फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Dmuwadunga Tech's unique device made by Manoj

दमुवाढूंगा के बीटेक पास मनोज ने बनाई अनोखी डिवाइस

Wed, 02 Sep 2015 01:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/हल्द्वानी।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/हल्द्वानी। Updated Wed, 02 Sep 2015 01:09 AM IST
विज्ञापन

दमुवाढूंगा के मनोज कुमार की स्मार्ट कार्ड तकनीकी से भविष्य में राशन की दुकानों में कालाबाजारी खत्म हो जाएगी।

विज्ञापन


 गल्ले की दुकान से उपभोक्ता के कोटे का राशन जारी होते ही पूरी डिटेल उपभोक्ता के मोबाइल में एसएमएस के साथ-साथ खाद्य विभाग के सर्वर में दर्ज हो जाएगी।

गल्ला विक्रेता राशन के एक दान की भी हेराफेरी नहीं कर सकेगा। मनोज कुमार की स्मार्ट कार्ड तकनीकी को भारत सरकार ने पेटेंट कर लिया है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली में राशन की कालाबाजारी होती है। दुकानदार उपभोक्ताओं का कोटा खुले बाजार में बेच देते हैं। उपभोक्ता दुकानों के चक्कर काटकर थक हार जाते हैं। दुकान में खाद्यान्न का स्टाक और उपभोक्ताओं को वितरण का कंप्यूटराइज्ड रिकार्ड नहीं होता है। मैनुअल रिकार्ड में धांधली होती है।
विज्ञापन


दमुवाढूंगा निवासी कैप्टन जगदीश चंद्र के बेटे मनोज कुमार ने राशन वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए स्मार्ट कार्ड तकनीकी की खोज की है। मनोज बीटेक पास है। उसने एक डिवाइस बनाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एटीएम कार्ड की तर्ज पर राशन कार्ड भी बनाया है। कार्ड में उपभोक्ता की पूरी डिटेल फीड होगी। कार्ड को डिवाइस में स्वैप करते ही उपभोक्ता का नाम, पता और राशन का कोटा डिस्पले होगा।

डिवाइस मशीन हर राशन विक्रेता की दुकान में लगाई जाएगी। इसे विक्रेता को ही आपरेट करना होगा। कार्ड स्पैव करने पर डिवाइस संबंधित उपभोक्ता को राशन जारी करने की कमांड मांगेगी।

कमांड ओके करते ही संबंधित उपभोक्ता को उसका राशन जारी हो जाएगा। उपभोक्ता को राशन का कोटा जारी होने की तत्काल रिपोर्ट उपभोक्ता के मोबाइल में मैसेज और खाद्य विभाग के सेंट्रल सर्वर में चली जाएगी। इससे गल्ले की दुकान का स्टाक और वितरण प्रणाली पर आनलाइन निगरानी होगी।

मनोज कुमार के मुताबिक डिवाइस आफ लाइन भी काम करेगी। लाइट जाने या फिर सर्वर डाउन होने पर जारी होने वाले राशन के कोटे का पूरा रिकार्ड डिवाइस में सेव रहेगा।

सर्वर को सिग्नल मिलते ही उसका डेटा खाद्य विभाग के सेंट्रल सर्वर में सुरक्षित हो जाएगा। मनोज के मुताबिक पांच मई 2015 को उसने अपनी तकनीकी को भारत सरकार के डिपाटमेंट आफ साइंस (डीएसटी) को भेजा था।


सरकार ने इस तकनीकी को पेटेंट कर लिया है। मनोज के मुताबिक स्मार्ट कार्ड डिवाइस बनाने में अधिकतम खर्च 20 हजार आएगा। उसे इस तकनीकी में काम करने में दो साल लगे, जबकि डिवाइस सात महीने में तैयार की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed