{"_id":"65aee64ee637578568075834","slug":"forests-started-burning-unseasonably-in-nainital-nainital-news-c-238-1-shld1020-2535-2024-01-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Nainital News: नैनीताल में बेमौसम धधकने लगे जंगल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Nainital News: नैनीताल में बेमौसम धधकने लगे जंगल
Tue, 23 Jan 2024 03:33 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Tue, 23 Jan 2024 03:33 AM IST
विज्ञापन
बेतालघाट में धारी की पहाड़ी पर लगी आग से उठता धुंआ।
नैनीताल/गरमपानी। नैनीताल डिविजन के जंगल बेमौसम धधकने लगे हैं। यदि विभाग ने समय रहते जंगलों को बचाने के लिए ठोस योजना तैयार नहीं की तो वन संपदा को ज्यादा नुकसान होगा।
पिछले वर्षों तक अप्रैल से लेकर जून तक जंगलों में आग लगती थी। इसे देखते हुए वन विभाग दो चरणों में फायर सीजन आयोजित करता था। पहला 15 नवंबर से 15 फरवरी तक और दूसरा 15 फरवरी से जून तक। इस दौरान विभाग जंगलों को आग से बचाने के लिए सड़कों के किनारे सफाई, झाड़ी कटान व कंट्रोल बर्निंग के लिए लोगों को जागरूक करता था लेकिन इस बार जनवरी से ही जंगल धधकने लगे हैं। रविवार रात नैनीताल के पास आलूखेत के जंगल में आग लग गई। जानकारी होने पर विभागीय कर्मचारियों ने किसी तरह आग पर काबू पाया। गरमपानी में थुवा की पहाड़ी, ज्योलीकोट और बेतालघाट में भी जंगलों में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। इससे वन संपदा को खासा नुकसान हुआ है। विशेषज्ञों की मानें तो इस बार अब तक न तो बरसात हुई है और न ही बर्फबारी। इसके चलते जंगलों में आग लगने की संभावनाएं पिछले वर्षों के मुकाबले कई गुना बढ़ गई हैं। ऐसे में आग से जंगलों को बचाना वन विभाग के लिए इस बार चुनौती साबित होने वाला है। उधर, धारी के पास की पहाड़ी में सोमवार सुबह अचानक आग लग गई। दोपहर बाद आग बुझने पर वन विभाग ने राहत की सांस ली।
अराजक तत्वों पर वन विभाग की नजर
नैनीताल। नैनीताल के पास के जंगलों में आग लगने के पीछे अराजक तत्वों का हाथ माना जा रहा है। ऐसे में वन विभाग की नजर अराजक तत्वों और नशेड़ियों पर है। विभाग का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति जंगलों में आग लगाते पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
मनोरा रैंज नैनीताल के वन क्षेत्राधिकारी मुकुल शर्मा ने बताया आलू खेत के जंगल में लगी आग को समय पर बुझा लिया गया था। आग कैसे लगी है, इसकी जांच कराई जा रही है। आसपास के ग्रामीणों से पूछताछ भी की जा रही है।
विज्ञापन
पिछले वर्षों तक अप्रैल से लेकर जून तक जंगलों में आग लगती थी। इसे देखते हुए वन विभाग दो चरणों में फायर सीजन आयोजित करता था। पहला 15 नवंबर से 15 फरवरी तक और दूसरा 15 फरवरी से जून तक। इस दौरान विभाग जंगलों को आग से बचाने के लिए सड़कों के किनारे सफाई, झाड़ी कटान व कंट्रोल बर्निंग के लिए लोगों को जागरूक करता था लेकिन इस बार जनवरी से ही जंगल धधकने लगे हैं। रविवार रात नैनीताल के पास आलूखेत के जंगल में आग लग गई। जानकारी होने पर विभागीय कर्मचारियों ने किसी तरह आग पर काबू पाया। गरमपानी में थुवा की पहाड़ी, ज्योलीकोट और बेतालघाट में भी जंगलों में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। इससे वन संपदा को खासा नुकसान हुआ है। विशेषज्ञों की मानें तो इस बार अब तक न तो बरसात हुई है और न ही बर्फबारी। इसके चलते जंगलों में आग लगने की संभावनाएं पिछले वर्षों के मुकाबले कई गुना बढ़ गई हैं। ऐसे में आग से जंगलों को बचाना वन विभाग के लिए इस बार चुनौती साबित होने वाला है। उधर, धारी के पास की पहाड़ी में सोमवार सुबह अचानक आग लग गई। दोपहर बाद आग बुझने पर वन विभाग ने राहत की सांस ली।
विज्ञापन
अराजक तत्वों पर वन विभाग की नजर
नैनीताल। नैनीताल के पास के जंगलों में आग लगने के पीछे अराजक तत्वों का हाथ माना जा रहा है। ऐसे में वन विभाग की नजर अराजक तत्वों और नशेड़ियों पर है। विभाग का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति जंगलों में आग लगाते पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
मनोरा रैंज नैनीताल के वन क्षेत्राधिकारी मुकुल शर्मा ने बताया आलू खेत के जंगल में लगी आग को समय पर बुझा लिया गया था। आग कैसे लगी है, इसकी जांच कराई जा रही है। आसपास के ग्रामीणों से पूछताछ भी की जा रही है।