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पिछले हादसों से सबक लिया होता तो बच सकती थी जान

चंद्रेश पांडे/आनंद खाती Updated Tue, 23 May 2017 12:47 AM IST
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पाडली की पहाडियां
पाडली की पहा‌डियां - फोटो : amar ujala

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लोहाली में हुए हादसे में जिला प्रशासन से लेकर एनएच के अधिकारियों तक की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग में तकरीबन 20 किलोमीटर के दायरे में पहाड़ी से मौत बरसती है जो अब तक कई लोगों के जीवन को लील चुकी है।
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इसके बावजूद लगातार दरक रही इन पहाड़ियों का कोई ट्रीटमेंट कराना तो दूर प्रशासन ने कभी किसी बड़ी एजेंसी से इसका सर्वे तक कराना मुनासिब नहीं समझा है। अभी भी कई स्थान ऐसे हैं जहां रोड से 500 से 700 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ियों में बोल्डर लटके हैं।


भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग में कैंची से काकड़ीघाट के बीच कैंची, पाडली, रातीघाट, रामगाढ़, दोपाखी, गरमपानी, खैरना, भौर्या बैंड, छड़ा, लोहाली, जौरासी, नावली और काकड़ीघाट ऐसे स्थान हैं, जहां सड़क से लगी पहाड़ी भूस्खलन की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है।

बरसात में तो इन स्थानों पर पहाड़ी से पत्थरों और बोल्डरों की बरसात होती है साथ ही साल के अन्य महीनों में भी कब ऊपर से मौत बरस जाए किसी को पता नहीं। 2011 में एक वाहन पर गिरे बोल्डर की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हुई थी।

2010 की बरसात में लोहाली के पास पहाड़ी इतनी दरकी कि कई दिन तक यातायात ठप रहा। आज भी लोहाली समेत कैंची और कैंची से लगभग पांच सौ मीटर नीचे की ओर पहाड़ी के टाप में कई बोल्डर अटके हुए हैं जो कभी भी जानलेवा साबित हो सकते हैं।

चूंकि इस सड़क के एक ओर कोसी नदी बहती है और दूसरी ओर पहाड़ी के होने के कारण यह बेहद संकरी है लिहाजा राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग की ओर से सितंबर 2016 में खैरना से काकड़ीघाट तक लगभग दस किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण का काम शुरू किया गया।

इसके लिए भारी भरकम पोकलेंड मशीनों से पहाड़ी को काटा गया। इस काम को 2018 में पूरा होना है। सड़क चलते यातायात के कारण उक्त कार्य में बाधाएं आ रही थी लिहाजा प्रशासन ने 27 अप्रैल से 10 मई तक इस रोड में यातायात को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया था, लेकिन बाद में प्रशासन ने 15 मई से 15 जून तक दिन में यातायात चालू रखने की अनुमति देते हुए रात आठ से सुबह चार बजे तक यातायात प्रतिबंधित किया।

वर्तमान में भी रोड में रात आठ बजे से सुबह चार बजे तक यातायात प्रतिबंधित ही है और दिन में सड़क चौड़ीकरण कार्य के बीच वाहनों की आवाजाही जारी है। पर्यावरणविद् डा. अजय रावत के मुताबिक सड़क चौड़ीकरण के काम में चूंकि  भारी भरकम मशीनों की मदद ली जा रही है, लिहाजा इनका असर पहाड़ियों पर पड़ रहा है और पहाड़ियां कमजोर हो रही हैं।
 
पिछले कई दिनों से इस क्षेत्र में रूक रूक कर मूसलाधार बरसात भी पहाड़ियों के दरकने के रास्ते खोल रही है। लोगों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के काम के बीच यात्री जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं।
 
लोगों का कहना है कि जब तक सड़क चौड़ीकरण का काम पूरा नहीं होता और संवेदनशील पहाड़ियों में अटके बोल्डरों को नहीं गिराया जाता तब तक इस रोड में यातायात प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। प्रशासन को पहाड़ी में अटके बोल्डरों को गिराने के काम को भी प्राथमिकता से कराना चाहिए ताकि जानमाल के नुकसान से बचा जा सके।
 
सूचना देने पर भी नहीं पहुंची 108
 
हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद लोगों ने घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए आपातकालीन वाहन 108 को कॉल किया। बावजूद इसके आपातकालीन वाहन मौके पर नहीं पहुंचा जिसके बाद लोगों ने निजी वाहनों की मदद से घायलों को इलाज के लिए खैरना अस्पताल पहुंचाया।

देखने वालों की रूह कांप गई
 
हादसा इतना जबरस्त था कि देखने वालों की रूंह कांप गई। हादसे में बस की पिछली सीट में सवार पाचों महिलाओं के शरीर के चीथड़े उड़ गए। हादसे के बाद बस की क्षतिग्रस्त पिछली सीट से लेकर सड़क तक मांस के टुकड़े फैले नजर आए।
 
किसी मृतक का सिर और चेहरा पूरी तरह से कुचल चुका था तो किसी के हाथ पैर शरीर से अलग होकर इधर-उधर गिर चुके थे। बमुश्किल पुलिस कर्मियों ने इन्हें उठाकर सीएचसी खैरना पहुंचाया।
 
पोस्टमार्टम के बाद शवों को घर भेजने की तैयारी
 
डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी के निर्देश पर कोश्या कुटौली के एसडीएम प्रमोद कुमार ने हादसे में मारे गए लोगों के पोस्टमार्टम की व्यवस्था सीएचसी खैरना में कराई। इसके लिए बीडी पांडे अस्पताल नैनीताल से डॉ. डीके मिश्रा, डॉ. आरके वर्मा और डॉ. वीके पुनेठा की तीन सदस्यीय टीम खैरना पहुंची जहां पोस्टमार्टम कराया गया।
 
एसडीएम प्रमोद कुमार ने बताया कि प्रशासन की ओर से शवों को कोटद्वार भेजने की व्यवस्था कराई जा रही है।
 
काश! एक पल देर से गिरता बोल्डर तो बच जाती पांच जिंदगी
 
हर किसी व्यक्ति की जुबान पर एक ही बात थी कि काश उक्त बोल्डर एक पल देरी से गिरता तो पांचों महिलाओं की जान बच जाती। ऐसा इसलिए पहाड़ी से बोल्डर के से पहले ही बस का अगला हिस्सा तो उस जगह को क्रास कर चुका था जहां बोल्डर गिरा। लेकिन बस का एकदम पिछला भाग बोल्डर की जद में आ गया और इसकी कीमत पांच लोगों को अपनी जान से चुकानी पड़ी।
 
मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री ने जताया शोक
 
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, जिले के प्रभारी मंत्री हरक सिंह, परिवहन मंत्री यशपाल आर्य, नैनीताल के विधायक संजीव आर्या और भीमताल के  विधायक राम सिंह कैड़ा ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
 
मृतकों के परिवार वालों को 50-50 हजार देने की घोषणा
 
परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने लोहाली बोल्डर हादसे में मारे गए लोगों के परिवार के लोगों को 50-50 हजार रुपये देने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि उक्त धनराशि परिवहन निगम की ओर से दी जाएगी। 

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