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Nainital News: सीजफायर न होता तो 40 किलोमीटर पाकिस्तानी इलाका हमारा होता...
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1971 के वार में पाकिस्तान को 40 किलोमीटर दूर खदेडने वाले कुमाऊं रेजिमेंट का हिस्सा रहे दीवान सि
हल्द्वानी। भारत-पाक के बीच तनाव और भारतीय सेना के दबदबे ने कई पूर्व सैनिकों को उनकी यादों में डूबो दिया है। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सेना का हिस्सा रहे और पाकिस्तानी सैनिकों से सीधा मोर्चा लेने वाले नायब सूबेदार दीवान सिंह (रि.) की यादें भी जीवंत हो उठी हैं। 89 साल के दीवान सिंह कहते हैं कि उस वक्त अगर सीज फायर नहीं हुआ होता तो कटरा से आगे 40 किमी. तक पाकिस्तानी भू-भाग भारत का होता।
पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के जरिये पाकिस्तान को इस वक्त सबक सिखाया जा रहा है। शहर के कालिका काॅलोनी ब्लाॅक एरिया निवासी व मूल रूप से पिथौरागढ़ के डीडीहाट के रहने वाले रिटायर्ड नायब सूबेदार दीवान सिंह भारत की जवाबी कार्रवाई से गदगद हैं। अब जब भारत पाकिस्तान के बीच वॉर जैसी स्थिति बन रही है तो वह भी पुरानी यादों में खो गए। 16 फरवरी 1936 को जन्मे दीवान सिंह की तैनाती कुमाऊं रेजिमेंट में रही है। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 और 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध लड़ा है। दीवान सिंह कहते हैं कि 40 किमी तक कुमाऊं रेजीमेंट ने पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था।
पाकिस्तानी सेना दिखी तो खदेड़ा
कुमाऊं रेजिमेंट अपनी बहादुरी के लिए जाना जाता है। दीवान सिंह बताते हैं कि जब 71 के युद्ध में पाकिस्तानी थल सेना सामने दिखी तो रेजिमेंट के सैनिकों ने उन्हें दौड़ा लिया। सामने से फायरिंग होती रही लेकिन रेजिमेंट पीछे नहीं हटा। फायरिंग करते हुए उन्हें खदेड़ता रहा। तकरीबन 40 किमी. तक उन्हें पीछे धकेला और उनकी पोस्ट पर कब्जा कर ही रुके। बाद में जब सीज फायर हुआ तो उन्हें वापसी को कहा गया।
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चीन युद्ध में इसी रेजिमेंट को मिला है वीर और शौर्य चक्र
दीवान सिंह कहते हैं कि वर्ष 1962 का चीन युद्ध भी उन्होंने कुमाऊं रेजिमेंट का हिस्सा रहते हुए लड़ा। उनके रेजिमेंट में ऐसे रणबांकुरे रहे जिन्होंने चीन की सेना को धूल चटा दी। कहा कि जहां कई रेजिमेंट पीछे हटने को मजबूर हुई थीं, वहीं कुमाऊं रेजिमेंट ने चीन की सेना को पीछे धकेल दिया था। इसी रेजिमेंट को वीर और शौर्य चक्र भी मिला है।
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पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के जरिये पाकिस्तान को इस वक्त सबक सिखाया जा रहा है। शहर के कालिका काॅलोनी ब्लाॅक एरिया निवासी व मूल रूप से पिथौरागढ़ के डीडीहाट के रहने वाले रिटायर्ड नायब सूबेदार दीवान सिंह भारत की जवाबी कार्रवाई से गदगद हैं। अब जब भारत पाकिस्तान के बीच वॉर जैसी स्थिति बन रही है तो वह भी पुरानी यादों में खो गए। 16 फरवरी 1936 को जन्मे दीवान सिंह की तैनाती कुमाऊं रेजिमेंट में रही है। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 और 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध लड़ा है। दीवान सिंह कहते हैं कि 40 किमी तक कुमाऊं रेजीमेंट ने पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था।
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पाकिस्तानी सेना दिखी तो खदेड़ा
कुमाऊं रेजिमेंट अपनी बहादुरी के लिए जाना जाता है। दीवान सिंह बताते हैं कि जब 71 के युद्ध में पाकिस्तानी थल सेना सामने दिखी तो रेजिमेंट के सैनिकों ने उन्हें दौड़ा लिया। सामने से फायरिंग होती रही लेकिन रेजिमेंट पीछे नहीं हटा। फायरिंग करते हुए उन्हें खदेड़ता रहा। तकरीबन 40 किमी. तक उन्हें पीछे धकेला और उनकी पोस्ट पर कब्जा कर ही रुके। बाद में जब सीज फायर हुआ तो उन्हें वापसी को कहा गया।
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चीन युद्ध में इसी रेजिमेंट को मिला है वीर और शौर्य चक्र
दीवान सिंह कहते हैं कि वर्ष 1962 का चीन युद्ध भी उन्होंने कुमाऊं रेजिमेंट का हिस्सा रहते हुए लड़ा। उनके रेजिमेंट में ऐसे रणबांकुरे रहे जिन्होंने चीन की सेना को धूल चटा दी। कहा कि जहां कई रेजिमेंट पीछे हटने को मजबूर हुई थीं, वहीं कुमाऊं रेजिमेंट ने चीन की सेना को पीछे धकेल दिया था। इसी रेजिमेंट को वीर और शौर्य चक्र भी मिला है।