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Uttarakhand: सोशल मीडिया की चकाचौंध युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा, इन बातों का रखें ध्यान

Mon, 06 Oct 2025 11:15 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Updated Mon, 06 Oct 2025 11:15 AM IST
सार

डॉ. रुचि तिवारी के अनुसार बदलती जीवनशैली और आभासी दुनिया के प्रभाव के कारण युवा तेजी से मानसिक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। यह समस्या अब एक व्यक्तिगत मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चुनौती बन गई है।

 

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Don't dislike your life in pursuit of likes on social media.
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

बदलती जीवनशैली और आभासी दुनिया की चकाचौंध के चलते युवा तेजी से मानसिक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ये समस्या केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक सामाजिक चुनौती बन चुकी है जिस पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है। यह कहना है मनोचिकित्सक डॉ. रुचि तिवारी का।

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नैनीताल पहुंचीं लखनऊ निवासी डॉ. रुचि तिवारी ने खास बातचीत में बताया कि 16 से 26 वर्ष की युवतियां मानसिक स्वास्थ्य का बोझ सबसे ज्यादा उठाती हैं क्योंकि यह पढ़ाई और कॅरिअर के लिए अधिक तनाव लेती हैं। ‘जेन जी’ में सोशल मीडिया का उपयोग बढ़ गया है। दिखावटी दुनिया में लाइक्स व कमेंट के चक्कर में युवतियां अवसाद व तनाव की चपेट में आ रही हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाएं तनाव व अवसाद से अधिक प्रभावित हो रहीं हैं। इसका खुलासा विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी एक रिपोर्ट में भी हुआ है।
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सोशल मीडिया का प्रभाव
डॉ. रुचि तिवारी ने बताया कि युवा वर्ग सोशल मीडिया पर दूसरों की फ़िल्टर की हुई ज़िंदगी देखते हैं और उनसे अपनी तुलना करने लगते हैं। इससे उनमें असुरक्षा और हीन भावना पैदा होती है। इससे उनकी सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। मानसिक स्वास्थ्य का सीधा संबंध शारीरिक स्वास्थ्य से होता है। जंक फूड का अधिक सेवन, रात में देर तक जागना, नींद की कमी और शारीरिक गतिविधि का अभाव भी युवाओं के दिमाग और शरीर दोनों को प्रभावित करता है।
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ऐसे करें पहचान
लगातार उदास रहना, चिड़चिड़ापन, थकान महसूस होना तनाव व अवसाद के लक्षण हैं। कई बार महिलाएं इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देती हैं जिससे कुछ समय बाद स्थिति गंभीर हो जाती है।

इन बातों का रखें ध्यान
- सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए समय निर्धारित करें।
- अपने परिवार और दोस्तों से खुलकर बात करें।
- डाइट में संतुलित और पौष्टिक आहार शामिल करें।
- नियमित रूप से व्यायाम करें।

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