{"_id":"5903922c4f1c1bc12cc0c0be","slug":"castle-in-th-wood","type":"story","status":"publish","title_hn":"जंगलात हुआ कैशलैस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जंगलात हुआ कैशलैस
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
Updated Sat, 29 Apr 2017 12:34 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
वन महकमा अब कैशलैस होने जा रहा है। पहली बार जंगलात में होने वाले सभी काम ई टेंडर के जरिए संपन्न किए जाएंगे। ई टेंडरिंग से विभिन्न मदों में मिलने वाली रकम के लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ेगी। वहीं कागजों में हेर फेर कर बजट कम ज्यादा कर होने वाली धांधली पर भी शिकंजा कसेगा। एक लाख तक के काम अभी बिना टेंडर के ही किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैशलैस इंडिया की तर्ज पर वन महकमे ने भी एक अप्रैल से पूरी तरह कैशलैस सिस्टम को लागू कर दिया गया है। अब जंगलात में जल्द ही ई टेंडरिंग लागू की जा रही है। दरअसल, पूर्व में जंगलात के सभी काम जैसे पौध रोपण करना, जंगलात में तारबाड़ बनाना, सुरक्षा दीवार व सड़क बनाना, फायर सीजन में सूचना तंत्र मजबूत करने के लिए वाचर्स की नियुक्ति, फायर लाइन बनाना, फायर लाइनों की सफाई, कंट्रोल बर्निंग, नदी में तट बंध बनाना आदि के करोड़ों के काम रेंज स्तर पर ही हो जाया करते थे।
बजट में देर सबेर होने पर रेंज आफिसर ‘अपनी जेब’ से इनका भुगतान करते थे बाद में बजट मिलने पर ‘अपनी जेब’ से दी रकम वापस ले लिया करते थे। इस प्रक्रिया में कागजों में मजदूरों की संख्या अधिक दर्शाने व काम की लागत बढ़ने की आशंका बनी रहती थी। वहीं अधिकारी पूरी तरह रेंज आफिसर पर ही निर्भर रहते थे। इधर, कैशलैस सिस्टम लागू होने से सभी मजदूरों के खाते में रुपये हस्तांतरित करने में वन अधिकारियों को दिक्कतें आ रही है। इसके मद्देनजर महकमा अब ई टेंडर शुरू करने जा रहा है।
विज्ञापन
टेंडर में प्रतिस्पर्धा होने से कम दाम में ज्यादा काम का फायदा होगा। दूसरा बैंक लेनदेन बढ़ने से सीधे तौर पर पारदर्शिता भी बढ़ेगी। साथ ही कागजों में हेरफेर कर बजट की गड़बड़ी की भी रोकथाम होगी। अभी एक लाख रुपये तक के सभी काम विशेषकर पौधरोपण के काम के लिए टेंडर नहीं किए जाएंगे। इसे विभाग ही संपन्न कराएगा।
इंसेट
कैशलैस को सफल बनाने के लिए जल्द ही ई टेंडर शुरू करने जा रहे हैं। पौधारोपण को अभी इस दायरे में नहीं जा पाए है। कोशिश है कि जल्द ही अधिकारियों से वार्ता कर पौधारोपण को भी ई टेंडर के दायरे में लाने पर फैसला कर लिया जाए।
-डॉ. पराग मधुकर धकाते, वन संरक्षक पश्चिमी वन वृत्त
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैशलैस इंडिया की तर्ज पर वन महकमे ने भी एक अप्रैल से पूरी तरह कैशलैस सिस्टम को लागू कर दिया गया है। अब जंगलात में जल्द ही ई टेंडरिंग लागू की जा रही है। दरअसल, पूर्व में जंगलात के सभी काम जैसे पौध रोपण करना, जंगलात में तारबाड़ बनाना, सुरक्षा दीवार व सड़क बनाना, फायर सीजन में सूचना तंत्र मजबूत करने के लिए वाचर्स की नियुक्ति, फायर लाइन बनाना, फायर लाइनों की सफाई, कंट्रोल बर्निंग, नदी में तट बंध बनाना आदि के करोड़ों के काम रेंज स्तर पर ही हो जाया करते थे।
विज्ञापन
बजट में देर सबेर होने पर रेंज आफिसर ‘अपनी जेब’ से इनका भुगतान करते थे बाद में बजट मिलने पर ‘अपनी जेब’ से दी रकम वापस ले लिया करते थे। इस प्रक्रिया में कागजों में मजदूरों की संख्या अधिक दर्शाने व काम की लागत बढ़ने की आशंका बनी रहती थी। वहीं अधिकारी पूरी तरह रेंज आफिसर पर ही निर्भर रहते थे। इधर, कैशलैस सिस्टम लागू होने से सभी मजदूरों के खाते में रुपये हस्तांतरित करने में वन अधिकारियों को दिक्कतें आ रही है। इसके मद्देनजर महकमा अब ई टेंडर शुरू करने जा रहा है।
विज्ञापन
टेंडर में प्रतिस्पर्धा होने से कम दाम में ज्यादा काम का फायदा होगा। दूसरा बैंक लेनदेन बढ़ने से सीधे तौर पर पारदर्शिता भी बढ़ेगी। साथ ही कागजों में हेरफेर कर बजट की गड़बड़ी की भी रोकथाम होगी। अभी एक लाख रुपये तक के सभी काम विशेषकर पौधरोपण के काम के लिए टेंडर नहीं किए जाएंगे। इसे विभाग ही संपन्न कराएगा।
इंसेट
कैशलैस को सफल बनाने के लिए जल्द ही ई टेंडर शुरू करने जा रहे हैं। पौधारोपण को अभी इस दायरे में नहीं जा पाए है। कोशिश है कि जल्द ही अधिकारियों से वार्ता कर पौधारोपण को भी ई टेंडर के दायरे में लाने पर फैसला कर लिया जाए।
-डॉ. पराग मधुकर धकाते, वन संरक्षक पश्चिमी वन वृत्त