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गरुड़ में कूड़ा निस्तारण के मामले में सीएस, डीएम को अवमानना नोटिस
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने बागेश्वर जिले के गरुड़ कसबे में कूड़ा निस्तारण को लेकर दिए गए आदेश का पालन नहीं करने पर प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार, बागेश्वर की डीएम रंजना राजगुरु और जिला पंचायत बागेश्वर के अपर मुख्य अधिकारी अरुण बर्थवाल को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अधिवक्ता डीके जोशी ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि उनके द्वारा पूर्व में खंडपीठ के समक्ष दाखिल जनहित याचिका पर कोर्ट ने 10 जुलाई 2018 को निर्णय दिया था। उसमें राज्य सरकार को खास तौर पर गरुड़ क्षेत्र के लिए ट्रेंचिंग ग्राउंड के लिए जमीन की अनुमति देने का आदेश दिया था। राज्य सरकार को गरुड़ क्षेत्र में ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए डीपीआर तैयार करने को भी कहा था।
राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया गया था कि वह 25 से 30 गांवों का एक समूह करके उनके लिए कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाएंगे। डीएम बागेश्वर सहित सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया था कि वह कूड़ा निस्तारण नियमावली 2016 के अंतर्गत निहित अपने कर्तव्य का निर्वहन करें। एक वर्ष बीत जाने के बावजूद इस मामले में राज्य सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है। अवमानना याचिका में मुख्य सचिव उत्तराखंड सरकार, जिलाधिकारी बागेश्वर, जिला पंचायत बागेश्वर, संबंधित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, सिल्ली, पाये, नौघर और गड़सेर को भी पक्षकार बनाया गया है।
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न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अधिवक्ता डीके जोशी ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि उनके द्वारा पूर्व में खंडपीठ के समक्ष दाखिल जनहित याचिका पर कोर्ट ने 10 जुलाई 2018 को निर्णय दिया था। उसमें राज्य सरकार को खास तौर पर गरुड़ क्षेत्र के लिए ट्रेंचिंग ग्राउंड के लिए जमीन की अनुमति देने का आदेश दिया था। राज्य सरकार को गरुड़ क्षेत्र में ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए डीपीआर तैयार करने को भी कहा था।
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राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया गया था कि वह 25 से 30 गांवों का एक समूह करके उनके लिए कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाएंगे। डीएम बागेश्वर सहित सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया था कि वह कूड़ा निस्तारण नियमावली 2016 के अंतर्गत निहित अपने कर्तव्य का निर्वहन करें। एक वर्ष बीत जाने के बावजूद इस मामले में राज्य सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है। अवमानना याचिका में मुख्य सचिव उत्तराखंड सरकार, जिलाधिकारी बागेश्वर, जिला पंचायत बागेश्वर, संबंधित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, सिल्ली, पाये, नौघर और गड़सेर को भी पक्षकार बनाया गया है।
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