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Nainital: हाईकोर्ट ने कहा- केंद्र का कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग बताए, संजीव चतुर्वेदी का आवदेन कब मिला

Sun, 20 Aug 2023 08:32 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Sun, 20 Aug 2023 08:32 AM IST
सार

संजीव चतुर्वेदी ने जनवरी 2021 में उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें एक अन्य अधिकारी के चयन आदेश को रद्द करने और जालसाजी और मनगढ़ंत आरोपों की सीबीआई जांच की मांग की गई थी। इस याचिका को मार्च 2023 में हाईकोर्ट ने कैट की सर्किट बेंच को भेज दिया था। 

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Nainital Court said Tell Personnel Training Department of Center when did Sanjeev Chaturvedi application get
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र के कर्मचारी चयन आयोग में सदस्य के पद पर चयन में जालसाजी और फर्जीवाड़े के आरोपों के संबंध में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही डीओपीटी कार्यालय में याचिकाकर्ता आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के आवेदन वाले लिफाफे की डिलीवरी की तारीख भी बताने के लिए कहा गया है।
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हाईकोर्ट की खंडपीठ ने डाक विभाग, डीओपीटी और उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने के भी निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस पंकज पुरोहित के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
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2020 में डीओपीटी ने कर्मचारी चयन आयोग में सदस्य के पद के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया था जिसमें आवेदन की अंतिम तिथि 23 मार्च 2020 थी। उच्च न्यायालय के समक्ष दायर रिट में संजीव चतुर्वेदी ने दावा किया था कि उत्तराखंड सरकार की ओर से विधिवत अनुशंसा सहित अग्रेषित उनका आवेदन 20 मार्च 2020 को डीओपीटी की केंद्रीय रजिस्ट्री तक पहुंच गया था।
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जालसाजी का भी दिया था हवाला
इसके प्रमाण में उन्होंने डाक विभाग का हलफनामा भी दिया जिसमें इसकी पुष्टि की गई थी। याचिका के अनुसार डीओपीटी ने इसी मामले में एक अन्य रिट के जवाब में दावा किया था कि चतुर्वेदी का आवेदन 29 मई 2020 को मिला था जब आवेदन की अंतिम तिथि निकल चुकी थी। इस आधार पर इसे अस्वीकार कर दिया गया था।

विवाद के अन्य मामले में डीओपीटी का दावा था कि देहरादून में वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई), जहां से चतुर्वेदी ने स्नातकोत्तर डिग्री का दावा किया था, वह एक गैर-मान्यता प्राप्त संस्थान है और अधिकारी की जन्म तिथि और कार्य अनुभव में भी विवाद है। याचिका में अधिकारी ने साक्षात्कार के लिए योग्य उम्मीदवारों को बुलाने और किसी विशेष उम्मीदवार के पक्ष में उसकी कूलिंग ऑफ अवधि में छूट देने के लिए कुछ अन्य जालसाजी का भी हवाला दिया था।

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कैट ने खारिज किया था मामला
इस संबंध में चतुर्वेदी ने जनवरी 2021 में उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें एक अन्य अधिकारी के चयन आदेश को रद्द करने और जालसाजी और मनगढ़ंत आरोपों की सीबीआई जांच की मांग की गई थी। इस याचिका को मार्च 2023 में हाईकोर्ट ने कैट की सर्किट बेंच को भेज दिया था। कैट ने अपने फैसले में मामले को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उनका आवेदन 20 मार्च 2020 को डीओपीटी के गलत अनुभाग में प्राप्त हुआ था। 29 मई 2020 को उनका आवेदन सही अनुभाग में प्राप्त हुआ था जो कि अंतिम तिथि से परे था।
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