हल्द्वानी। कांग्रेस नेताओं ने सोमवार को स्वराज आश्रम के मीटिंग हाॅल में पत्रकारों से वार्ता कर पंचायत चुनाव के लिए जारी आरक्षण पर सवाल खड़ा किए हैं। कहा कि, सरकार खुद नहीं चाहती कि प्रदेश में पंचायत चुनाव हों। आरक्षण में कई खामियां हैं, ऐसे में कोई भी इसके खिलाफ कोर्ट जा सकता है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष राहुल छिमवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल, पूर्व ब्लाॅक प्रमुख भोला दत्त भट्ट, पंचायत प्रकोष्ठ के सुरेश जोशी, नरेश अग्रवाल और प्रदेश सचिव प्रकाश पांडे ने संयुक्त रूप से पत्रकारों को संबोधित किया। कहा कि वर्ष 2016 में कांग्रेस सरकार ने पंचायत राज एक्ट में त्रिस्तरीय पंचायत आरक्षण प्रक्रिया को रोटेशन प्रणाली से लागू कर प्रत्येक वर्ग के लिए पंचायतों में प्रावधान किया था। उच्चतम न्यायालय के ओबीसी वर्ग को पंचायत में आरक्षण देने के आदेश के बाद वर्मा आयोग की रिपोर्ट लागू हुई। इस रिपोर्ट के अनुसार तो आरक्षण प्रथम चरण के अनुसार होना चाहिए था। अन्य वर्ग के आरक्षण की प्रक्रिया वर्ष 2019 के पंचायत चुनाव के बाद वर्तमान में द्वितीय चरण के रोटेशन के आधार पर होनी चाहिए थी। सरकार ने पूरी आरक्षण प्रक्रिया को ही शून्य कर दिया। कई सीटें पूर्व की भांति ही आरक्षित हुईं। कहा कि पंचायतों में आरक्षण की मूल धारणा के अनुसार हर पांच साल में रोटेशन के जरिये प्रत्येक वर्ग महिला, पुरुष, एससी, ओबीसी, एसटी को प्रतिनिधित्व दिया जाना है जिसका पालन सरकार ने नहीं किया।