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पहली बार पहाड़ में मिलने वाली चीर फिजेंट भाबर में मिली
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नंधौर अभयारण्य में चीड़ फिजेंट
हल्द्वानी। पहाड़ों में मिलने वाली चीर फीजेंट (पक्षी) पहली बार भाबर में रिपोर्ट हुई है। नंधौर अभयारण्य में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने चीर फीजेंट (जन्तु वैज्ञानिक नाम कैट्रियस वॉलिची) को देखने के साथ फोटोग्राफ साक्ष्य भी एकत्र किए हैं।
वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार नंधौर अभयारण्य में टाइगर मानीटरिंग के सिलसिले में अप्रैल-2019 में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी प्राजक्ता हूशंगाबादकर व समन्वयक मिराज अनवर अपनी टीम के साथ गए थे। इस दौरान उन्हें नंधौर नदी के किनारे (583 मीटर की ऊंचाई) पर चीर फीजेंट पक्षी दिखाई दिया जबकि यह पक्षी पहाड़ के ऊंचाई वाले स्थान 1400 से 3000 मीटर पर मिलता है।
विशेषता
चीर फीजेंट की पूंछ लंबी होती है। यह घास और दाने खाती है।
वास स्थल प्रभावित
हल्द्वानी। डब्ल्यूडब्यूएफ के समन्वयक मिराज अनवर बताते हैं कि चीर फीजेंट का पंगोट (नैनीताल) में भी वास स्थल है। अप्रैल के समय पंगोट और आसपास के जंगल में आग लगी हुई थी। ऐसे में आशंका है कि वनों में आग लगने और वास स्थल प्रभावित होनेके कारण चीर फीजेंट पक्षी भाबर के क्षेत्र में पहुंचे हों क्योंकि अभी तक चीर फीजेंट भाबर में रिपोर्ट नहीं हुआ था।
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यह भी संभव है कि उनका वास स्थल नंधौर अभयारण्य की पहाड़ियों में भी हो। दक्षिण वृत्त वन संरक्षक डॉ. तेजस्विनी पाटिल के अनुसार इस संबंध में जल्द ही पक्षी विशेषज्ञों के माध्यम से विस्तार से अध्ययन कराया जाएगा। वन कर्मी व पक्षी विशेषज्ञ कल्याण सिंह सजवाण के अनुसार चीर फीजेंट विनायक, पंगोट, विनायक आदि जगहों पर मिलता है। मानवीय गतिविधियों के बढ़ने से वास स्थल प्रभावित हुआ है।
नंधौर अभयारण्य: जैव विविधता की दृष्टि समृद्ध
हल्द्वानी। नंधौर अभयारण्य जैव विविधता की दृष्टि बेहद समृद्ध रहा है। यहां तुलनात्मक तौर पर मानवीय गतिविधियां कम हैं। यहां पर बाघ, हाथी समेत अन्य वन्यजीवों की अच्छी खासी संख्या है। करीब दस साल पहले यहां पर (हल्द्वानी वन प्रभाग था) स्ट्राइप्ड हायना रिपोर्ट हो चुका था। अब यहां पर चीर फीजेंट पक्षी रिपोर्ट हुआ है।
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वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार नंधौर अभयारण्य में टाइगर मानीटरिंग के सिलसिले में अप्रैल-2019 में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी प्राजक्ता हूशंगाबादकर व समन्वयक मिराज अनवर अपनी टीम के साथ गए थे। इस दौरान उन्हें नंधौर नदी के किनारे (583 मीटर की ऊंचाई) पर चीर फीजेंट पक्षी दिखाई दिया जबकि यह पक्षी पहाड़ के ऊंचाई वाले स्थान 1400 से 3000 मीटर पर मिलता है।
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विशेषता
चीर फीजेंट की पूंछ लंबी होती है। यह घास और दाने खाती है।
वास स्थल प्रभावित
हल्द्वानी। डब्ल्यूडब्यूएफ के समन्वयक मिराज अनवर बताते हैं कि चीर फीजेंट का पंगोट (नैनीताल) में भी वास स्थल है। अप्रैल के समय पंगोट और आसपास के जंगल में आग लगी हुई थी। ऐसे में आशंका है कि वनों में आग लगने और वास स्थल प्रभावित होनेके कारण चीर फीजेंट पक्षी भाबर के क्षेत्र में पहुंचे हों क्योंकि अभी तक चीर फीजेंट भाबर में रिपोर्ट नहीं हुआ था।
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यह भी संभव है कि उनका वास स्थल नंधौर अभयारण्य की पहाड़ियों में भी हो। दक्षिण वृत्त वन संरक्षक डॉ. तेजस्विनी पाटिल के अनुसार इस संबंध में जल्द ही पक्षी विशेषज्ञों के माध्यम से विस्तार से अध्ययन कराया जाएगा। वन कर्मी व पक्षी विशेषज्ञ कल्याण सिंह सजवाण के अनुसार चीर फीजेंट विनायक, पंगोट, विनायक आदि जगहों पर मिलता है। मानवीय गतिविधियों के बढ़ने से वास स्थल प्रभावित हुआ है।
नंधौर अभयारण्य: जैव विविधता की दृष्टि समृद्ध
हल्द्वानी। नंधौर अभयारण्य जैव विविधता की दृष्टि बेहद समृद्ध रहा है। यहां तुलनात्मक तौर पर मानवीय गतिविधियां कम हैं। यहां पर बाघ, हाथी समेत अन्य वन्यजीवों की अच्छी खासी संख्या है। करीब दस साल पहले यहां पर (हल्द्वानी वन प्रभाग था) स्ट्राइप्ड हायना रिपोर्ट हो चुका था। अब यहां पर चीर फीजेंट पक्षी रिपोर्ट हुआ है।