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खिचड़ी भोज से पहले सड़क पर फैला कांग्रेसी रायता
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हल्द्वानी स्वराज आश्रम में कांग्रेस द्वारा आयोजित खिचड़ी भोज।
हल्द्वानी। खिचड़ी भोज के माध्यम से सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश देने और अपनों को मनाने की कांग्रेस नेताओं की मंशा धरी रह गई। खिचड़ी भोज से पहले सड़क पर कांग्रेसी रायता फैल गया। सड़क पर ही प्रदेश प्रभारी और नेता प्रतिपक्ष का घेराव कर दो सचिवों ने अपने समर्थकों के साथ इस्तीफा सौंप दिया।
नई प्रदेश कांग्रेस कमेटी बनने के बाद से ही पार्टी में बगावत के सुर सुनाई दे रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष निशाने पर हैं। मंगलवार को पार्टी के भीतर चल रहा घमासान सड़क पर आ गया। प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह और नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश स्वराज आश्रम में आयोजित खिचड़ी भोज में भाग लेने जा रहे थे। मटर गली से पहले ही प्रदेश सचिव बने संजय किरौला, दीप सती ने अपने साथी पूर्व ब्लाक प्रमुख भोला दत्त भट्ट और हर्षवर्धन पांडे के साथ प्रदेश प्रभारी को रोक लिया।
कहा कि पार्टी में निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई है। 2022 में अगर पार्टी सत्ता में आना चाहती है तो कांग्रेस से जुड़े लोगों को तरजीह दी जानी चाहिए। कहा पार्टी के खिलाफ ही चुनाव लड़ने वालों को पदों से नवाजा गया है। किरौला और सती ने अपने इस्तीफे की प्रति प्रदेश प्रभारी को सौंप दी। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष और किरौला के बीच तीखी नोकझोंक हुई। किरौला ने कहा कि बागियों को सम्मानित करना किसी भी हाल में ठीक नहीं है। पार्टी के भीतर गुटबाजी चरम पर है और यह पार्टी हित में नहीं है।
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धामी का नाम विशेष आमंत्रित में लिखा था, एआईसीसी में बदला
नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने कहा कि धारचूला विधायक हरीश धामी की नाराजगी इस बात पर है कि उनका नाम आखिरी में आया है। धामी का नाम विशेष आमंत्रित सदस्यों में लिखा गया था। उनका नाम एआईसीसी में बदला गया है।
डॉ. हृदयेश ने कहा कि चुनाव की दृष्टि से जिनकी उपयोगिता होगी उनको रखा जाएगा और सम्मान भी दिया जाएगा। प्रदेश कार्यकारिणी में बैकवर्ड, अल्पसंख्यक, बंगाली, अनुसूचित जाति समेत सभी को स्थान दिया गया। सुमित हृदयेश ने प्रदेश कार्यकारिणी से अपना नाम स्वयं हटवाया। कहीं कोई चूक हुई है तो उसे सुधार लिया जाएगा।
डैमेज कंट्रोल एक सप्ताह में हो जाएगा। प्रभारी से चौराहे पर बात करना और इस्तीफा देना कोई समाधान नहीं है। अपनी बात पार्टी फोरम में कहनी चाहिए। अगर सबने तय कर लिया है कि कांग्रेस को हराना है तो फिर सभी स्वतंत्र हैं। कहा कि जिन विरोधियों की बात हो रही है उनको पार्टी में राहुल गांधी के कहने पर रखा गया है। उस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी मौजूद थे। जनता से जुड़े लोगों को धक्का नहीं दिया जा सकता। जो पार्षद का चुनाव नहीं जीत सकते वेे विरोध कर रहे हैं। डॉ. हृदयेश ने कहा कि वह 39 वर्ष विधायक रह चुकी हैं और मेरा कुछ बिगड़ने वाला नहीं है। ऊपर भी बात हो चुकी है।
काम करने वालों का स्वागत
कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह ने कहा कि कार्यकारिणी बहुत बड़ी थी। एआईसीसी ने इसे कम करने के निर्देश दिए थे। उसी के अनुसार कार्यकारिणी गठित की गई है। जो लोग काम करना चाहते हैं उनका स्वागत है और जो काम नहीं करना चाहता है उनके लिए कोई बात नहीं है। चूक किस स्तर पर हुई है इसकी जांच करने की जरूरत है। एआईसीसी के स्तर से किन लोगों ने नाम जुड़वाया है उसको देखना है। धामी हमारे मजबूत साथी हैं।
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नई प्रदेश कांग्रेस कमेटी बनने के बाद से ही पार्टी में बगावत के सुर सुनाई दे रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष निशाने पर हैं। मंगलवार को पार्टी के भीतर चल रहा घमासान सड़क पर आ गया। प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह और नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश स्वराज आश्रम में आयोजित खिचड़ी भोज में भाग लेने जा रहे थे। मटर गली से पहले ही प्रदेश सचिव बने संजय किरौला, दीप सती ने अपने साथी पूर्व ब्लाक प्रमुख भोला दत्त भट्ट और हर्षवर्धन पांडे के साथ प्रदेश प्रभारी को रोक लिया।
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कहा कि पार्टी में निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई है। 2022 में अगर पार्टी सत्ता में आना चाहती है तो कांग्रेस से जुड़े लोगों को तरजीह दी जानी चाहिए। कहा पार्टी के खिलाफ ही चुनाव लड़ने वालों को पदों से नवाजा गया है। किरौला और सती ने अपने इस्तीफे की प्रति प्रदेश प्रभारी को सौंप दी। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष और किरौला के बीच तीखी नोकझोंक हुई। किरौला ने कहा कि बागियों को सम्मानित करना किसी भी हाल में ठीक नहीं है। पार्टी के भीतर गुटबाजी चरम पर है और यह पार्टी हित में नहीं है।
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धामी का नाम विशेष आमंत्रित में लिखा था, एआईसीसी में बदला
नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने कहा कि धारचूला विधायक हरीश धामी की नाराजगी इस बात पर है कि उनका नाम आखिरी में आया है। धामी का नाम विशेष आमंत्रित सदस्यों में लिखा गया था। उनका नाम एआईसीसी में बदला गया है।
डॉ. हृदयेश ने कहा कि चुनाव की दृष्टि से जिनकी उपयोगिता होगी उनको रखा जाएगा और सम्मान भी दिया जाएगा। प्रदेश कार्यकारिणी में बैकवर्ड, अल्पसंख्यक, बंगाली, अनुसूचित जाति समेत सभी को स्थान दिया गया। सुमित हृदयेश ने प्रदेश कार्यकारिणी से अपना नाम स्वयं हटवाया। कहीं कोई चूक हुई है तो उसे सुधार लिया जाएगा।
डैमेज कंट्रोल एक सप्ताह में हो जाएगा। प्रभारी से चौराहे पर बात करना और इस्तीफा देना कोई समाधान नहीं है। अपनी बात पार्टी फोरम में कहनी चाहिए। अगर सबने तय कर लिया है कि कांग्रेस को हराना है तो फिर सभी स्वतंत्र हैं। कहा कि जिन विरोधियों की बात हो रही है उनको पार्टी में राहुल गांधी के कहने पर रखा गया है। उस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी मौजूद थे। जनता से जुड़े लोगों को धक्का नहीं दिया जा सकता। जो पार्षद का चुनाव नहीं जीत सकते वेे विरोध कर रहे हैं। डॉ. हृदयेश ने कहा कि वह 39 वर्ष विधायक रह चुकी हैं और मेरा कुछ बिगड़ने वाला नहीं है। ऊपर भी बात हो चुकी है।
काम करने वालों का स्वागत
कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह ने कहा कि कार्यकारिणी बहुत बड़ी थी। एआईसीसी ने इसे कम करने के निर्देश दिए थे। उसी के अनुसार कार्यकारिणी गठित की गई है। जो लोग काम करना चाहते हैं उनका स्वागत है और जो काम नहीं करना चाहता है उनके लिए कोई बात नहीं है। चूक किस स्तर पर हुई है इसकी जांच करने की जरूरत है। एआईसीसी के स्तर से किन लोगों ने नाम जुड़वाया है उसको देखना है। धामी हमारे मजबूत साथी हैं।