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सेविले चरन तोहार हे छठी मइया, महिमा तोहर अपार
ब्यूरो /अमर उजाला, हल्द्वानी (नैनीताल)।
Updated Mon, 16 Nov 2015 01:22 AM IST
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आस्था, तप, त्याग, श्रद्घा और सेवा भाव से जुड़े चार दिवसीय छठ पर्व का श्रीगणेश रविवार को नहाए-खाए के साथ हो गया। स्नान के बाद लौकी, दाल और चावल से बने प्रसाद को ग्रहण कर व्रतियों ने कठिन तप शुरू किया। वैदिक काल से चले आ रहे पूर्वांचल के इस लोकपर्व के दूसरे दिन यानी सोमवार को खरना होगा, जिसमें व्रती दिनभर का उपवास रखेंगे।
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वे सोमवार शाम खीर और रोटी का प्रसाद बना कर छठी मइया को चढ़ाएंगे, फिर खरना का उपवास खोलने के बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा। व्रती 17 नवंबर को घाट पर पहला अर्घ्य डूृूबते सूर्य को और दूसरा अर्घ्य 18 नवंबर को उगते सूर्य को देंगे।
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सन्तान प्राप्ति व धन धान्य की मनोकामना के साथ ही सुहाग की रक्षा के लिए साल में दो बार मनाये जाने वाले छठ पर्व के लिए इस बार छठ सेवा समिति ने विशेष तैयारियां की है। समिति महामंत्री मुरली प्रसाद के अनुसार रामपुर रोड स्थित छठ स्थल में करीब 26 वर्षो से छठ पर्व मनाया जा रहा है।
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छह दिन तक चलने वाले पर्व में हजारों की संख्या में लोग भागीदारी करते हैं। पर्व में पहली बार 17 नवंबर को पूर्वांचल की राजा प्रेम एंड भजन मंडली द्वारा सायं चार बजे से सुबह आठ बजे तक सांस्कृतिक संध्या की प्रस्तुति दी जायेगी।
गंदले पानी में अर्घ्य देने को मजबूर पूर्वांचलवासी
छठ पर्व में व्रती द्वारा दिन भर उपवास रखने के बाद भगवान सूर्य को बहते पानी में अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। नदी के विकल्प के रुप में रामपुर रोड स्थित छठ पूजा स्थल के समीप बहती नहर में अर्घ्य देना पड़ता है।
नहर के पानी में गंदगी होने से व्रतियों को अर्घ्य देने में परेशानी को सामना करना पड़ता है। लेकिन सिंचाई विभाग या नगर निगम ने कभी भी नहर को साफ करने की जहमत नहीं उठाई।