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पारिवारिक संस्कार, बालिका शिक्षा के साथ ही सामाजिक सोच में बदलाव जरूरी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 30 Oct 2022 11:00 PM IST
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Change in social thinking is necessary along with family rites, girl child education
अमर उजाला की ओर से रतन काटेज में हुई अपराजिता कार्यक्रम में महिलाओं ने विचार रखे। - फोटो : NAINITAL
नैनीताल। महिलाओं ने कहा कि वर्तमान दौर में लगातार हो रहे सामाजिक बदलाव के साथ ही ल्वावलंबी होने की दिशा में आगे बढ़ रहीं बेटियां असुरक्षित हो रही हैं। लचर कानून और पद प्रतिष्ठा के अनुरूप कानून की परिभाषा बदलने से बालिका सुरक्षा की चुनौती बढ़ रही है। अपराधियों के हौंसले बुलंद हो रहे हैं। पारिवारिक संस्कार, बालिका शिक्षा के साथ ही सामाजिक सोच में बदलाव से ही इस समस्या का स्थायी हल निकाला जा सकता है।
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नगर के रतन कॉटेज क्षेत्र में रविवार को सैणियों के संगठन समेत क्षेत्र की महिलाओं ने अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम में अपने विचार साझा किए। बुजुर्ग महिला जीवंती पवार ने कहा कि बदलते समाज के स्वरूप के साथ ही सामाजिक सोच भी बदलनी चाहिए। खष्टी बिष्ट ने कहा कि कम समय में अधिक रुपये कमाने की होड़ से युवा भटक रहा है। पुष्पा साह और ललिता फर्त्याल ने कहा कि पढ़ाई पूरी करने के बाद बेरोजगार युवक और युवतियां अवसाद में आकर गलत कदम उठा रहे हैं।
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दीपा फर्त्याल ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के दौर में युवक-युवतियों के समक्ष जीवन की चुनौतियां हैं। माध्यमिक शिक्षा के बाद युवाओं की मानसिक क्षमता के अनुरूप उनके भविष्य का चयन होना चाहिए। गीता बिष्ट और जानकी ने कहा कि बच्चों को संस्कारित बनाने की पहली जिम्मेदारी उसके परिवार की है। समाज का माहौल बेहतर बनाने की जरूरत है।
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चंपा उपाध्याय ने कहा कि कमजोर, धनाढ्य और पद प्रतिष्ठा वालों के लिए समान कानून की जरूरत है। हिमानी नगरकोटी और प्रेमा ने बेटियों की ओर से की जाने वाली शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की वकालत की। कहा कि अक्सर बड़े मामले उजागर होने से पुलिस की लचर प्रणाली पर सवालिया निशान लगते हैं। ममता बिष्ट और उषा बिष्ट ने कहा कि युवती से दुराचार, हत्या के मामले में कानून को सर्वोपरि मानकर दोषी को सख्त सजा दी जाए। सार्थक पहल नहीं हुई तो अंकिता सरीखे कई कांडों की पुनरावृत्ति रोकना कठिन होगा।
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