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छह हजार प्रवासी युवाओं की नौकरी पर कोरोना की मार, गांवों में वापस लौटे लोगों के सामने रोजगार का बड़ा संकट
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प्रतीकात्मक फोटो।
नैनीताल। लॉकडाउन से चलते देश के विभिन्न महानगरों से कामधंधा छोड़ घर पहुंचे युवा अब भविष्य को लेकर भारी असमंजस में हैं। अब उनके सामने सबसे बड़ा सवाल रोजगार का है। वह नए रोजगार के साथ परिवार चलाने को लेकर काफी चिंतित हैं। जिले में इन युवाओं की संख्या करीब छह हजार है।
कोरोना के प्रकोप के बाद जिलेभर में अपने मूल निवासों में वापस लौटे लोगों से शुक्रवार को अमर उजाला ने बातचीत की। उनसे पूछा गया कि कोरोना संक्रमण की स्थितियों के ठीक होने के बाद क्या वह वापस महानगरों की ओर लौटेंगे या फिर घर में रहकर ही कोई रोजगार करेंगे। इस पर अधिकांश ने कहा कि कोरोना के बाद पैदा हालात ने उनके भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
महानगरों में वापस लौटने और न लौटने को लेकर फिलहाल असमंजस की स्थिति है। कहा कि गांवों में रोजगार का कोई साधन नहीं है। लॉकडाउन के बाद महानगरों में रोजगार मिलने की गारंटी नहीं है। अधिकतर ने घर के आसपास के शहरों में नौकरी करने की बात कही।
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मैं पिछले 18 साल से दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में काम करता था। लॉकडाउन के बाद कंपनी बंद हो गई और मुझे घर वापस लौटना पड़ा। घर में पत्नी और दो बच्चे हैं। घर आने के बाद से बेरोजगार हूं। वापस लौटना और न लौटना कोरोना संक्रमण के साथ-साथ देश की स्थितियों पर निर्भर करता है।
दीप चंद्र जोशी निवासी पहाड़पानी (धारी)।
मैंने इंटरमीडिएट तक शिक्षा प्राप्त की है। रोजगार की तलाश में तीन साल पहले पुणे चला गया और वहां होटल इंडस्ट्री में जॉब शुरू की। महाराष्ट्र में कोराना संक्रमण सबसे अधिक है। ऐसे में अब वहां वापस लौटने का मतलब जान जोखिम में डालना है। अब घर में रहकर ही खेती करूंगा या फिर दूसरी नौकरी तलाश रहेगी।
भास्कर भट्ट, निवासी दिगोली (ओखलकांडा)।
मैं पुणे से आगे कराड़ शहर में एक होटल में काम करता था। लॉकडाउन होने से पहले ही मैं दोस्तों के साथ गांव आ गया। भविष्य में वापस पुणे में लौटने के बारे में फिलहाल सोचा नहीं है। महानगर की ओर वापस लौटने की उम्मीद अब कम ही है। हल्द्वानी में ही कहीं नौकरी तलाश करूंगा।
नवीन गोस्वामी, तल्ला कांडा चंतोली (ओखलकांडा)
मैं 23 मार्च को वापस गांव लौटा हूं। पिछले काफी समय से महाराष्ट्र में एक होटल में काम करता था। अब वापस लौटने पर नौकरी मिलेगी या नहीं कुछ पता नहीं। ऐसे में गांव में रहकर ही कुछ रोजगार करना मेरी प्राथमिकता है।
भास्कर भट्ट निवासी दिगोली ओखलकांडा।
महानगरों में काम करने वाले पहाड़ के अधिकतर युवा रोजगार से जुड़े थे। इसमें होटल उद्योग सबसे अहम है और होटल उद्योग को ही लॉकडाउन के बाद सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। मौजूदा परिस्थितियों में कोई भी व्यक्ति महानगरों में वापस लौटना नहीं चाहेगा।
यदि ऐसा होता है तो इन युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार को ठोस रणनीति तैयार करनी होगी। ऐसे लोगों को कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराकर उन्हें रोजगार से जोड़ना होगा, वरना पहाड़ में बेरोजगारी बढ़ जाएगी। -प्रो. देवेंद्र सिंह बिष्ट वरिष्ठ समाजशास्त्री कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल
01 मार्च 2020 के बाद जिले में विभिन्न प्रांतों से वापस लौटे लोगों की संख्या
ब्लॉक संख्या
भीमताल 443
बेतालघाट 1079
कोटाबाग 923
रामनगर 1165
हल्द्वानी 1215
धारी 230
रामगढ़ 400
ओखलकांडा 480
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कुल योग 5935
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कोरोना के प्रकोप के बाद जिलेभर में अपने मूल निवासों में वापस लौटे लोगों से शुक्रवार को अमर उजाला ने बातचीत की। उनसे पूछा गया कि कोरोना संक्रमण की स्थितियों के ठीक होने के बाद क्या वह वापस महानगरों की ओर लौटेंगे या फिर घर में रहकर ही कोई रोजगार करेंगे। इस पर अधिकांश ने कहा कि कोरोना के बाद पैदा हालात ने उनके भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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महानगरों में वापस लौटने और न लौटने को लेकर फिलहाल असमंजस की स्थिति है। कहा कि गांवों में रोजगार का कोई साधन नहीं है। लॉकडाउन के बाद महानगरों में रोजगार मिलने की गारंटी नहीं है। अधिकतर ने घर के आसपास के शहरों में नौकरी करने की बात कही।
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मैं पिछले 18 साल से दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में काम करता था। लॉकडाउन के बाद कंपनी बंद हो गई और मुझे घर वापस लौटना पड़ा। घर में पत्नी और दो बच्चे हैं। घर आने के बाद से बेरोजगार हूं। वापस लौटना और न लौटना कोरोना संक्रमण के साथ-साथ देश की स्थितियों पर निर्भर करता है।
दीप चंद्र जोशी निवासी पहाड़पानी (धारी)।
मैंने इंटरमीडिएट तक शिक्षा प्राप्त की है। रोजगार की तलाश में तीन साल पहले पुणे चला गया और वहां होटल इंडस्ट्री में जॉब शुरू की। महाराष्ट्र में कोराना संक्रमण सबसे अधिक है। ऐसे में अब वहां वापस लौटने का मतलब जान जोखिम में डालना है। अब घर में रहकर ही खेती करूंगा या फिर दूसरी नौकरी तलाश रहेगी।
भास्कर भट्ट, निवासी दिगोली (ओखलकांडा)।
मैं पुणे से आगे कराड़ शहर में एक होटल में काम करता था। लॉकडाउन होने से पहले ही मैं दोस्तों के साथ गांव आ गया। भविष्य में वापस पुणे में लौटने के बारे में फिलहाल सोचा नहीं है। महानगर की ओर वापस लौटने की उम्मीद अब कम ही है। हल्द्वानी में ही कहीं नौकरी तलाश करूंगा।
नवीन गोस्वामी, तल्ला कांडा चंतोली (ओखलकांडा)
मैं 23 मार्च को वापस गांव लौटा हूं। पिछले काफी समय से महाराष्ट्र में एक होटल में काम करता था। अब वापस लौटने पर नौकरी मिलेगी या नहीं कुछ पता नहीं। ऐसे में गांव में रहकर ही कुछ रोजगार करना मेरी प्राथमिकता है।
भास्कर भट्ट निवासी दिगोली ओखलकांडा।
महानगरों में काम करने वाले पहाड़ के अधिकतर युवा रोजगार से जुड़े थे। इसमें होटल उद्योग सबसे अहम है और होटल उद्योग को ही लॉकडाउन के बाद सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। मौजूदा परिस्थितियों में कोई भी व्यक्ति महानगरों में वापस लौटना नहीं चाहेगा।
यदि ऐसा होता है तो इन युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार को ठोस रणनीति तैयार करनी होगी। ऐसे लोगों को कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराकर उन्हें रोजगार से जोड़ना होगा, वरना पहाड़ में बेरोजगारी बढ़ जाएगी। -प्रो. देवेंद्र सिंह बिष्ट वरिष्ठ समाजशास्त्री कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल
01 मार्च 2020 के बाद जिले में विभिन्न प्रांतों से वापस लौटे लोगों की संख्या
ब्लॉक संख्या
भीमताल 443
बेतालघाट 1079
कोटाबाग 923
रामनगर 1165
हल्द्वानी 1215
धारी 230
रामगढ़ 400
ओखलकांडा 480
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कुल योग 5935