{"_id":"57a4d20e4f1c1bb5602ba216","slug":"high-court-strict-on-sth-chaos","type":"story","status":"publish","title_hn":"एसटीएच में अव्यवस्थाओं को लेकर हाईकोर्ट सख्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एसटीएच में अव्यवस्थाओं को लेकर हाईकोर्ट सख्त
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल।
Updated Fri, 05 Aug 2016 11:21 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने सुशीला तिवारी अस्पताल एवं राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के मामले में दायर जनहित याचिका में सुनवाई के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अस्पताल की व्यवस्था वास्तव में चरमरा गई है।
विज्ञापन
बेहतर इलाज लोगों का मूलभूत अधिकार है, इसलिए हाईकोर्ट अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए एक्सपर्ट कमेटी एवं कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करने पर विचार कर सकती है।
विज्ञापन
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आदेशित किया है कि अस्पताल में मरीजों की परेशानियों और अन्य सभी व्यवस्थाओं से न्यायालय को अवगत कराएं ताकि कार्रवाई की जा सके।
कोर्ट ने 12 अगस्त की तिथि नियत करते हुए चिकित्सा शिक्षा निदेशक उत्तराखंड और सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज के प्रबंधन को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
हल्द्वानी निवासी विकास भगत ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि एसटीएच एवं राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। मेडिकल कालेज मरीजों को केवल रेफर करने का केंद्र बन गया है।
याचिका में कहा कि पिछले दिनों 6 गर्भवती महिलाओं को उचित इलाज न मिलने के कारण उनकी मौत हो गई थी और आए दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। याचिका में कहा कि वहां पर 57 विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद खाली पडे़ है और 28 से ऊपर चिकित्सकीय मशीन खराब पड़ी है, जिससे गरीब मरीजों को इलाज के अभाव में दर-दर भटकना पड़ रहा है।
कुमाऊं के 6 जिले, गढ़वाल का जिला चमोली, उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद एवं रामपुर जिले से मरीज बेहतर इलाज की अपेक्षा में यहां आते है पर यहां से उन्हें रेफर कर दिया जाता है। पहाड़ी जिलों में होने वाली दुर्घटना के घायलों को यहां लाया जाता है पर यहां एक भी ट्रामा सेंटर नहीं है, जिससे घायलों को इलाज के अभाव में दम तोड़ना पड़ता है।
हृदय के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एक कैथलैब के निर्माण की जनता की मांग पर सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है। याचिका में कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल के चलते अकसर व्यवस्थाएं चौपट हो जाती है।
क्योंकि पूर्व से ही मेडिकल कालेज में स्टाफ का अभाव है। अस्पताल में सफाई, फर्नीचर, बेड, मरीजों के बिस्तर आदि दयनीय दशा में है। जबकि यह मेडिकल कालेज पूरे कुमाऊं के सबसे बडे़ अस्पताल के रूप में खोला गया था।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 अगस्त की तिथि नियत की है। साथ ही चिकित्सा शिक्षा निदेशक उत्तराखंड और एसटीएच एवं मेडिकल कालेज के प्रबंधन को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।
एसटीएच में कब-कब हुई घटनाएं
15.06.16 को प्रसव के बाद प्रसूता की मौत, हंगामा।
14.04.15 को पत्रकार तारा जोशी की पत्नी के इलाज में लापरवाही से मौत, हंगामा।
19.04.15 को नवजात बच्ची की मौत पर हंगामा।
20.04.15 को नवजात बच्ची की मौत, हंगामा।
09.05.15 को डाक्टर ने तीमारदार के जड़ा तमाचा।
02.10.15 को तीमारदारों ने डाक्टरों को पीटा और इलाज में लगाया लापरवाही का आरोप।
03.11.15 को डाक्टर एवं मरीज के बीच मारपीट।
06.01.14 को मरीज का आपरेशन न करने पर हंगामा।
01.04.14 को दिल के रोगी की मौत पर हंगामा।
09.07.14 को प्रसव के दौरान बच्चे की मौत के बाद मां की जान बचाने के लिए यूटरस निकाला गया।
15.12.13 को बीजेपी नेता की मौत के बाद हंगामा।
05.09.12 को बरेली रोड निवासी विपिन चंद्र सनवाल की मौत के बाद बवाल।