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जीवन के चुनौतीपूर्ण क्षण ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का करते हैं निर्माण : डॉ. मुनगली
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नैनीताल। जीवन में प्रेरणा का मूल स्रोत व्यक्ति के भीतर निहित होता है, किंतु उसे सुदृढ़ करने के लिए अनुशासन, निरंतर अभ्यास और स्पष्ट लक्ष्य अनिवार्य है। जीवन के चुनौतीपूर्ण क्षण ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का वास्तविक निर्माण करते हैं। कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र एवं सेवानिवृत्त कर्नल डॉ. गिरिजा शंकर मुनगली ने यह विचार रखे।
सोमवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में एक विशेष संवादात्मक व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता रहे डॉ. गिरिजा शंकर मुनगली ने कहा कि साहस और धैर्य के बिना कोई भी व्यक्ति दीर्घकालिक सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। कुलपति प्रो. डीएस रावत ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का निर्वहन भी उसका अभिन्न अंग है। यहां प्रो. संजय घिल्डियाल, प्रो. रीतेश साह, प्रो. सावित्री कैड़ा जंतवाल, प्रो. संजय टम्टा, प्रो. एचसीएस बिष्ट, प्रो. आरसी जोशी, प्रो. ज्योति जोशी, प्रो. मनीषा, डॉ. शिवानी रावत, प्रो. हरिप्रिया आदि मौजूद रहीं।
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सोमवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में एक विशेष संवादात्मक व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता रहे डॉ. गिरिजा शंकर मुनगली ने कहा कि साहस और धैर्य के बिना कोई भी व्यक्ति दीर्घकालिक सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। कुलपति प्रो. डीएस रावत ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का निर्वहन भी उसका अभिन्न अंग है। यहां प्रो. संजय घिल्डियाल, प्रो. रीतेश साह, प्रो. सावित्री कैड़ा जंतवाल, प्रो. संजय टम्टा, प्रो. एचसीएस बिष्ट, प्रो. आरसी जोशी, प्रो. ज्योति जोशी, प्रो. मनीषा, डॉ. शिवानी रावत, प्रो. हरिप्रिया आदि मौजूद रहीं।
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