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अपने ही दुर्ग में घिरे दुर्गापाल

Tue, 06 Sep 2016 12:34 PM IST
निशांत खनी हल्द्वानी।
निशांत खनी हल्द्वानी। Updated Tue, 06 Sep 2016 12:34 PM IST
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In his own fort surrounded Durgapal
तिरंगा यात्रा के जरिए चुनाव में जीतने का आह्वान - फोटो : अमर उजाला
बिंदुखत्ता नगर पालिका के मुद्दे पर श्रम मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल अपने ही दुर्ग में चित हो गए हैं। भाकपा माले और भाजपा के बाद कांग्रेसी नेता हरेंद्र बोरा के बिंदुखत्ता पालिका के विरोध में सड़कों पर उतरने से दुर्गापाल चौतरफा घिरे हैं। चुनाव से ठीक पहले यह मुद्दा दुर्गापाल ही नहीं कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकता है।
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दुर्गापाल बिंदुखत्ता की आम जनता की रायशुमारी करा चुके हैं। जिसमें 80 फीसदी लोगों ने बिंदुखत्ता पालिका को नकार दिया है। लोगों के गुस्से को वोटों की सहानुभूति में बदलने के लिए दुर्गापाल के पास अब पालिका भंग कराना ही एकमात्र विकल्प है। मंगलवार को इस मुद्दे पर दुर्गापाल देहरादून में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर सकते हैं। 
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बिंदुखत्ता फारेस्ट लैंड है। एक बड़ी आबादी यहां काबिज है। बिंदुखत्ता के लोग दशकों से राजस्व गांव की मांग उठाते आए हैं। भाकपा माले बहादुर सिंह जंगी के नेतृत्व में इस लड़ाई की अगुवाई करते आई है। पिछले चुनाव में कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़े हरीश चंद्र दुर्गापाल ने भी राजस्व गांव के मुद्दे पर जनता से वोट मांगे। लेकिन दिसंबर 2013 में बिंदुखत्ता नगर पालिका घोषित हो गई। 2014 में पालिका अस्तित्व में आ गई। भाकपा माले ने इसका पुरजोर विरोध भी किया। 
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चुनाव से ठीक पहले बिंदुखत्ता पालिका का जिन्न बोतल से बाहर निकल आया है। भाकपा माले और भाजपा ही नहीं बल्कि कांग्रेसियों के लिए यह चुनावी मुद्दा बन गया है। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बाद भी इस मुद्दे पर भाकपा माले, भाजपा और कांग्रेसी नेता हरेंद्र बोरा साथ हैं। शायद ये इन पार्टियों की राजनीतिक मजबूरी भी है। इसी मुद्दे पर सभी दुर्गापाल को उन्हीं के दुर्ग में चित कर वोट बैंक में सेंधमारी करना चाहते हैं। बिंदुखत्ता दुर्गापाल का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। 

जनता के विरोध के साथ भाजपा, भाकपा और कांग्रेसियों से घिरे दुर्गापाल को भी पैतरा बदलना पड़ा है। सोमवार को दुर्गापाल ने अपने तीन नजदीकी लोगों से बिंदुखत्ता की जनता की रायशुमारी ली है। सूत्र बताते हैं 80 फीसदी जनता पालिका के विरोध में है। लोगों को राजस्व गांव चाहिए। सर्वे के आधार पर दुर्गापाल अब पालिका भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं, ताकि आगामी चुनाव में विरोधियों की बोलती बंद कर सकें। 

बिंदुखत्ता मुद्दे पर कमेटी को देनी है रिपोर्ट
कांग्रेसी नेता हरेंद्र बोरा के सड़कों पर उतरने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत कांग्रेस आलाकमान की आंखें खुली। सूत्रों के मुताबिक सीएम ने एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाकर बिंदुखत्ता पालिका मुद्दे पर रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट एक महीने में फाइल होनी है। रिपोर्ट के आधार पर भी बिंदुखत्ता का भविष्य तय हो सकता है। 


कोट
सर्वे कराकर बिंदुखत्ता की जनता की रायशुमारी करा ली है। जनमत पालिका के विरोध में है। जनभावनाओं का सम्मान है। जनता पालिका नहीं चाहती है तो उनकी आवाज को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। - हरीश चंद्र दुर्गापाल, श्रममंत्री 
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