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बच्चों को मानव तस्करी कर लाए और चोरी में लगा दिया
Updated Fri, 06 Jul 2018 02:05 AM IST
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नैनीताल। मानव तस्करी कर बच्चों को चोरी की वारदातों में धकेल देने का खुलासा हुआ है। पुलिस ने चार लोगों को पकड़ा तो पता चला कि झारखंड और पश्चिम बंगाल के बच्चों को यहां लाकर ट्रेनिंग दी जाती है फिर उनसे चोरी, उचक्कागिरी और झपट्टागिरी करवाई जाती है।
एसएसपी जन्मेजय खंडूरी ने बृहस्पतिवार को पत्रकारों को बताया कि चार बच्चों के साथ तस्करों को हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के पास गिरफ्तार किया गया। सभी बच्चे नौ से दस वर्ष के बीच के हैं। चारों का भविष्य बनाने का सपना दिखाकर माता-पिता की मर्जी से लाया गया था। बच्चों के माता-पिता को गिरोह के सरगना ने सौ-सौ रुपये प्रतिदिन देने का वादा किया था। चारों तस्कर बच्चों के साथ काठगोदाम में 1800 प्रतिमाह किराए के कमरे में रह रहे थे।
एसएसपी के अनुसार ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल के प्रभारी एनएन पंत टीम के साथ तीन महीने से इस अभियान में लगे थे। बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन की देखरेख में रखा जाएगा जबकि आरोपियों को कोर्ट में पेशी के बाद जेल भेजा जाएगा। एसएसपी ने प्रकरण का खुलासा करने वाली टीम के मनोहर सिंह, निर्मल लटवाल, प्रदीप जोशी, घनश्याम सिंह रौतेला, बंशीधर जोशी, हरजीत सिंह, धीरज सिंह, अनीता फुलैरिया को 25000 रुपए इनाम देने की घोषणा की है।
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एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग टीम और हल्द्वानी कोतवाली पुलिस ने पकड़े चार तस्कर
100 रुपये दिहाड़ी में झारखंड और पश्चिम बंगाल से लाया गया था चार बच्चों को
ये पकड़े गए
-विष्णु कुमार नौनिया पुत्र अनिल नौनिया निवासी ग्राम महराजपुर थाना तलझारी जिला साहबबगंज, झारखंड
-सुभाष नौनिया पुत्र अर्जुन नौनिया निवासी नौनिया बस्ती चोनाकुडी आसनसोल थाना कुट्टी जिला वर्धमान, पश्चिम बंगाल
-मोहम्मद इरशार अंसारी पुत्र मोहम्मद नौसाद अंसारी निवासी ग्राम महराजपुर पुराना भट्ट थाना तलझारी जिला साहबगंज झारखंड
- मोहम्मद आकाश अंसारी पुत्र मोहम्मद मुर्शीद अंसारी निवासी ग्राम बड़ा मदनशाही थाना रिबाबाड़ी, झारखंड
पकड़े जाने पर छूट जाते थे बच्चे
चारों तस्कर बच्चों को आगे कर वारदात कर रहे थे। बच्चों की भोली सूरत देखकर कोई शक नहीं करता था। पकड़े भी जाते तो पुलिस जेल भेजने के बजाय काउंसिलिंग करवाकर छोड़ देती। चारों ने बताया कि कई बार बच्चों को पुलिस और पब्लिक ने चोरी करते पकड़ लिया था लेकिन बाद में छोड़ दिया गया।
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात में भी की हैं वारदातें
चारों ने बताया कि उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों के साथ ही उन्होंने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात में भी वारदातें की हैं। पुलिस के अनुसार गिरोह में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। एसपी सिटी हल्द्वानी अमित श्रीवास्तव ने बताया कि प्रकरण की गहनता से जांच की जा रही है।
गिरोह मुख्य रूप से मोबाइल चोरी करता था। चोरी के मोबाइल यह लोग झारखंड ले जाकर बेच देते थे। तस्कर बच्चों को चोरी के काम में लगाकर खुद आराम फरमाते थे।
- एनएन पंत प्रभारी एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल
बच्चों को मुर्गा खिलाकर पढ़ाते थे अपराध का ककहरा
हल्द्वानी। जिन बच्चों के हाथों में कापी और कलम होनी चाहिए उन्हें अपराध के दलदल में धकेलने के लिए चार युवक क्राइम कंपनी तैयार कर रहे थे। आठ से दस साल के बच्चों ने बताया कि ट्रेन में पाकेट मारने के लिए चारों लोग उनको मुर्गा खिलाकर खुश रखते थे। रोज सुबह वे ट्रेनों के साथ दौड़ लगाकर प्रेक्टिस कराते थे।
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल के प्रभारी एनएन पंत ने बताया कि गिरोह का सरगना विष्णु कुमार हल्द्वानी के बारे में भलीभांति जानता है। उसने ही काठगोदाम में किराए पर कमरा लिया था। बच्चों को यह भी बताया जाता कि पॉकेट मारने के बाद कैसे भागकर बचना है। पाकेट मारने के बाद सामान साथ चल रहे गिरोह के बड़े लोगों को सौंप देना है ताकि किसी की नजर उन पर पड़ न सके। पकड़े जाने पर गिरोह के लोग बच्चों के साथ खड़े हो जाते थे। माफी मांगने और दो तीन थप्पड़ जड़ने के बाद बच्चों को छुड़ा लेते थे। बस अड्डे और भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर पाकेट मारने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती थी। तीन माह पहले दो बच्चे काशीपुर में पकड़े गए थे। उस समय गिरोह के लोग उन्हें छुड़ा लाए थे। गिरोह का सरगना कई प्रांतों में बच्चों को तैयार कर रहा है।
मकान मालिक ने कराया था सत्यापन
हल्द्वानी। काठगोदाम थानाध्यक्ष कमाल हसन ने बताया कि मकान मालिक से पूछताछ की गई। उसने बताया कि किराए पर कमरा देने के बाद डेढ़ माह पहले उसने पुलिस सत्यापन कराया था। उसके पास चारों युवकों के मोबाइल नंबर और पते मौजूद हैं। इस मामले में कोतवाली हल्द्वानी ने धारा 370 (1), (5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। कोतवाली एसएसआई एमएस दसौनी मुकदमे की विवेचना कर रहे हैं।
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एसएसपी जन्मेजय खंडूरी ने बृहस्पतिवार को पत्रकारों को बताया कि चार बच्चों के साथ तस्करों को हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के पास गिरफ्तार किया गया। सभी बच्चे नौ से दस वर्ष के बीच के हैं। चारों का भविष्य बनाने का सपना दिखाकर माता-पिता की मर्जी से लाया गया था। बच्चों के माता-पिता को गिरोह के सरगना ने सौ-सौ रुपये प्रतिदिन देने का वादा किया था। चारों तस्कर बच्चों के साथ काठगोदाम में 1800 प्रतिमाह किराए के कमरे में रह रहे थे।
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एसएसपी के अनुसार ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल के प्रभारी एनएन पंत टीम के साथ तीन महीने से इस अभियान में लगे थे। बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन की देखरेख में रखा जाएगा जबकि आरोपियों को कोर्ट में पेशी के बाद जेल भेजा जाएगा। एसएसपी ने प्रकरण का खुलासा करने वाली टीम के मनोहर सिंह, निर्मल लटवाल, प्रदीप जोशी, घनश्याम सिंह रौतेला, बंशीधर जोशी, हरजीत सिंह, धीरज सिंह, अनीता फुलैरिया को 25000 रुपए इनाम देने की घोषणा की है।
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एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग टीम और हल्द्वानी कोतवाली पुलिस ने पकड़े चार तस्कर
100 रुपये दिहाड़ी में झारखंड और पश्चिम बंगाल से लाया गया था चार बच्चों को
ये पकड़े गए
-विष्णु कुमार नौनिया पुत्र अनिल नौनिया निवासी ग्राम महराजपुर थाना तलझारी जिला साहबबगंज, झारखंड
-सुभाष नौनिया पुत्र अर्जुन नौनिया निवासी नौनिया बस्ती चोनाकुडी आसनसोल थाना कुट्टी जिला वर्धमान, पश्चिम बंगाल
-मोहम्मद इरशार अंसारी पुत्र मोहम्मद नौसाद अंसारी निवासी ग्राम महराजपुर पुराना भट्ट थाना तलझारी जिला साहबगंज झारखंड
- मोहम्मद आकाश अंसारी पुत्र मोहम्मद मुर्शीद अंसारी निवासी ग्राम बड़ा मदनशाही थाना रिबाबाड़ी, झारखंड
पकड़े जाने पर छूट जाते थे बच्चे
चारों तस्कर बच्चों को आगे कर वारदात कर रहे थे। बच्चों की भोली सूरत देखकर कोई शक नहीं करता था। पकड़े भी जाते तो पुलिस जेल भेजने के बजाय काउंसिलिंग करवाकर छोड़ देती। चारों ने बताया कि कई बार बच्चों को पुलिस और पब्लिक ने चोरी करते पकड़ लिया था लेकिन बाद में छोड़ दिया गया।
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात में भी की हैं वारदातें
चारों ने बताया कि उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों के साथ ही उन्होंने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात में भी वारदातें की हैं। पुलिस के अनुसार गिरोह में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। एसपी सिटी हल्द्वानी अमित श्रीवास्तव ने बताया कि प्रकरण की गहनता से जांच की जा रही है।
गिरोह मुख्य रूप से मोबाइल चोरी करता था। चोरी के मोबाइल यह लोग झारखंड ले जाकर बेच देते थे। तस्कर बच्चों को चोरी के काम में लगाकर खुद आराम फरमाते थे।
- एनएन पंत प्रभारी एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल
बच्चों को मुर्गा खिलाकर पढ़ाते थे अपराध का ककहरा
हल्द्वानी। जिन बच्चों के हाथों में कापी और कलम होनी चाहिए उन्हें अपराध के दलदल में धकेलने के लिए चार युवक क्राइम कंपनी तैयार कर रहे थे। आठ से दस साल के बच्चों ने बताया कि ट्रेन में पाकेट मारने के लिए चारों लोग उनको मुर्गा खिलाकर खुश रखते थे। रोज सुबह वे ट्रेनों के साथ दौड़ लगाकर प्रेक्टिस कराते थे।
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल के प्रभारी एनएन पंत ने बताया कि गिरोह का सरगना विष्णु कुमार हल्द्वानी के बारे में भलीभांति जानता है। उसने ही काठगोदाम में किराए पर कमरा लिया था। बच्चों को यह भी बताया जाता कि पॉकेट मारने के बाद कैसे भागकर बचना है। पाकेट मारने के बाद सामान साथ चल रहे गिरोह के बड़े लोगों को सौंप देना है ताकि किसी की नजर उन पर पड़ न सके। पकड़े जाने पर गिरोह के लोग बच्चों के साथ खड़े हो जाते थे। माफी मांगने और दो तीन थप्पड़ जड़ने के बाद बच्चों को छुड़ा लेते थे। बस अड्डे और भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर पाकेट मारने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती थी। तीन माह पहले दो बच्चे काशीपुर में पकड़े गए थे। उस समय गिरोह के लोग उन्हें छुड़ा लाए थे। गिरोह का सरगना कई प्रांतों में बच्चों को तैयार कर रहा है।
मकान मालिक ने कराया था सत्यापन
हल्द्वानी। काठगोदाम थानाध्यक्ष कमाल हसन ने बताया कि मकान मालिक से पूछताछ की गई। उसने बताया कि किराए पर कमरा देने के बाद डेढ़ माह पहले उसने पुलिस सत्यापन कराया था। उसके पास चारों युवकों के मोबाइल नंबर और पते मौजूद हैं। इस मामले में कोतवाली हल्द्वानी ने धारा 370 (1), (5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। कोतवाली एसएसआई एमएस दसौनी मुकदमे की विवेचना कर रहे हैं।