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Nainital News: हृदयाघात की स्थिति में पहले घंटे में त्वरित उपचार देकर बचाई जा सकती है जान
Thu, 12 Feb 2026 01:40 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Thu, 12 Feb 2026 01:40 AM IST
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हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के स्किल सेंटर में मेडिसिन विभाग, जेपीएनएटीसी और एम्स नई दिल्ली के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने हल्द्वानी के चिकित्सकों को मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में बेसिक लाइफ सपोर्ट और ट्रॉमा मैनेजमेंट का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षुओं को समझाया गया कि हृदयाघात की स्थिति में पहला एक घंटा गोल्डन ऑवर माना जाता है। इसी समयावधि में त्वरित और सही उपचार देकर मरीज का जीवन बचाया जा सकता है।
तीन दिवसीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स के शुभारंभ मौके पर एम्स नई दिल्ली के डॉ. बीएल मनीष कुमार ने कहा कि बेसिक लाइफ सपोर्ट आपातकालीन जीवनरक्षक प्रक्रिया है जो उस स्थिति में दी जाती है जब किसी व्यक्ति की सांस या हृदय की धड़कन बंद हो जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य मस्तिष्क एवं शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बनाए रखना है। जब तक कि उन्नत चिकित्सा सहायता उपलब्ध न हो जाए। सीपीआर के विषय में विस्तार से जानकारी देते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि सीपीआर एक प्रकार की प्राथमिक चिकित्सा है। यदि कोई व्यक्ति सांस लेने में असमर्थ हो जाए, सांस बंद हो जाए या बेहोश हो जाए, सीपीआर के माध्यम से उसकी जान बचाई जा सकती है। यह भी बताया कि क्रिटिकल केयर की समुचित जानकारी के अभाव में गंभीर मरीजों को बचाना अत्यंत कठिन हो जाता है। प्रशिक्षण में नर्सिंग ऑफिसर संगीता अफारिया, गीता सिन्हा, सीनियर कोऑर्डिनेटर जगदीश चंद्र, डॉ. एके सिन्हा, डॉ. एससी जोशी, डॉ. परमजीत सिंह, डॉ. राजीव सिंह, डॉ. रितु रखोलिया, डॉ. दीपा देउपा, डॉ. जहांआरा आदि मौजूद रहे।
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तीन दिवसीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स के शुभारंभ मौके पर एम्स नई दिल्ली के डॉ. बीएल मनीष कुमार ने कहा कि बेसिक लाइफ सपोर्ट आपातकालीन जीवनरक्षक प्रक्रिया है जो उस स्थिति में दी जाती है जब किसी व्यक्ति की सांस या हृदय की धड़कन बंद हो जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य मस्तिष्क एवं शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बनाए रखना है। जब तक कि उन्नत चिकित्सा सहायता उपलब्ध न हो जाए। सीपीआर के विषय में विस्तार से जानकारी देते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि सीपीआर एक प्रकार की प्राथमिक चिकित्सा है। यदि कोई व्यक्ति सांस लेने में असमर्थ हो जाए, सांस बंद हो जाए या बेहोश हो जाए, सीपीआर के माध्यम से उसकी जान बचाई जा सकती है। यह भी बताया कि क्रिटिकल केयर की समुचित जानकारी के अभाव में गंभीर मरीजों को बचाना अत्यंत कठिन हो जाता है। प्रशिक्षण में नर्सिंग ऑफिसर संगीता अफारिया, गीता सिन्हा, सीनियर कोऑर्डिनेटर जगदीश चंद्र, डॉ. एके सिन्हा, डॉ. एससी जोशी, डॉ. परमजीत सिंह, डॉ. राजीव सिंह, डॉ. रितु रखोलिया, डॉ. दीपा देउपा, डॉ. जहांआरा आदि मौजूद रहे।
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