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भूरा की फरारी में भाटी गैंग तो नहीं!
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Wed, 25 Mar 2015 01:46 AM IST
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बागपत से पुलिस कस्टडी से फरार अमित मलिक उर्फ भूरा की खोजबीन में हल्द्वानी पहुंची दिल्ली पुलिस टीम की जांच पड़ताल में कई गैंगों की आपस में कड़ियां जुड़ती नजर आ रही है। दिल्ली पुलिस नोएडा के भाटी गैंग के एक शार्प शूटर को साथ लेकर हल्द्वानी और नैनीताल पहुंची थी। शूटर दिल्ली में मकोका का आरोपी है। दिल्ली पुलिस भूरा को पकड़ने के लिए जिस लाइन पर पड़ताल कर रही है, उससे स्पष्ट है अमित उर्फ भूरा की फरारी में भाटी गैंग ने साथ दिया। इसके बाद ही भाटी गैंग के शूटरों के साथ भूरा हल्द्वानी आकर ठहरा था।
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दिल्ली पुलिस की टीम ने सोमवार को हल्द्वानी में बाजार स्थित एक होटल के कागज जांचे। पुलिस अपने साथ मकोका में सूचीबद्ध एक अपराधी को साथ लेकर आई थी। इसी अपराधी के साथ भूरा के हल्द्वानी के इस होटल में ठहरने की खबर थी। दिल्ली पुलिस के छापे से नैनीताल जिले की पुलिस और खुफिया तंत्र में खलबली मच गई। एसएसपी सेंथिल अबुदई के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने हल्द्वानी आने की सूचना दी थी। दिल्ली पुलिस ने बताया था कि वे मकोका के एक मुल्जिम के साथ हल्द्वानी और नैनीताल में कुछ स्थानों पर जांच करना चाहते हैं। इसी कारण स्थानीय पुलिस ने हस्तक्षेप नहीं किया। दिल्ली पुलिस हल्द्वानी के होटल में जांच के बाद मंगलवार को नैनीताल पहुंची। वहां भी कई जगहों पर जांच पड़ताल की।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक मकोका का आरोपी नोएडा के भाटी गैंग से जुड़ा है। इस पर एनसीआर में तीन हत्या समेत रंगदारी के कई मुकदमे दर्ज हैं। वहीं, भूरा उत्तराखंड की जेल में बंद राठी के गैंग का शूटर है। दिल्ली पुलिस के भूरा की तलाश में मकोका के आरोपी को लेकर हल्द्वानी पहुंचने से कई गैंगों की कड़ियों को जोड़कर देखा जा रहा है। बागपत के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी विद्या सागर मिश्रा ने संपर्क करने पर बताया कि सांठगांठ की इस बात को नकारा नहीं किया जा सकता है कि भूरा की फरारी में भाटी गैंग का भी हाथ हो सकता है। पुलिस का दबाव पड़ने पर सभी गैंग के अपराधी एक हो जाते हैं और एक दूसरे की मदद करते हैं।
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स्थानीय पुलिस ने की होटल प्रबंधन से पूछताछ
दिल्ली पुलिस की पूछताछ के बाद मंगलवार सुबह मंगल पड़ाव चौकी प्रभारी ललित मोहन जोशी भी होटल प्रबंधन से पूछताछ करने पहुंचे। चौकी प्रभारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस 15 सितंबर को होटल में ठहरने वालों के कागजात लेकर गई है। मुल्जिम या घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। दिल्ली पुलिस की जांच के बाद एलआईयू और दूसरी खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं।
क्या है मकोका
मुंबई में माफिया डान दाऊद इब्राहिम कासकर गैंग का प्रभाव बढ़ने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने आपराधिक गैंग को काबू में करने के लिए 1999 में मकोका एक्ट (महाराष्ट्र कंट्रोल आफ आर्गनाइज्ड क्राइम) लगाया था। मकोका को दिल्ली पुलिस ने भी अपने यहां आपराधिक गैंग या आतंकियों को नियंत्रित करने के लिए लागू किया है। देश के बड़े से बड़े व्यक्ति को जेल में अधिक दिनों तक रखने के लिए दोनों राज्यों में यह एक्ट लागू है।