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मजदूर संगठनों का उपश्रमायुक्त दफ्तर पर प्रदर्शन
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हल्द्वानी श्रम कार्यालय में प्रदर्शन करते डेल्टा कर्मी। अमर उजाला
हल्द्वानी। रामनगर-काशीपुर मार्ग पर स्थित डेल्टा फैक्ट्री के श्रमिकों के वेतन भुगतान कराने की मांग को लेकर बुधवार को विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने उपश्रमायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि प्रबंधन ने गैरकानूनी ढंग से फैक्ट्री बंद कर कर श्रमिकों का वेतन भुगतान नहीं किया है। इधर, उपश्रमायुक्त ने विवाद का हल नहीं निकलने पर इस मामले को लेबर कोर्ट भेजने की बात कही है।
क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, इंकलाबी मजदूर केन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन और प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र के बैनर तले श्रमिक जुलूस निकालकर बुधवार दोपहर उपश्रमायुक्त कार्यालय पहुंचे और फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।
श्रमिक प्रतिनिधि उमेर मोहम्मद ने कहा कि डेल्टा फैक्ट्री को बंद करने के प्रयास जुलाई 2018 से किए जा रहे हैं। शासन से डेल्टा के प्रबंधन ने दो बार फैक्ट्री बंद करने की अनुमति मांगी मगर शासन ने इसकी अनुमति नहीं दी। आरोप लगाया कि औद्योगिक विवाद अधिनियम 1948 में दर्ज होने के बावजूद प्रबंधन ने मजदूरों को एक साल से वेतन नहीं दिया है।
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श्रमिक प्रतिनिधि मदन सिंह ने चेतावनी दी कि अगर समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ तो श्रमिक देहरादून कूच करेंगे। श्रमिकों ने उपश्रमायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा। इस दौरान विभिन्न संगठनों के टीकाराम पांडेय, मुकेश भंडारी, उमेश, रजनी, नीता, तुलसी, पंकज, खीमचंद्र, सतीश, हिमांशु, रीता, चंपा देवी, मीना देवी, रोशन सिंह आदि मौजूद रहे। इसके बाद मजदूर भविष्य निधि कार्यालय भी गए और पीएफ के संबंध में ज्ञापन दिया।
डेल्टा के श्रमिकों के तीन माह का वेतन भुगतान करने के संबंध में फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ करीब 23 लाख 98 हजार रुपये की रिकबरी निकाली गई थी लेकिन प्रबंधन ने भुगतान नहीं किया। अब दिल्ली के पते पर रिकबरी भेजी गई है। बुधवार को श्रमिकों से वार्ता में फैक्ट्री स्वामी उपस्थित नहीं हुए इस कारण समस्या का हल नहीं हो सका। अब इस मामले को लेबर कोर्ट को संदर्भित किया जा रहा है।
- एनसी कुलाश्री, उपश्रमायुक्त कुमाऊं
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क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, इंकलाबी मजदूर केन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन और प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र के बैनर तले श्रमिक जुलूस निकालकर बुधवार दोपहर उपश्रमायुक्त कार्यालय पहुंचे और फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।
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श्रमिक प्रतिनिधि उमेर मोहम्मद ने कहा कि डेल्टा फैक्ट्री को बंद करने के प्रयास जुलाई 2018 से किए जा रहे हैं। शासन से डेल्टा के प्रबंधन ने दो बार फैक्ट्री बंद करने की अनुमति मांगी मगर शासन ने इसकी अनुमति नहीं दी। आरोप लगाया कि औद्योगिक विवाद अधिनियम 1948 में दर्ज होने के बावजूद प्रबंधन ने मजदूरों को एक साल से वेतन नहीं दिया है।
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श्रमिक प्रतिनिधि मदन सिंह ने चेतावनी दी कि अगर समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ तो श्रमिक देहरादून कूच करेंगे। श्रमिकों ने उपश्रमायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा। इस दौरान विभिन्न संगठनों के टीकाराम पांडेय, मुकेश भंडारी, उमेश, रजनी, नीता, तुलसी, पंकज, खीमचंद्र, सतीश, हिमांशु, रीता, चंपा देवी, मीना देवी, रोशन सिंह आदि मौजूद रहे। इसके बाद मजदूर भविष्य निधि कार्यालय भी गए और पीएफ के संबंध में ज्ञापन दिया।
डेल्टा के श्रमिकों के तीन माह का वेतन भुगतान करने के संबंध में फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ करीब 23 लाख 98 हजार रुपये की रिकबरी निकाली गई थी लेकिन प्रबंधन ने भुगतान नहीं किया। अब दिल्ली के पते पर रिकबरी भेजी गई है। बुधवार को श्रमिकों से वार्ता में फैक्ट्री स्वामी उपस्थित नहीं हुए इस कारण समस्या का हल नहीं हो सका। अब इस मामले को लेबर कोर्ट को संदर्भित किया जा रहा है।
- एनसी कुलाश्री, उपश्रमायुक्त कुमाऊं