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हाथी की मौत की ाबर
Updated Fri, 16 Jun 2017 01:32 AM IST
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हाथियों की मौत की सूचना मिलने में आखिर देरी क्यों
हल्द्वानी। जंगल में हाथियों की मौत की जानकारी वन महकमे को तीन से चार दिन बाद मिल पा रही हैं। वन अधिकारियों को समय से सूचना न मिलना जंगल में होने वाली गश्त में लापरवाही की ओर इशारा कर रही है। वन विभाग का दावा है कि जंगल के चप्पे-चप्पे पर निगहबानी होती है। दिन-रात गार्ड से रेंजर तक भारी भरकम वन फोर्स वन, वन्य जीवों की सुरक्षा में मुस्तैद रहती है। बावजूद इसके वन विभाग को हाथियों की मौत की सूचना समय से नहीं मिल पा रही है। तराई केंद्रीय वन प्रभाग में मारे गए हाथियों की मौत के मामले में तो यही बात सामने आई है। बृहस्पतिवार को पीपल पड़ाव रेंज में हाथी के बच्चे का शव मिला जो पांच से छह दिन पुराना था। इसी तरह सैनिक फार्म में खेत की सुरक्षा के लिए लगाए तारबाड़ के करंट से हुए हाथी की मौत की सूचना भी एक-दो दिन बाद मिली और शव तीन बाद मिला था। आखिर क्या वजह है कि वन्य जीवों की मौत की सूचनाएं मिलने में इतनी देरी हो रही है। जंगलों की गश्त में लापरवाही बरती जा रही है, वन अधिकारियों का जंगल में मुखबिर तंत्र कमजोर हो गया है। हैरत तो यह है कि इसको लेकर वन अधिकारी भी रुचि नहीं ले रहे हैं। दुर्गम जंगल होने का बहाना बनाकर लापरवाही से पल्ला झाड़ लिया जाता है।
वन विभाग को वन्यजीवों की मौत की सूचना मिलने में लग रहे तीन, चार दिन
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हल्द्वानी। जंगल में हाथियों की मौत की जानकारी वन महकमे को तीन से चार दिन बाद मिल पा रही हैं। वन अधिकारियों को समय से सूचना न मिलना जंगल में होने वाली गश्त में लापरवाही की ओर इशारा कर रही है। वन विभाग का दावा है कि जंगल के चप्पे-चप्पे पर निगहबानी होती है। दिन-रात गार्ड से रेंजर तक भारी भरकम वन फोर्स वन, वन्य जीवों की सुरक्षा में मुस्तैद रहती है। बावजूद इसके वन विभाग को हाथियों की मौत की सूचना समय से नहीं मिल पा रही है। तराई केंद्रीय वन प्रभाग में मारे गए हाथियों की मौत के मामले में तो यही बात सामने आई है। बृहस्पतिवार को पीपल पड़ाव रेंज में हाथी के बच्चे का शव मिला जो पांच से छह दिन पुराना था। इसी तरह सैनिक फार्म में खेत की सुरक्षा के लिए लगाए तारबाड़ के करंट से हुए हाथी की मौत की सूचना भी एक-दो दिन बाद मिली और शव तीन बाद मिला था। आखिर क्या वजह है कि वन्य जीवों की मौत की सूचनाएं मिलने में इतनी देरी हो रही है। जंगलों की गश्त में लापरवाही बरती जा रही है, वन अधिकारियों का जंगल में मुखबिर तंत्र कमजोर हो गया है। हैरत तो यह है कि इसको लेकर वन अधिकारी भी रुचि नहीं ले रहे हैं। दुर्गम जंगल होने का बहाना बनाकर लापरवाही से पल्ला झाड़ लिया जाता है।
वन विभाग को वन्यजीवों की मौत की सूचना मिलने में लग रहे तीन, चार दिन