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कुविवि के एचआरडीसी सेंटर को मिला देश में चौथा स्थान
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नैनीताल। यूजीसी की स्थायी समिति ने पिछले वर्ष के दौरान किए गए प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए देश भर के एचआरडीसी की लिस्ट जारी कर दी है। इस सूची में कुविवि के एचआरडीसी केंद्र को देशभर में चौथा स्थान प्राप्त हुआ है। इस वर्ष विश्वविद्यालय की यह एक और उपलब्धि है।
स्थायी समिति की समीक्षा प्रत्येक एचआरडीसी की ओर से किए गए स्व-मूल्यांकन और समिति के समक्ष ऑनलाइन प्रस्तुतीकरण पर आधारित थी। समिति द्वारा एचआरडीसी को चार समूहों में वर्गीकृत किया गया था। इनमें उच्च प्रदर्शन, मध्यम प्रदर्शन, कम प्रदर्शन और गैर-निष्पादक/डेटा की अपर्याप्तता शामिल था।
कुलपति प्रो. एनके जोशी ने बताया कि यूजीसी की ओर से जारी इस सूची में प्रथम स्थान यूनिवर्सिटी ऑफ केरला, द्वितीय स्थान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एवं तृतीय स्थान मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी हैदराबाद ने प्राप्त किया है, जबकि कुविवि चौथे स्थान पर रहा है।
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बताया कि इस वर्ष कुविवि ने देश की कई जाने माने विश्वविद्यालयों को पीछे छोड़ते हुए 26वें स्थान से छलांग लगाते हुए चौथे स्थान को प्राप्त किया है।
ज्ञात हो कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार के लिए विवि की ओर से शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में किए प्रयास के बलबूते उच्च शैक्षिक संस्थानों की नैशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क 2021 (एनआईआरएफ 2021) में फार्मेसी कैटेगिरी में 58वां स्थान एवं क्यूएस एशिया रैंकिंग में भी 551-600 स्थान मिला है। इसी के साथ इंडिया टुडे ग्रुप की ओर से कराए गए सर्वे में भी कुविवि को प्रदेश में पहला एवं देश में 27वां स्थान मिला है।
इस उपलब्धि पर विवि के कुलपति प्रो. एनके जोशी ने कहा कि यह सफलता और राष्ट्रीय पहचान हमारी प्रतिभाशाली फैकल्टी, समर्पित एवं ईमानदार गैर-शिक्षण सहयोगियों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। कुलपति प्रो. जोशी ने कहा कि सामूहिक प्रयासों से विवि लगातार उच्च शिक्षा के शीर्ष केंद्र के रूप में उभरने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
इस उपलब्धि पर यूजीसी एचआरडीसी सेंटर की निदेशक प्रो. दिव्या उपाध्याय जोशी ने खुशी जताते हुए कहा कि यह प्रारंभिक सफलता है और अभी रैंकिंग के पहले पायदान में आने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिसके लिए कई अभिनव प्रयोग एचआरडीसी सेंटर द्वारा किए जा रहे हैं।
सहायक निदेशक डॉ. रितेश साह ने कहा कि यह मानव संसाधन विकास केंद्र के कार्मिकों, विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों का योगदान है, साथ ही देश के विभिन्न विश्वविद्यालय के रिसोर्स पर्सन का भी इस उपलब्धि में योगदान रहा है।
इस अवसर पर कुलसचिव दिनेश चंद्रा, निदेशक डीएसबी परिसर प्रो.एलएम जोशी, निदेशक शोध एवं प्रसार प्रो. ललित तिवारी, निदेशक आईक्यूएसी प्रो. राजीव उपाध्याय, निदेशक डीआईसी प्रो. संजय पंत, उप कुलसचिव दुर्गेश डिमरी, विधान चौधरी, प्रकाश पांडेय्, नवीन पनेरू समेत कूटा के सदस्यों ने खुशी जताई है।
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स्थायी समिति की समीक्षा प्रत्येक एचआरडीसी की ओर से किए गए स्व-मूल्यांकन और समिति के समक्ष ऑनलाइन प्रस्तुतीकरण पर आधारित थी। समिति द्वारा एचआरडीसी को चार समूहों में वर्गीकृत किया गया था। इनमें उच्च प्रदर्शन, मध्यम प्रदर्शन, कम प्रदर्शन और गैर-निष्पादक/डेटा की अपर्याप्तता शामिल था।
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कुलपति प्रो. एनके जोशी ने बताया कि यूजीसी की ओर से जारी इस सूची में प्रथम स्थान यूनिवर्सिटी ऑफ केरला, द्वितीय स्थान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एवं तृतीय स्थान मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी हैदराबाद ने प्राप्त किया है, जबकि कुविवि चौथे स्थान पर रहा है।
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बताया कि इस वर्ष कुविवि ने देश की कई जाने माने विश्वविद्यालयों को पीछे छोड़ते हुए 26वें स्थान से छलांग लगाते हुए चौथे स्थान को प्राप्त किया है।
ज्ञात हो कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार के लिए विवि की ओर से शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में किए प्रयास के बलबूते उच्च शैक्षिक संस्थानों की नैशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क 2021 (एनआईआरएफ 2021) में फार्मेसी कैटेगिरी में 58वां स्थान एवं क्यूएस एशिया रैंकिंग में भी 551-600 स्थान मिला है। इसी के साथ इंडिया टुडे ग्रुप की ओर से कराए गए सर्वे में भी कुविवि को प्रदेश में पहला एवं देश में 27वां स्थान मिला है।
इस उपलब्धि पर विवि के कुलपति प्रो. एनके जोशी ने कहा कि यह सफलता और राष्ट्रीय पहचान हमारी प्रतिभाशाली फैकल्टी, समर्पित एवं ईमानदार गैर-शिक्षण सहयोगियों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। कुलपति प्रो. जोशी ने कहा कि सामूहिक प्रयासों से विवि लगातार उच्च शिक्षा के शीर्ष केंद्र के रूप में उभरने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
इस उपलब्धि पर यूजीसी एचआरडीसी सेंटर की निदेशक प्रो. दिव्या उपाध्याय जोशी ने खुशी जताते हुए कहा कि यह प्रारंभिक सफलता है और अभी रैंकिंग के पहले पायदान में आने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिसके लिए कई अभिनव प्रयोग एचआरडीसी सेंटर द्वारा किए जा रहे हैं।
सहायक निदेशक डॉ. रितेश साह ने कहा कि यह मानव संसाधन विकास केंद्र के कार्मिकों, विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों का योगदान है, साथ ही देश के विभिन्न विश्वविद्यालय के रिसोर्स पर्सन का भी इस उपलब्धि में योगदान रहा है।
इस अवसर पर कुलसचिव दिनेश चंद्रा, निदेशक डीएसबी परिसर प्रो.एलएम जोशी, निदेशक शोध एवं प्रसार प्रो. ललित तिवारी, निदेशक आईक्यूएसी प्रो. राजीव उपाध्याय, निदेशक डीआईसी प्रो. संजय पंत, उप कुलसचिव दुर्गेश डिमरी, विधान चौधरी, प्रकाश पांडेय्, नवीन पनेरू समेत कूटा के सदस्यों ने खुशी जताई है।