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आपदा से निपटने को सरकार के प्रयासों से हाईकोर्ट संतुष्ट, याचिका निस्तारित
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नैनीताल। राज्य के पर्वतीय क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने को सरकार के प्रयासों पर हाईकोर्ट ने संतुष्टि जताते हुए इस मामले में दायर जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया है।
सरकार ने हाईकोर्ट में शपथपत्र देकर कहा था कि उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान को न्यूनतम करन, भूकंप और बादल फटने के पूर्वानुमान के लिए उपकरण लगाने को बजट मंजूर हो चुका है। नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर और मसूरी में डॉप्लर रडार स्थापित किया जा चुका है। मार्च 2020 के अंत तक यह सिस्टम पूरी तरह काम करने लगेगा। राज्य में आपदा प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए ब्लॉक स्तर पर दल बनाए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। दिल्ली निवासी अजय गौतम ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राज्य के पर्वतीय क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को प्रभावी कदम उठाने के लिए निर्देशित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि पहाड़ में भूकंप, बादल फटने सहित अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है। याचिका में आपदा की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में एडवांस अलार्मिंग सिस्टम लगाने, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के सहयोग से आपदा प्रबंधन समूह बनाने सहित कई मांगें की गईं थीं। पूर्व में कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे।
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सरकार ने हाईकोर्ट में शपथपत्र देकर कहा था कि उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान को न्यूनतम करन, भूकंप और बादल फटने के पूर्वानुमान के लिए उपकरण लगाने को बजट मंजूर हो चुका है। नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर और मसूरी में डॉप्लर रडार स्थापित किया जा चुका है। मार्च 2020 के अंत तक यह सिस्टम पूरी तरह काम करने लगेगा। राज्य में आपदा प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए ब्लॉक स्तर पर दल बनाए गए हैं।
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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। दिल्ली निवासी अजय गौतम ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राज्य के पर्वतीय क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को प्रभावी कदम उठाने के लिए निर्देशित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि पहाड़ में भूकंप, बादल फटने सहित अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है। याचिका में आपदा की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में एडवांस अलार्मिंग सिस्टम लगाने, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के सहयोग से आपदा प्रबंधन समूह बनाने सहित कई मांगें की गईं थीं। पूर्व में कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे।
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