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नवोदित लेखकों को मिलेगा छपने का मौका
अमरनाथ/अमर उजाला, हल्द्वानी।
Updated Mon, 28 Mar 2016 12:12 AM IST
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बलदेव भाई शर्मा एनबीटी
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) अब नवोदित लेखकों को देश में पहचान दिलाएगा और उनकी लेखनी को धारदार बनाएगा। खासकर जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण, कृषि, वन्यजीव, पक्षी आदि विषयों पर लिखने वालों को वरीयता दी जाएगी। उत्तराखंड के युवाओं के लिए यह सुनहरा मौका है। एनबीटी के चेयरमैन बनने के बाद पहली बार हल्द्वानी पहुंचे बलदेव भाई शर्मा ने रविवार को अमर उजाला से उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा नवोदित लेखकों को एनबीटी ने अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका दिया है।
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इस क्रम में हाल में देश के 16 नवोदित लेखकों की किताबें प्रकाशित की गई हैं। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। नई सोच के साथ अच्छा लेखन करने वाले युवा लेखकों को आगे बढ़ने के लिए एनबीटी मौका देगा। बशर्ते उनकी उम्र 40 साल से अधिक न हो और अभी तक उनकी कोई किताब न छपी हो। चूंकि न्यूनतम उम्र सीमा निर्धारित नहीं है। इसलिए स्कूली बच्चों को भी अपनी पुस्तकें प्रकाशित कराने का अवसर मिल सकता है। ऐसे लेखक, पत्रकार अपनी पांडुलिपि उन्हें भेज सकते हैं।
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उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कविताएं और धार्मिक विषयों पर सामग्री स्वीकार नहीं की जाएगी। अनुबंध केवल उन्हीं लेखकों से होगा, जिनकी किताबें स्क्रीनिंग कमेटी सलेक्ट करेगी। उन्होंने बताया कि देश में केवल एनबीटी में ही यह व्यवस्था है कि लेखक के साथ कोई हादसा होने पर रॉयल्टी नॉमिनी को दी जाएगी। अच्छी किताबें हिंदी, अंग्रेजी के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में भी प्रकाशित होंगी।
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एनबीटी के चेयरमैन ने बताया कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत संचालित ट्रस्ट अब तक के परमवीर चक्र विजेता सैनिकों की वीरगाथा बच्चों को पढ़ाने के लिए बुक्स की सीरीज ला रहा है। इसमें देश के पहले परमवीर चक्र विजेता कुमाऊं रेजीमेंट के मेजर सोमनाथ शर्मा (1947 युद्ध) की वीरता की कहानी भी बच्चे पढ़ेंगे।
इसके अलावा मेजर शौतान सिंह (1962 युद्ध), वीर अब्दुल हमीद (1965 युद्ध), सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण क्षेत्रपाल (1971 युद्ध) और कैप्टन मनोज कुमार पांडेेय (1999 कारगिल युद्ध) सहित 21 परमवीर चक्र विजेताओं की बहादुरी की कहानी भी स्कूली बच्चों को पढ़ने को मिलेगी। इसी तरह महिला सशक्तिकरण के तहत देश की आजादी में योगदान देने वाली रानी गैदिनल्यू, कनक लता जैसी महिलाओं पर भी सीरीज प्रकाशित की जा रही है।
लेखक यहां भेजें अपनी रचनाएं :-
चेयरमैन
नेशनल बुक ट्रस्ट
नेहरू भवन, 5 इंडस्ट्रियल एरिया
फेस -2, वसंत कुंज नई दिल्ली
पिन कोड -110070
स्वतंत्र भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता शहीद मेजर सोमनाथ शर्मा कुमाऊं रेजीमेंट केंद्र में तैनात थे। 27 जनवरी 1947 को जब कश्मीर में कबायली हमले की सूचना आई, उस वह 4 कुमाऊं की डेल्टा कंपनी का नेतृत्व कर रहे थे। बडगाम में अदम्य साहस के साथ कबायलियों के साथ लड़ते हुए वह वीरगति को प्राप्त हुए। इसी पराक्रम के लिए मेजर सोमनाथ शर्मा को मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा गया। कुमाऊं रेजीमेंट केंद्र ने यहां रानीखेत में उनके नाम पर सोमनाथ मैदान का निर्माण कराया है, जिसमें नए सैनिकों की भर्ती और तमाम अन्य सैन्य गतिविधियां होती हैं।