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Haldwani News: धर्मस्थलों की धारण क्षमता के अनुरूप ही श्रद्धालुओं को मिलेगा प्रवेश : सीएम धामी

Tue, 29 Jul 2025 10:11 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी
अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी Published by: हीरा मेहरा Updated Tue, 29 Jul 2025 10:11 AM IST
सार

मनसा देवी मंदिर में हुए हादसे के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं को धारण क्षमता के अनुसार ही प्रवेश देने के निर्देश दिए।

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CM Pushkar Singh Dhami said that devotees will get entry only as per the holding capacity of religious places
सीएम धामी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

विस्तार

मनसा देवी मंदिर में हुए हादसे के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं को धारण क्षमता के अनुसार ही प्रवेश देने के निर्देश दिए। हरिद्वार में हुए हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए अधिकारियों को दिशा निर्देश दे दिए गए हैं। धार्मिक स्थल जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और तीर्थयात्री दर्शन के लिए आते हैं, वहां व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। स्थलों का संभावित विस्तार कराने, पार्किंग एवं ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा मानकों के पालन को प्राथमिकता दी जा रही है।

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सीएम धामी सोमवार को एफटीआई में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनसा देवी मंदिर सहित प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर यह व्यवस्थाएं सख्ती से लागू की जाएंगी। पंचायत चुनाव पर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों के लिए प्रदेशभर की जनता में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला है। गांवों की सरकार चुनने के लिए मतदाताओं ने विशेष जागरूकता दिखाई है। इसके चलते पहले चरण में मतदान प्रतिशत में वृद्धि हुई है। कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के प्रतिनिधियों का पंचायतों के विकास में बड़ा योगदान रहता है।

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यह हैं कुमाऊं में अत्यधिक भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थल

1-कैंची धाम-

नैनीताल जिले के कैंची नामक स्थान पर बाबा नीब करौरी महाराज का आश्रम है। पिछले कुछ साल से यहां बाबा के दर्शन करने आने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यहां रोजाना औसतन 10-12 हजार लोग बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। शनिवार और मंगलवार को यह संख्या बढ़कर 15-18 हजार तक पहुंच जाती है। 15 जून को आश्रम का स्थापना दिवस होता है तब यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या एक से डेढ़ लाख तक रहती है। श्रद्धालुओं की इस संख्या के हिसाब से यहां व्यवस्थाएं ऊंट के मुंह में जीरा है।

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2-जागेश्वर धाम-

अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम 124 मंदिरों का एक समूह है। इसे हिमालय का काशी के रूप में भी जाना जाता है। यहां महाशिवरात्रि और श्रावण मास में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। देश भर के विभिन्न हिस्सों से लेकर श्रावण मास में यहां शिवार्चन कराने पहुंचते हैं। राजनीति के अलावा फिल्म इंडस्ट्री के बड़े चेहरे भी यहां अक्सर दर्शनों के लिए आते हैं।

3-चितई गोलू मंदिर-

अल्मोड़ा जिले के चितई क्षेत्र में स्थित गोलू देवता मंदिर को घंटियों वाले मंदिर के रूप में भी पहचान मिली है। मान्यता है कि जो कोई व्यक्ति श्रद्धाभाव से यहां गोलू देवता से फरियाद करता है। भगवान उसकी फरियाद को पूरा करते हैं। मनोकामना पूरी होने के बाद भक्त यहां घंटी चढ़ाते हैं। इस मंदिर में प्रतिदिन औसतन चार से पांच हजार श्रद्धालु पहुंचते हैं जबकि विशेष अवसरों पर यह संख्या दस हजार से अधिक रहती है।

4-हाट कालिका मंदिर-

गंगोलीहाट के समीप स्थित हाट कालिका मंदिर, देवी कालिका को समर्पित है। यहां श्रद्धालुओं के साथ ही बड़ी संख्या में सैलानी भी पहुंचते हैं। इसे सैनिकों और पूर्व सैनिकों की आस्था वाले मंदिर के रूप में भी पहचान मिली है। नवरात्रि और विशेष पर्वों पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

5- पूर्णागिरी धाम-

चंपावत जिले में टनकपुर के समीप स्थित है पूर्णागिरी धाम। इसे पूर्णागिरि मंदिर भी कहा जाता है। यह एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। चैत्र नवरात्र में यहां मेला लगता है जिसमें प्रति दिन हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

6- गर्जिया मंदिर-

रामनगर के समीप स्थित है गर्जिया माता का मंदिर। यह कोसी नदी में एक टीले पर स्थित है। कार्तिक पूर्णिमा के अलावा गंगा दशहरा, नवरात्र, शिवरात्रि, उत्तरायणी, बसंत पंचमी में भी यहां सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

अवैध निर्माण व अतिक्रमण स्वयं हटा लें, अन्यथा अभियान चल ही रहा है
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकारी जमीनों पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए सरकार पहले ही जिलाधिकारियों को निर्देश दे चुकी है। अधिकारियों से कहा गया है कि वह अतिक्रमणकारियों को अतिक्रमण हटाने के लिए विधिक सूचना देकर नोटिस जारी करें कि वह स्वयं ही अतिक्रमण अथवा अवैध निर्माण हटा लें। अन्यथा अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चल ही रहा है। सीएम ने कहा कि अभी तक सरकार राज्य में सात हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास को प्राथमिकता से आगे बढ़ाना सरकार का लक्ष्य है। कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वर्ष 2023-24 के इंडेक्स में सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में उत्तराखंड पहले स्थान पर आया है। कहा कि विकास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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