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दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाला : पूर्व समाज कल्याण अधिकारी शंखधर को नहीं मिली जमानत
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नैनीताल। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम/जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत में मंगलवार को दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले के आरोप में गिरफ्तार पूर्व समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई मगर उन्हें जमानत नहीं मिली।
शंखधार को पिछले दिनों काशीपुर पुलिस ने देहरादून से गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया था, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। सोमवार को बचाव पक्ष की ओर से न्यायालय में अनुराग शंखधर की जमानत याचिका पेश की गई थी जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने जमानत का विरोध करते हुए तर्क दिया कि अनुराग शंखधर ने यूपी के एक इंस्टीट्यूट में 235 छात्रों का फर्जी प्रवेश दिखाकर 1,18,12,750 रुपये के चेक उक्त संस्था को जारी किए, जबकि उक्त छात्रवृत्ति धनराशि उत्तराखंड में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए थी। उत्तर प्रदेश के अंतर्गत विद्यालयों के लिए यह राशि आवंटित नहीं की जा सकती थी। शर्मा ने कहा कि आरोपी के विरुद्ध उक्त धाराओं से संबंधित अन्य मामले पंजीकृत हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने जमानत खारिज कर दी।
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शंखधार को पिछले दिनों काशीपुर पुलिस ने देहरादून से गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया था, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। सोमवार को बचाव पक्ष की ओर से न्यायालय में अनुराग शंखधर की जमानत याचिका पेश की गई थी जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई।
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जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने जमानत का विरोध करते हुए तर्क दिया कि अनुराग शंखधर ने यूपी के एक इंस्टीट्यूट में 235 छात्रों का फर्जी प्रवेश दिखाकर 1,18,12,750 रुपये के चेक उक्त संस्था को जारी किए, जबकि उक्त छात्रवृत्ति धनराशि उत्तराखंड में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए थी। उत्तर प्रदेश के अंतर्गत विद्यालयों के लिए यह राशि आवंटित नहीं की जा सकती थी। शर्मा ने कहा कि आरोपी के विरुद्ध उक्त धाराओं से संबंधित अन्य मामले पंजीकृत हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने जमानत खारिज कर दी।
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