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सावन का पहला सोमवार, मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Tue, 19 Jul 2016 12:58 AM IST
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सावन सोमवार
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हल्द्वानी। सावन मास के पहले दिन आज शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही लोग शिव मंदिरों में शिवार्चन, जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक, रुद्रीपाठ, हवन, पूजन करते रहे। शिव लिंगों पर जल चढ़ाने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।
सावन के पहले सोमवार को आज पिपलेश्वर, आंवलेश्वर, शीशमहल शिव मंदिर, रामपुर रोड स्थित दत्तात्रेय मंदिर, बेलबाबा समेत तमाम मंदिरों में लोगों ने शिवार्चन किया। घर-घर में भी शिवार्चन कर मनोकामना सिद्धि की प्रार्थना की गई। सावन मास भगवान शिव को अत्यधिक प्रिय है। इस महीने में शिव का पूजन उत्तम माना गया है। कई लोगों ने सावन मास शुरू होते ही शिव महिमन स्तोत्र, पंचाक्षर मंत्र, शिव महापुराण, विल्वाष्टकम इत्यादि स्तोत्रों का पाठ करना शुरू कर दिया है। मंदिरों में लोगों ने ‘शिव लोकंमवाप्नोति, शिवेन सह मोदते’ मंत्र के साथ शिव आराधना की।
शिव लिंगों में जल चढ़ाने के लिए सुबह से ही मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने शिवालयों में शिव लिंग में दूध, दही, घी, शहद, चीनी, गंगाजल, सुगंधि आदि द्रव्यों से अभिषेक किया। रुद्री, लघु रुद्री, महारुद्री, अति रुद्र के साथ ही विल्व पत्रों से पूजा अर्चना और जलाभिषेक किया गया है। माना जाता है कि ऐसा करने से मनुष्य को सभी पापों की निवृत्ति और अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है। कई लोगों ने अपने घरों में शिवार्चन भी कराया।
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सावन के पहले सोमवार को आज पिपलेश्वर, आंवलेश्वर, शीशमहल शिव मंदिर, रामपुर रोड स्थित दत्तात्रेय मंदिर, बेलबाबा समेत तमाम मंदिरों में लोगों ने शिवार्चन किया। घर-घर में भी शिवार्चन कर मनोकामना सिद्धि की प्रार्थना की गई। सावन मास भगवान शिव को अत्यधिक प्रिय है। इस महीने में शिव का पूजन उत्तम माना गया है। कई लोगों ने सावन मास शुरू होते ही शिव महिमन स्तोत्र, पंचाक्षर मंत्र, शिव महापुराण, विल्वाष्टकम इत्यादि स्तोत्रों का पाठ करना शुरू कर दिया है। मंदिरों में लोगों ने ‘शिव लोकंमवाप्नोति, शिवेन सह मोदते’ मंत्र के साथ शिव आराधना की।
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शिव लिंगों में जल चढ़ाने के लिए सुबह से ही मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने शिवालयों में शिव लिंग में दूध, दही, घी, शहद, चीनी, गंगाजल, सुगंधि आदि द्रव्यों से अभिषेक किया। रुद्री, लघु रुद्री, महारुद्री, अति रुद्र के साथ ही विल्व पत्रों से पूजा अर्चना और जलाभिषेक किया गया है। माना जाता है कि ऐसा करने से मनुष्य को सभी पापों की निवृत्ति और अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है। कई लोगों ने अपने घरों में शिवार्चन भी कराया।
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