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हाईकोर्ट का राज्य सरकार को निर्देश: कहा- एक साल में पूरे प्रदेश में करें रेगुलर पुलिस की व्यवस्था

Wed, 22 May 2024 03:42 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: हीरा मेहरा Updated Wed, 22 May 2024 03:42 PM IST
सार

नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि एक साल के भीतर पूरे प्रदेश में रेगुलर पुलिस की व्यवस्था कर उसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे। 

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High Court directed state government to make regular police arrangements in the entire state within a year
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि एक साल के भीतर पूरे प्रदेश में रेगुलर पुलिस की व्यवस्था कर उसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे। मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने राज्य में राजस्व पुलिस व्यवस्था समाप्त करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए।

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इस दौरान राज्य सरकार की और से कहा गया कि सरकार ने कई क्षेत्रों में रेगुलर पुलिस की व्यवस्था कर दी है और अन्य क्षेत्रों में इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने भी नवीन चंद्र बनाम राज्य सरकार केस में इस व्यवस्था को समाप्त करने की आवश्यकता समझी थी। इसमें कहा गया था कि राजस्व पुलिस को सिविल पुलिस की भांति ट्रेनिंग नहीं दी जाती। यही नहीं, राजस्व पुलिस के पास आधुनिक साधन, कम्प्यूटर, डीएनए और रक्त परीक्षण, फोरेंसिक जांच, फिंगर प्रिंट की जांच जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं होती हैं। 
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इनके अभाव में अपराध की समीक्षा करने में परेशानियां होती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि राज्य में एक समान कानून व्यवस्था होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने भी इस संबंध में सरकार को 2018 में कई दिशा निर्देश दिए थे लेकिन उन निर्देशों का पालन सरकार ने नहीं किया। जनहित याचिका में कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि पूर्व में दिए निर्देशों का अनुपालन करवाया जाए। 



उत्तराखंड के 579 गांव राजस्व पुलिस के अधीन
पर्वतीय पटवारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष विजय पाल सिंह मेहता का कहना है कि हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिलों को छोड़कर राज्य के सभी जिलों में आज भी राजस्व पुलिस व्यवस्था है। बताया कि प्रदेश के लगभग 579 गांवों में यह व्यवस्था है। इसमें पौड़ी में 112, टिहरी में 53, उत्तरकाशी में 103, रुद्रप्रयाग में 38, चमोली में 89, नैनीताल में 48, अल्मोड़ा में 63, बागेश्वर में 37, चंपावत में 12 व पिथौरागढ़ में 24 गांव शामिल हैं। बताया कि देहरादून के चकराता और त्यूनी में भी यह व्यवस्था लागू है।
 

प्रदेश में 1861 में शुरू हुई थी यह व्यवस्था
उत्तराखंड में राजस्व पुलिस व्यवस्था की शुरूआत वर्ष 1861 में हुई थी। जिसके तहत पटवारी, कानूनगो व तहसीलदार से लेकर जिलाधिकारी और मंडलायुक्त तक को राजस्व कार्यों के साथ ही पुलिस के कार्यों की जिम्मेदारी निभानी होती थी।

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