुख्यमंत्री हरीश रावत के निर्देश पर खुटानी नाला निर्माण के नाम पर लाखों की सरकारी रकम को ठिकाने लगाने के मामले की जांच शुरू हो गई है। गुरुवार को दो सदस्यीय जांच टीम ने यहां पहुंचकर खुटानी नाले में कराए गए निर्माण कार्यों को देखा। जांच टीम के सदस्यों ने स्वीकार किया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता बेहद घटिया है। उन्होंने कहा कि निर्माण सामग्री के सैंपल जांच के लिए आईआईटी रुड़की भेजे जाएंगे।
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खुटानी नाला हर बरसात में मल्लीताल क्षेत्र में तबाही का कारण बनता था, लिहाजा शासन ने पिछले साल इसके पुनर्निर्माण के लिए 71 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। नाले का काम लखनऊ की एक बड़ी कंपनी ने ठेके पर लिया था, लेकिन उक्त कंपनी ने काम खुद करने के बजाए एक छोटे ठेकेदार को सौंप दिया। नाला निर्माण में 71 लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन घटिया निर्माण कार्य के चलते जितना भी काम कराया गया था वह पहली ही बरसात में बह गया।
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अमर उजाला ने लाखों रुपये की सरकारी रकम को ठिकाने लगाने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। बाद में प्रदेश सरकार की जिला निर्माण समिति के सलाहकार और भीमताल विधानसभा क्षेत्र के युकां के पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र चनौतिया ने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री हरीश रावत के समक्ष उठाया। रावत ने मामले की जांच के निर्देश दिए थे।
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शासन के निर्देश पर गठित दो सदस्यीय जांच टीम ने गुरुवार को खुटानी नाले के निर्माण कार्य को देखा। जांच टीम में सिंचाई विभाग ऊधमसिंह नगर के अधीक्षण अभियंता डीसी पांडे और सिंचाई खंड हल्द्वानी के अधिशासी अभियंता टीडी कांडपाल शामिल थे।
जांच टीम को निरीक्षण में अधिकांश दीवारें क्षतिग्रस्त मिली और नाले का फर्श उखड़ा मिला। अधीक्षण अभियंता पांडे ने माना की उक्त निर्माण कार्य में बेहद निम्न स्तर की सामग्री का प्रयोग किया गया है। उन्होंने सिंचाई खंड नैनीताल के सहायक अभियंता डीसी पंत को निर्माण सामग्री के सैंपल लेकर आईआईटी रुड़की से उसकी जांच कराने को कहा।
बाद में जांच टीम ने नौकुचियाताल और सातताल में भी विभाग की ओर से कराए गए कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री राम सिंह कैड़ा, जिला निर्माण समिति सलाहकार देवेंद्र चनौतिया, युकां विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष नीरज कुमार मोनू समेत सिंचाई खंड नैनीताल के अधिशासी अभियंता विजेंद्र कुमार, सहायक अभियंता डीसी पंत, कनिष्ठ अभियंता प्रशांत पंत आदि मौजूद थे।