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उत्तराखंड हाईकोर्ट: आईपीएस नीरू गर्ग व अरुण जोशी प्रतिनियुक्ति मामले में सुनवाई 18 नवंबर को, दिए निर्देश

Wed, 28 Oct 2026 09:55 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: Heera Updated Wed, 28 Oct 2026 09:55 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने आईपीएस नीरू गर्ग व अरुण जोशी की केंद्र में डीआईजी पद पर प्रतिनियुक्ति के आदेश को चुनौती देने वाले मामले में अगली सुनवाई 18 नवंबर तय की और सक्षम प्राधिकारी को उनका लंबित वेतन देने पर विचार करने के निर्देश दिए।

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Hearing in IPS Neeru Garg and Arun Joshi deputation case on November 18
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में आईजी पद पर तैनात आईपीएस प्राधिकारी नीरू गर्ग व अरुण जोशी को प्रतिनियुक्ति पर केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन डीआईजी पद पर भेजने के आदेश को चुनौती देने के मामले में सुनवाई के बाद अगली सुनवाई की तिथि 18 नवंबर को निर्धारित करते हुए सक्षम प्राधिकारी को प्रतिनियुक्ति आदेशों के बाद से लंबित इन अधिकारियों का वेतन देने पर विचार करने के निर्देश दिए।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कैट के आदेश को चुनौती दी थी। पूर्व में 2005 की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन भारत तिब्बत सीमा पुलिस में उप महानिरीक्षक व 2006 के आईपीएस व आईजी स्तर के अधिकारी अरुण मोहन जोशी को गृह मंत्रालय की ओर से 5 मार्च 2026 को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन बीएसएफ में डीआईजी पद पर भेजने के आदेश हुए थे।

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इस आदेश के बाद उत्तराखंड सरकार ने 6 मार्च 2026 को इन अधिकारियों को कार्यमुक्त करने का आदेश पारित किया था जिसे इन अधिकारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने अधिकारियों को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में जाने के निर्देश दिए थे जहां से अधिकारियों को राहत मिली और कैट ने इन नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति तथा कार्यमुक्ति, संबंधी आदेशों को निरस्त करते हुए आवेदकों को उत्तराखंड कैडर में उनके पदों पर बहाल करने का निर्देश दिया था।
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राज्य सरकार ने कैट के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी जिस पर इन कोर्ट में अधिकारियों के अधिवक्ता ने आपत्ति करते हुए कहा कि कैट की दिल्ली स्थित बेंच के आदेश को उत्तराखंड हाईकोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती इसका अधिकार क्षेत्र दिल्ली हाईकोर्ट में है। कोर्ट ने कैट के आदेश पर कोई स्थगन आदेश नहीं दिया। न्यायालय ने अरुण मोहन जोशी की उस अंडरटेकिंग को 18 नवंबर तक बढ़ा दिया, जिसके तहत उन्होंने फिलहाल कैट के आदेश की अवमानना संबंधी कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाने का आश्वासन दिया था।

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