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इतिहास बनकर रह जाएगी एचएमटी 

Mon, 01 May 2017 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो 
अमर उजाला ब्यूरो  Updated Mon, 01 May 2017 12:41 AM IST
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History will be HMT
घड़ी

गुजरे जमाने की नामी एचएमटी (हिंदुस्तान मशीन टूल्स) घड़ी का कारखाना अब इतिहास बनकर रह जाएगा। एचएमटी ग्रुप के बंगलूरू कारखाने की नीलामी के बाद रानीबाग कारखाने पर भी नीलामी की तलवार लटक गई है। हालांकि हाइकोर्ट से कर्मचारियों को स्टे मिलने से नीलामी प्रक्रिया कुछ समय टली है। कर्मचारियों का बकाया भुगतान होते ही कारखाना नीलाम हो जाएगा। 

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80 के दशक में एचएमटी प्रतिष्ठित ब्रांड था। एचएमटी की घड़ियां लोगों की कलाई की शान होती थीं। घड़ी भी बुकिंग कराने के महीने भर तक इंतजार के बाद मिलती थी। गुजरते वक्त और प्रतिस्पर्धा के साथ एचएमटी का वजूद खत्म होता चला गया। विगत एक दशक से मंदी की मार झेल रही एचएमटी को प्रबंधन ने बंद करने का प्रयास किया।
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इधर, कर्मचारियों के मुखर विरोध के चलते आखिर एचएमटी ने छह जनवरी 2016 को आखिरी सांस ली। जनवरी 2016 को एचएमटी कारखाने में कलपुर्जों की आवाज थम गई। 

पिछले साल से पहले तक रानीबाग कारखाने में 512 कर्मचारियों की तैनाती थी। एचएमटी प्रबंधन ने कर्मचारियों के लिए वीआरएस का विकल्प खोल दिया। पिछले एक साल में 366 कर्मचारियों ने वीआरएस ले लिया। 31 मार्च 2017 वीआरएस आवेदन की कट ऑफ डेट थी। 146 कर्मचारी अभी भी कारखाना को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं और उन्होंने वीआरएस नहीं लिया है। एचएमटी प्रबंधन पर कर्मचारियों के पीएफ का करोड़ों रुपये का बकाया भुगतान है।
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सितंबर 2016 में केंद्र सरकार ने नेशनल बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) को बीमार उपक्रमों की नीलामी के लिए नामित किया। इनमें एचएमटी भी प्रमुख उपक्रम था। एनबीसीसी ने बंगलूरू स्थित एचएमटी कारखाना नीलाम कर दिया। नीलामी में इसरो और गेल ने एचएमटी की भूमि खरीद ली।

बंगलूरू के बाद एचएमटी रानीबाग कारखाने की नीलामी की बारी आ गई। इसी बीच एचएमटी कर्मचारी यूनियन ने नीलामी से पूर्व कर्मचारियों के बकाया भुगतान को लेकर हाइकोर्ट से स्टे ले लिया, जिससे नीलामी की प्रक्रिया कुछ वक्त के लिए टली है। 

रानीबाग में एचएमटी की करीब 91 एकड़ भूमि है।

इसमें 61 एकड़ भूमि उद्योग मंत्रालय भारत सरकार की है। बाकी 30 एकड़ प्रदेश सरकार की लीज भूमि है। कारखाने में करीब 500 मशीनें हैं। कारखाने की भूमि उद्योग मंत्रालय के माध्यम से स्थानीय सर्किल रेट के हिसाब से भारत सरकार के उपक्रमों को नीलाम हो जाएगी। मशीनों की भी ऑनलाइन नीलामी होगी। नीलामी से पहले एचएमटी प्रबंधन पर कर्मचारियों के बकाया भुगतान का दबाव है। कर्मचारी यूनियन को हाइकोर्ट से स्टे भी इसी आधार पर मिला है। 

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