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भ्रष्टाचार में कांग्रेस स्नातक, भाजपा को डाक्टरेट
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Tue, 06 Mar 2018 02:03 AM IST
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हल्द्वानी रामलीला ग्राउंड में आयोजित सभा को सम्बोधित करते पदम्श्री अन्ना हजारे।
- फोटो : अमर उजाला
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23 मार्च को दिल्ली चलो अभियान के सिलसिले में सोमवार को हल्द्वानी पहुंचे अन्ना ने कई मुद्दों पर सीधे तो कुछ मुद्दों पर चुटकी लेने वाले अंदाज में बात की। अन्ना में अपने आंदोलन को सियासत से बचाए रखने की कसक दिखाई दी और वे यहां तक कह गए कि अब उन्होंने पुख्ता इंतजाम किया है कि कोई दूसरा केजरीवाल न बन पाए। उन्होंने भ्रष्टाचार के मामले में कांग्रेस को स्नातक तो भाजपा को डाक्टरेट की उपाधि दी।
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अमर उजाला से खास बातचीत में अन्ना ने कहा कि वह दो बार दिल्ली में अनशन पर बैठे हैं और दोनों बार सरकारें चली गईं। इस बार भी ऐसा ही होगा। भाजपा ने चुनाव के वक्त एक नारा दिया था कि न भय न भ्रष्टाचार, अबकी बार मोदी सरकार। मगर यहां तो भ्रष्टाचार और बढ़ गया। लोकपाल में संशोधन ही इसलिए किया गया। भ्रष्टाचार के मामले में कांग्रेस स्नातक तो भाजपा को डाक्टरेट की उपाधि हासिल है।
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अन्ना ने कहा कि वो चाहते हैं कि किसानों को फसल का सही दाम मिले, लोकपाल कानून बने, लोकायुक्त हर राज्य में तैनात हों और इसके लिए लड़ाई लड़ने का वक्त आ गया है। उन्होंने कृषि मूल्य आयोग को संवैधानिक दर्जा देने की मांग की और कहा कि सरकारें फसलों का मूल्य ठीक से नहीं तय करतीं। अन्ना ने कहा कि आंदोलन का सहारा लेकर राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले लोगों से अब मैं सावधान हो गया हूं। कार्यकर्ताओं से सदस्यता ग्रहण करते वक्त 100 रुपये के स्टैंप पेपर में लिखवाऊंगा कि मैं भविष्य में किसी राजनीतिक संगठन से संबंध नहीं रखूंगा... ताकि और केजरीवाल न बन पाएं और यदि कोई ऐसा करता है तो कोर्ट के चक्कर कटवाऊंगा।
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अन्ना ने युवाओं को कामयाबी का सूत्र बताते हुए कहा कि अच्छा काम करने वाले किसी परिचय के मोहताज नहीं होते। तब तक काम करते रहो जब तक वह दूसरों के लिए मिसाल न बन जाए।
अन्ना का मानना है कि चुनाव जीतने के बाद मोदी पहले जैसे नहीं रहे। उन्हें अब आम लोगों से वास्ता नहीं और न ही मोदी उनके लिखे पत्रों का ही जवाब देते हैं। इन तीन वर्षो में प्रधानमंत्री मोदी को तकरीबन 40 पत्र लिखे मगर एक का भी जवाब नहीं आया। एक सवाल के जवाब में अन्ना ने कहा कि हमारे देश में सरकार गिरने से डरती हैं, आंदोलन से नहीं। 23 मार्च का आंदोलन कुछ खास होगा और इस बार सरकार को झुकना ही होगा।