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नैनीताल: जरक के पत्तों के पकौड़े खाने से एक ही परिवार के आठ लोग बीमार, बीडी पांडे अस्पताल में भर्ती

Sat, 22 Aug 2026 11:26 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: Heera Updated Sat, 22 Aug 2026 11:26 PM IST
सार

नैनीताल के मल्लीताल क्षेत्र में स्थानीय जरक पत्तों के पकौड़े खाने से एक ही परिवार के आठ लोग गंभीर फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए। यह घटना बिना पहचान और अधूरी जानकारी के जंगली वनस्पतियों के उपयोग के खतरों को उजागर करती है।

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Eight members of a family fell ill after eating pakoras made from jarak leaves
बीडी पांडे अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिना पहचान और अधूरी जानकारी के जंगली वनस्पतियों का खान-पान में उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए कितना घातक हो सकता है, इसका एक गंभीर मामला नैनीताल के मल्लीताल क्षेत्र में सामने आया है। यहां स्थानीय रूप से उगने वाले जरक के पत्तों के पकौड़े खाने से एक ही परिवार के आठ लोग गंभीर रूप से फूड पॉइजनिंग (खाद्य विषाक्तता) का शिकार हो गए।

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अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार प्रभावितों में 23 वर्ष के युवाओं से लेकर 90 वर्ष के बुजुर्ग शामिल हैं। पकौड़े खाने के कुछ ही देर बाद सभी परिजनों को उल्टी, पेट में मरोड़ और चक्कर आने की गंभीर शिकायतें होने लगीं। उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए लोग तत्काल मल्लीताल स्थित बीडी पांडे अस्पताल ले जाया गया।

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अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमएस दुग्ताल ने बताया कि सभी मरीजों को आपातकालीन वार्ड में भर्ती कर तुरंत एंटी-टॉक्सिन और आवश्यक तरल पदार्थ दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि सभी की हालत अब खतरे से बाहर है। इस फूड पॉइजनिंग की चपेट में आकर बीमार होने वालों में 90 वर्षीय महेश चंद्र साह, 83 वर्षीय सुरेंद्र लाल साह, 58 वर्षीय अनिल साह, 52 वर्षीय विक्रम साह, 46 वर्षीय कविता साह, 33 वर्षीय अनंता ठुलघरिया, 33 वर्षीय अक्षय कुमार और 23 वर्षीय मनीषा शामिल हैं।

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यह बोले विशेषज्ञ
वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ललित तिवारी के अनुसार इस पौधे को वैज्ञानिक भाषा में फाइटोलेका एसीनोसा या हिमालयन पोकबेरी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि इस पौधे की पत्तियों और तनों में सैपोनिन और फाइटोलेको टॉक्सिन जैसे जटिल और जहरीले रासायनिक यौगिक होते हैं। यदि इन पत्तों को बिना अच्छी तरह धोए, उबाले या अपरिपक्व अवस्था में खाया जाए, तो ये सीधे मानव तंत्रिका तंत्र और पाचन तंत्र पर हमला करते हैं, जिससे शरीर में पानी की तीव्र कमी और ऑर्गन डैमेज का खतरा बढ़ जाता है।

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