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पब्लिक स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के इंतजाम आधे अधूरे
अमर उजाला ब्यूरो नैनीताल
Updated Fri, 21 Apr 2017 12:48 AM IST
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ऑरम ग्लोबल स्कूल में पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना ने पब्लिक स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा इंतजाम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल बसों के ड्राइवर और क्लीनर अपराधी प्रवृत्ति का तो नहीं है इसका पुलिस से सत्यापन तक नहीं कराया गया। इसके साथ ही कई स्कूलों में पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे तक नहीं हैं। स्कूलों में इन खामियों को लेकर जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।
सीबीएसई से मान्यता प्राप्त पब्लिक स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई नियम कायदे हैं लेकिन कई स्कूल तो इन नियमों को पूरा ही नहीं करते। केवल नियमों की खानापूर्ति कागजों में ही कर दी जाती है। बताते हैं कि सीबीएसई की ओर से स्पष्ट निर्देश हैं कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के इंतजाम विशेष रूप से किए जाएं। लड़कियों के लिए महिला स्टाफ पर्याप्त संख्या में तैनात किया जाए, साथ ही लड़कियों के ब्लाक में पुरुष स्टाफ न आ सके, इसकी व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा क्लास रूमों के साथ ही स्कूल परिसर में जगह - जगह सीसीटीवी कैमरे लगे, ताकि स्कूल में होने वाली प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
इन नियमों का कुछ बड़े स्कूल संचालक ही पालन कर पाते बाकी अधिकांश स्कूलों में न महिला स्टाफ पर्याप्त संख्या में है और न ही सीसीटीवी कैमरे ही पर्याप्त संख्या में लगे हैं, केवल औपचारिकता पूरी की गई है। इसके अतिरिक्त स्कूल बस के ड्राइवर और क्लीनर अपराधी किस्म के तो नहीं हैं, कौन हैं? इसका कई स्कूल संचालकों की ओर से पुलिस सत्यापन तक नहीं कराया गया है। इसी तरह बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों को घर से लाने एवं छोड़ने के काम में निजी वैन भी लगी हुई हैं। अभिभावकों को निजी वैन के ड्राइवर के नाम और मोबाइल नंबर को छोड़ कर उसका अता पता तक नहीं होता। स्कूलों में निजी वैन कौन चला रहे हैं इसका भी सत्यापन नहीं हो रहा। स्कूलों में सुरक्षा से लेकर बसों और अन्य नियमों की चेकिंग करने का दायित्व जिला प्रशासन, पुलिस और आरटीओ को है मगर किसी महकमे ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
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सेंटथेरेसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल और निर्मला कान्वेंट स्कूल में चाहे टीचर्स हों या फिर अन्य स्टाफ, सभी से पाक्सो एक्ट के तहत शपथ पत्र लिए जाने का प्रावधान है। सेंट थेरेसा स्कूल के प्रधानाचार्य फादर रायल एंथनी बताते हैं कि कैथोलिक डायस बरेली के अंतर्गत नौ जिलों में संस्था के विद्यालय चल रहे हैं।
संस्था द्वारा संचालित सभी विद्यालयों में चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी के अंतर्गत टीचर्स समेत सभी स्टाफ को नियुक्त के समय पॉक्सो एक्ट की एक-एक प्रति दी जाती है और उनसे अंडरटेकिंग भी ली जाती है। फादर ने बताया कि सत्र शुरू होने पर प्रत्येक वर्ष स्टाफ को जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है साथ ही उन्हें पॉक्सो एक्ट की कार्रवाई की जानकारी दी जाती है। विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसके लिए स्वयं का बलिदान तक करने की सीख दी जाती है।
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सीबीएसई से मान्यता प्राप्त पब्लिक स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई नियम कायदे हैं लेकिन कई स्कूल तो इन नियमों को पूरा ही नहीं करते। केवल नियमों की खानापूर्ति कागजों में ही कर दी जाती है। बताते हैं कि सीबीएसई की ओर से स्पष्ट निर्देश हैं कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के इंतजाम विशेष रूप से किए जाएं। लड़कियों के लिए महिला स्टाफ पर्याप्त संख्या में तैनात किया जाए, साथ ही लड़कियों के ब्लाक में पुरुष स्टाफ न आ सके, इसकी व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा क्लास रूमों के साथ ही स्कूल परिसर में जगह - जगह सीसीटीवी कैमरे लगे, ताकि स्कूल में होने वाली प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
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इन नियमों का कुछ बड़े स्कूल संचालक ही पालन कर पाते बाकी अधिकांश स्कूलों में न महिला स्टाफ पर्याप्त संख्या में है और न ही सीसीटीवी कैमरे ही पर्याप्त संख्या में लगे हैं, केवल औपचारिकता पूरी की गई है। इसके अतिरिक्त स्कूल बस के ड्राइवर और क्लीनर अपराधी किस्म के तो नहीं हैं, कौन हैं? इसका कई स्कूल संचालकों की ओर से पुलिस सत्यापन तक नहीं कराया गया है। इसी तरह बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों को घर से लाने एवं छोड़ने के काम में निजी वैन भी लगी हुई हैं। अभिभावकों को निजी वैन के ड्राइवर के नाम और मोबाइल नंबर को छोड़ कर उसका अता पता तक नहीं होता। स्कूलों में निजी वैन कौन चला रहे हैं इसका भी सत्यापन नहीं हो रहा। स्कूलों में सुरक्षा से लेकर बसों और अन्य नियमों की चेकिंग करने का दायित्व जिला प्रशासन, पुलिस और आरटीओ को है मगर किसी महकमे ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
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सेंटथेरेसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल और निर्मला कान्वेंट स्कूल में चाहे टीचर्स हों या फिर अन्य स्टाफ, सभी से पाक्सो एक्ट के तहत शपथ पत्र लिए जाने का प्रावधान है। सेंट थेरेसा स्कूल के प्रधानाचार्य फादर रायल एंथनी बताते हैं कि कैथोलिक डायस बरेली के अंतर्गत नौ जिलों में संस्था के विद्यालय चल रहे हैं।
संस्था द्वारा संचालित सभी विद्यालयों में चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी के अंतर्गत टीचर्स समेत सभी स्टाफ को नियुक्त के समय पॉक्सो एक्ट की एक-एक प्रति दी जाती है और उनसे अंडरटेकिंग भी ली जाती है। फादर ने बताया कि सत्र शुरू होने पर प्रत्येक वर्ष स्टाफ को जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है साथ ही उन्हें पॉक्सो एक्ट की कार्रवाई की जानकारी दी जाती है। विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसके लिए स्वयं का बलिदान तक करने की सीख दी जाती है।