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प्रदेश के 1216 राजस्व क्षेत्रों में पुलिस कार्य ठप

Haldwani Bureau Updated Sat, 14 Jul 2018 02:05 AM IST
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हल्द्वानी। प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में अंग्रेजों के जमाने से पुलिस कार्य कर रहे पटवारियों ने शुक्रवार से पुलिस कार्य करना बंद कर दिया है। इससे प्रदेश के 1216 राजस्व क्षेत्रों में कानून व्यवस्था प्रभावित होने के आसार बन रहे हैं। इनमें कुमाऊं के 580 और 636 राजस्व क्षेत्र शामिल हैं। पटवारियों के इस निर्णय के बावजूद सरकार ने राजस्व क्षेत्रों में पुलिस कार्यों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है।
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12 जनवरी 2018 को नैनीताल हाईकोर्ट में जस्टिस राजीव शर्मा और आलोक सिंह की खंडपीठ ने टिहरी जिले में हुई दहेज हत्या के मामले की सुनवाई करते हुए राजस्व पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए सरकार को छह माह के भीतर इस व्यवस्था को खत्म करने के निर्देश दिए थे। बृहस्पतिवार को छह माह का वक्त पूरा हुआ तो शुक्रवार से पर्वतीय राजस्व निरीक्षक, राजस्व उपनिरीक्षक एवं राजस्व सेवक संघ ने प्रदेश भर में पुलिस कार्यों को करना बंद कर दिया। इससे प्रदेश के 1216 राजस्व क्षेत्रों में पुलिसिंग कार्य ठप हो गया है। कुमाऊं और गढ़वाल के इन राजस्व क्षेत्रों में लगभग दस हजार से अधिक गांव शामिल हैं। पटवारी अब केवल राजस्व और भू अभिलेख संबंधी कार्य ही करेंगे।


कुमाऊं में 580 और गढ़वाल में 636 पटवारी कर रहे हैं पुलिस कार्य
शुक्रवार को तहसीलों में पुलिस अभिलेख जमा कराने का दावा
हाईकोर्ट ने छह माह में पटवारी पुलिस व्यवस्था समाप्त करने को कहा था

157 साल पुरानी है पटवारी व्यवस्था
हल्द्वानी। उत्तराखंड में पटवारी व्यवस्था वर्ष 1861 से चल रही है। तत्कालीन ब्रिटिश कमिश्नर ने पटवारियों के अलग अलग पद सृजित करते हुए इन्हें पुलिस, राजस्व संग्रह और भू अभिलेख संबंधी कार्य सौंपे। वर्ष 1874 में पट संशोधन हुआ। पटवारियों को मुकदमा दर्ज करने, मामले की विवेचना करने और गिरफ्तारी तक का अधिकार दिया गया। ब्रिटिश सरकार ने समस्त क्षेत्र को अलग-अलग पट्टियों में बांटा और एक पट्टी में एक पटवारी तैनात किया।


संगठन 24 मई से ही राजस्व परिषद से पुलिस कार्यों के संबंध में पत्राचार करता रहा है। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पटवारी पुलिस कार्य करेंगे तो यह न्यायालय के आदेश की अवमानना होगी। सभी जिलाध्यक्षों को राजस्व क्षेत्रों से संबंधित पुलिस कार्यों से संबंधित अभिलेख (पुलिस बस्ता) अपनी-अपनी तहसीलों में जमा करने को कहा जा चुका है।
-विजय पाल सिंह मेहता, प्रांतीय अध्यक्ष पर्वतीय राजस्व निरीक्षक, राजस्व उपनिरीक्षक एवं राजस्व सेवक संघ उत्तराखंड।

पटवारियों द्वारा पुलिस कार्य न करने के संबंध में शासन से कोई दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। पटवारियों के संगठन ने भी इस संबंध में कोई पत्राचार नहीं किया है। यदि शासन से कोई निर्देश मिलेंगे तो उस पर अमल किया जाएगा।
-पूरन सिंह रावत पुलिस महानिरीक्षक (कुमाऊं)।

नैनीताल में भी नहीं हुआ काम
नैनीताल। हाईकोर्ट के आदेशों के क्रम में शुक्रवार को राजस्व पुलिस कर्मियों ने कार्य नहीं किया। सुबह से लेकर रात तक इंतजार होता रहा, लेकिन कोई शासनादेश नहीं आया। डीएम विनोद कुमार सुमन भी शासन के आदेश का इंतजार करते रहे। पर्वतीय राजस्व निरीक्षक, उपनिरीक्षक एवं राजस्व सेवक संघ के मंडलीय कोषाध्यक्ष भुवन चंद्र जोशी ने बताया कि शासन से कोई आदेश नहीं आया है। हाईकोर्ट के आदेश के पालन के क्रम में राजस्व पुलिस कर्मियों ने काम बंद कर दिया है। ऐसे में कई बड़े मामलों की विवेचनाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा में डीएम ने पुलिस विभाग को थानों में रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस समय घटना होने पर राजस्व पुलिस चौकी में रिपोर्ट दर्ज नहीं करेगी।

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