Haldwani: अधूरे संसाधन...हाइड्रेंट भी दबे हुए, आखिर कैसे आग बुझाएंगे, घटना होने पर अल्मोड़ा-US नगर पर निर्भरता
हल्द्वानी, रामनगर और नैनीताल में फायर हाइड्रेंट की स्थिति खराब है। तीनों जगह कुल 115 हाइड्रेंट हैं, जबकि क्रियाशील की संख्या 29 ही है। बड़ी घटना होने पर अल्मोड़ा और ऊधमसिंह नगर पर ही निर्भरता रहती है।
विस्तार
मार्च से शुरू होने वाला फायर सीजन का चार महीने का पीक कैसे कटेगा, कोई नहीं जानता। कारण यह है कि आग बुझाने के लिए अग्निशमन विभाग पर बेहद कम संसाधन हैं और उनमें भी काफी पुराने हैं। उन्हीं के बूते विभाग तैयारी को अंतिम रूप दे रहा है। हाइड्रेंट के सड़कों के भीतर दबे होने के कारण पानी की अपनी जरूरतों को पूरी करने के लिए विभाग को विकल्प तलाशना पड़ रहे हैं।
नैनीताल जिले में हल्द्वानी, रामनगर और नैनीताल में फायर स्टेशन है। हल्द्वानी और रामनगर में दो-दो जबकि नैनीताल में तीन बड़े वाहन (दमकल) हैं। ये पिछले कई साल से इतनी ही संख्या में हैं, जबकि आबादी और मोहल्ले दोनों बढ़े हैं। नैनीताल में भी होटलों की संख्या काफी बढ़ी है। पर्यटकों की आवाजाही भी तेज हुई है। हल्द्वानी व नैनीताल में उपलब्ध दमकल वाहनों में से भी एक-एक हेलिपैड पर रहते हैं। इन जगहों पर एक-एक बड़े दमकल की और जरूरत है। हल्द्वानी में दो वाटर मिस्ट एक्सटिंग्विशर जबकि हाईप्रेशर वाले चार वाहन हैं। बैकपैक सेट वाली दो बाइक हैं। ये संसाधन इतने कम हैं कि बड़ी घटना होने पर अल्मोड़ा और ऊधमसिंह नगर पर ही निर्भरता रहती है। वहां से दमकल वाहन आने में काफी वक्त लगने के कारण आग से नुकसान ज्यादा हो जाता है। यदि संसाधन समय पर मिल जाएं तो नुकसान कम किया जा सकता है।
फायर हाइड्रेंट की स्थिति और खराब
हल्द्वानी, रामनगर और नैनीताल में फायर हाइड्रेंट की स्थिति खराब है। तीनों जगह कुल 115 हाइड्रेंट हैं, जबकि क्रियाशील की संख्या 29 ही है। शेष जमीन में दब चुके हैं। इनकी जगह नए नहीं बनाए गए। जो हाइड्रेंट सही भी हैं, उनसे घटना होने पर सही वक्त पर पानी मिलना मुश्किल हो जाता है। दो माह पहले हल्द्वानी शहर के नया बाजार की दुकानों में आग लगने पर यही हुआ था। सब एक-दूसरे को फोन करते रहे और पानी मिला काफी समय बाद।
शहर कुल हाइड्रेंट निष्क्रिय
हल्द्वानी 18 18
रामनगर 14 14
नैनीताल 83 54
64 नए हाइड्रेंट की डिमांड
हल्द्वानी और रामनगर में 15-15 जबकि नैनीताल में 34 नए हाइड्रेंट की डिमांड की गई है। जल निगम इसकी व्यवस्था कराएगा। ये सभी आग लगने की घटना को लेकर संवेदनशील स्थानों पर बनाए जाने हैं। ताकि आसानी से पानी मिल सके।
- बड़ी गाड़ियों की क्षमता - 3000 से 5000 लीटर
- लगातार आग बुझाने पर पानी खत्म होने का समय - 20 से 30 मिनट
- छोटी गाड़ियों की क्षमता - 500 लीटर
हर सीजन में 200 से 300 कॉल
फायर सीजन में हल्द्वानी से आग लगने की जानकारी देने के लिए औसतन 250-300 काॅल आती है। इसके अलावा अल्मोड़ा में 300 काॅल का औसत है।
जो संसाधन हैं उसके जरिये हमारी पूरी तैयारी है। कहीं से भी आग लगने की सूचना पर दमकल मौके पर तत्काल पहुंच रहा है। रिस्पांस टाइम बेहतर है। गंभीर स्थिति में रूद्रपुर या रामनगर से भी वाहन मंगा लिया जाता है। -नरेंद्र सिंह कुंवर, प्रभारी सीएफओ