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सीएम के साथ जोर जबरदस्ती न करे सीबीआई
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल
Updated Tue, 31 May 2016 11:13 PM IST
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हाईकोर्ट ने स्टिंग मामले में जहां सीएम हरीश रावत को जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं वहीं सीबीआई से कहा है कि वह इस प्रकरण पर संयम बरते और सीएम के साथ जोर जबरदस्ती न करे। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 20 जून की तिथि नियत की है तथा मामले में बागी हरक सिंह रावत को भी नोटिस जारी किया गया है।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता (सीएम) की ओर से सुप्रीम कोर्ट से आए वरिष्ठ अधिवक्ता हिरेंद्र रावल की ओर से कहा गया था कि स्टिंग ऑपरेशन की जांच के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी गठित की है और यह एजेंसी इस मामले की जांच करने में सक्षम है। याचिकाकर्ता की ओर से सीबीआई की जांच संबंधी अधिसूचना को निरस्त किए जाने के लिए अपनी याचिका में संशोधन की मांग की गई थी जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए 8 दिन के भीतर संशोधित करने को कहा है। इन संशोधन पर केंद्र सरकार और सीबीआई को दस दिन में जवाब देने को कहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया कि स्टिंग के समय हरक सिंह रावत जौलीग्रांट में मौजूद थे और स्टिंगकर्ता के खिलाफ कई आपराधिक मामले हैं। कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हिरेंद्र रावल, अपर महाधिवक्ता बीबीएस नेगी, सीबीआई की ओर से राकेश थपलियाल व संदीप टंडन, केंद्र की ओर से ललित शर्मा, राज्य सरकार की ओर से शेखर नाफटे ने पैरवी की। पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सीएम को जांच में सहयोग करने के निर्देश देते हुए सीबीआई को आदेशित किया कि वह इस प्रकरण पर बलयुक्त कार्यवाही न करे। कोर्ट ने बागी विधायक हरक सिंह रावत को भी नोटिस जारी किया तथा अगली सुनवाई के लिए 20 जून की तिथि नियत की है।
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बता दें कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 20 मई को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई की ओर से स्टिंग प्रकरण में प्रारंभिक जांच किए जाने को चुनौती देते हुए उसे निरस्त करने की मांग की थी। याचिका में कहा कि जब सीबीआई जांच की संस्तुति की गई थी तब राज्य सरकार अस्तित्व में नहीं थी। अब सरकार अस्तित्व में है और स्टिंग की जांच करने में राज्य पुुलिस सक्षम है। इसलिए सीबीआई जांच निरस्त कर दी जाए। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि राज्य कैबिनेट की बैठक में सीबीआई जांच की संस्तुति वापस लेने का निर्णय लिया गया है।
याचिका में यह भी कहा गया था कि राष्ट्रपति शासन के दौरान 2 अप्रैल 2016 को राज्यपाल ने मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग की जांच की संस्तुति की थी। केंद्र सरकार ने उसी दिन स्टिंग की सीबीआई जांच की अधिसूचना जारी की थी। सीबीआई ने हरीश रावत को 9 मई 2016 को सीबीआई की अदालत में पेश होने के निर्देश दिए थे। किंतु हरीश रावत की ओर से सीबीआई को पत्र लिखकर कहा गया था कि 10 मई को उन्हें विधानसभा में बहुमत सिद्ध करना है, जिस कारण 9 मई को कांग्रेस विधानसभा दल की बैठक है। इसलिए वह 9 मई को सीबीआई के समक्ष पेश नहीं हो सकते है और भविष्य में सीबीआई की जांच में सहयोग करेंगे।
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न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता (सीएम) की ओर से सुप्रीम कोर्ट से आए वरिष्ठ अधिवक्ता हिरेंद्र रावल की ओर से कहा गया था कि स्टिंग ऑपरेशन की जांच के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी गठित की है और यह एजेंसी इस मामले की जांच करने में सक्षम है। याचिकाकर्ता की ओर से सीबीआई की जांच संबंधी अधिसूचना को निरस्त किए जाने के लिए अपनी याचिका में संशोधन की मांग की गई थी जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए 8 दिन के भीतर संशोधित करने को कहा है। इन संशोधन पर केंद्र सरकार और सीबीआई को दस दिन में जवाब देने को कहा है।
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याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया कि स्टिंग के समय हरक सिंह रावत जौलीग्रांट में मौजूद थे और स्टिंगकर्ता के खिलाफ कई आपराधिक मामले हैं। कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हिरेंद्र रावल, अपर महाधिवक्ता बीबीएस नेगी, सीबीआई की ओर से राकेश थपलियाल व संदीप टंडन, केंद्र की ओर से ललित शर्मा, राज्य सरकार की ओर से शेखर नाफटे ने पैरवी की। पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सीएम को जांच में सहयोग करने के निर्देश देते हुए सीबीआई को आदेशित किया कि वह इस प्रकरण पर बलयुक्त कार्यवाही न करे। कोर्ट ने बागी विधायक हरक सिंह रावत को भी नोटिस जारी किया तथा अगली सुनवाई के लिए 20 जून की तिथि नियत की है।
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बता दें कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 20 मई को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई की ओर से स्टिंग प्रकरण में प्रारंभिक जांच किए जाने को चुनौती देते हुए उसे निरस्त करने की मांग की थी। याचिका में कहा कि जब सीबीआई जांच की संस्तुति की गई थी तब राज्य सरकार अस्तित्व में नहीं थी। अब सरकार अस्तित्व में है और स्टिंग की जांच करने में राज्य पुुलिस सक्षम है। इसलिए सीबीआई जांच निरस्त कर दी जाए। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि राज्य कैबिनेट की बैठक में सीबीआई जांच की संस्तुति वापस लेने का निर्णय लिया गया है।
याचिका में यह भी कहा गया था कि राष्ट्रपति शासन के दौरान 2 अप्रैल 2016 को राज्यपाल ने मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग की जांच की संस्तुति की थी। केंद्र सरकार ने उसी दिन स्टिंग की सीबीआई जांच की अधिसूचना जारी की थी। सीबीआई ने हरीश रावत को 9 मई 2016 को सीबीआई की अदालत में पेश होने के निर्देश दिए थे। किंतु हरीश रावत की ओर से सीबीआई को पत्र लिखकर कहा गया था कि 10 मई को उन्हें विधानसभा में बहुमत सिद्ध करना है, जिस कारण 9 मई को कांग्रेस विधानसभा दल की बैठक है। इसलिए वह 9 मई को सीबीआई के समक्ष पेश नहीं हो सकते है और भविष्य में सीबीआई की जांच में सहयोग करेंगे।