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अर्थशास्त्र और पर्यावरण एक दूसरे के पूरक, जनसंख्या विस्फोट देश के लिए घातक

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jun 2022 01:36 AM IST
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Economics and environment complement each other, population explosion is fatal for the country
उत्तराखंड मुक्त विवि में राष्ट्रीय संगोष्ठी में मौजूद अतिथिगण। विज्ञप्ति
हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने पिछले 75 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास विषय पर चर्चा की और अर्थशास्त्र और पर्यावरण को एक दूसरे का पूरक बताया। वक्ताओं ने जनसंख्या विस्फोट को देश के लिए घातक बताया।
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आजादी का अमृत महोत्सव के तहत आयोजित संगोष्ठी में विभिन्न संस्थानों से आए अतिथिे अर्थशास्त्री प्रोफेसर विक्रम केशरी पटनायक ने स्वतंत्रता से पूर्व और बाद की भारत की अर्थव्यवस्था से रूबरू कराया। एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री प्रो. एमसी सती ने उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी में चलाए जा रहे क्वालिटी ऑफ एजूकेशन की सराहना की। उन्होंने 1922 से 1947 तक के विभिन्न आंदोलनों पर बड़ी गहराई से प्रकाश डाला। प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे ने अर्थशास्त्र की नई परिभाषा पर प्रकाश डाला और पर्यावरण व अर्थशास्त्र के बीच व्यापक संबंध को दर्शाया। दून विश्वविद्यालय के प्रो. ममगई और डॉ. शालिनी ने क्षेत्रीय असमानता और रोजगार जैसी समस्याओं पर विचार रखे। समापन करते हुए अध्यक्ष प्रो. आरसी मिश्रा ने जनसंख्या विस्फोट को देश के लिए घातक बताया। कुल सचिव प्रो. पीडी पंत ने अतिथियों का आभार जताया। इस अवसर पर डॉ. नमिता वर्मा, डॉ. एमएम जोशी, डॉ. सूर्यभान, डॉ. दीपांकर जोशी, डॉ. घनश्याम, डॉ. सीता, डॉ. ललित पंत, डॉ. राजेंद्र कैरा मौजूद रहे। संचालन अमित जोशी ने किया।
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