फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Bridges will be built for tigers in Udwa and Ganrad

जमरानी बांध: बाघों के लिए उड़वा और गनराड़ में बनेंगे पुल, 10 किमी झील पर बनेगा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर

Wed, 21 Oct 2026 11:37 AM IST
Heera कैलाश पाठक
कैलाश पाठक Published by: Heera Updated Wed, 21 Oct 2026 11:37 AM IST
सार

जमरानी बांध परियोजना में बाघों के सुरक्षित विचरण के लिए दो विशेष पुल बनाए जाएंगे; वन विभाग ने लोकेशन फाइनल कर दी है और एनटीसीए व एनबीडब्ल्यूडब्ल्यू की क्लीयरेंस के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं।

विज्ञापन
Bridges will be built for tigers in Udwa and Ganrad
बाघ

विस्तार

जमरानी बांध परियोजना में इंसानों के साथ बाघों का भी ख्याल रखा गया है। बाघों के सुरक्षित विचरण के लिए दो विशेष पुल बनाए जाएंगे। वन विभाग ने लोकेशन फाइनल कर दी है। उप महाप्रबंधक बीबी पांडे ने बताया कि नेशनल टाइगर कन्जरवेशन अथॉरिटी और नेशनल बोर्ड फार वाइल्डलाइफ की क्लीयरेंस के लिए दो पुल प्रस्तावित किए गए हैं जो वाइल्डलाइफ मूवमेंट को सुविधा प्रदान करेंगे।

विज्ञापन

परियोजना प्रबंधक शाहनवाज ने बताया कि वन विभाग के साथ प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट ने पिछले सप्ताह सर्वे किया और चार में से दो लोकेशन फाइनल की गई हैं जो उड़वा और गनराड के नजदीक हैं। ये दोनों जगह जंगल के सबसे सेंसिटिव जोन हैं। इन पुलों की चौड़ाई और ऊंचाई इस तरह रखी जाएगी कि हाथी, बाघ, तेंदुआ जैसे बड़े जानवर आसानी से निकल सकें। इससे सड़क हादसे और मानव-वन्यजीव संघर्ष दोनों कम होंगे।

विज्ञापन

बाघ कॉरिडोर पर उठ रहे सवाल
जमरानी बांध दुधवा-लग्गा टाइगर कॉरिडोर में बन रहा है। यह कॉरिडोर नैनीताल के तराई के जंगलों को पीलीभीत और दुधवा से जोड़ता है। इसी कॉरिडोर से बाघों का मूवमेंट होता है। पर्यावरण मंत्रालय ने 2019 में पर्यावरण क्लीयरेंस तो दे दी थी, लेकिन एनटीसीए से अनापत्ति प्रमाणपत्र की शर्त रखी थी। एनटीसीए ने पहले सिफारिश नहीं की थी और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया से इकोलॉजिकल इंपैक्ट का आंकलन करने को कहा था। डब्ल्यूआईआई की रिपोर्ट के बाद ही नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ ने 77वीं बैठक में सैद्धांतिक मंजूरी दी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

 

इस कॉरिडोर में 12 से 15 बाघों का नियमित विचरण होता है। कैमरा ट्रैप में गनराड, उड़वा और गौला रेंज में बाघिन अपने शावकों के साथ देखी गई हैं। यह एरिया बाघों के लिए ब्रिज की तरह काम करता है जिससे जीन पूल बना रहता है।

झील से बढ़ेंगी पर्यटन गतिविधियां
जमरानी बांध की झील 10 किलोमीटर लंबी होगी। 150.6 मीटर ऊंचा और 480 मीटर लंबा ग्रेविटी बांध होगा। इस बांध से हल्द्वानी और आसपास की 10.65 लाख आबादी को 117 एमएलडी पेयजल मिलेगा। 57,065 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई होगी जिसमें उत्तराखंड के 9,458 और उत्तर प्रदेश के 47,607 हेक्टेयर खेत शामिल हैं। 10 किलोमीटर लंबी झील से पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी। यहां नौकायन, वाटर स्पोर्ट्स और नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित होगा जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। बांध की लागत 3808 करोड़ है जिसमें 90 प्रतिशत केंद्र सरकार दे रही है। टारगेट नहरें जून 2028 और मुख्य बांध 2029 तक पूरा करना है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed