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अभिभावकों की जेब काट रहे स्कूल और बुकसेलर

Thu, 31 Mar 2016 01:11 AM IST
ब्यूरो/ हल्द्वानी
ब्यूरो/ हल्द्वानी Updated Thu, 31 Mar 2016 01:11 AM IST
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 पब्लिक स्कूलों से गठजोड़ पर बुक सेलर मुनाफे का ‘खेल’ खेल रहे हैं। ड्राइंग जैसी मामूली किताब ढाई सौ से तीन सौ रुपये में बेची जा रही है। इसी तरह किताबों की कीमतें इतनी अधिक प्रिंट हैं कि जो कोर्स दो हजार रुपये में आ जाना चाहिए, वह तीन से चार हजार रुपये में पड़ रहा है। स्कूल और बुकसेलरों का गठजोड़ अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रहा है। लेकिन शिक्षा विभाग और प्रशासन बेखबर बना हुआ है। कोर्स की कीमत मनमाने ढंग से न वसूली जाए, इसको लेकर कोई नीति नहीं बनाई गई। 
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स्कूलों में नया शिक्षण सत्र पहली अप्रैल से शुरू हो रहा है। स्कूल में महंगी फीस के बाद अभिभावकों  को महंगे कोर्स ने परेशान करके रख दिया है। किसी तरह पब्लिक स्कूलों में दाखिला होते ही या फिर बच्चा एक कक्षा से दूसरी कक्षा में पहुंचने पर किताबों की सूची ने अभिभावकों का बजट बिगाड़ दिया है। खास बात यह है कि कोर्स किस बुकसेलर से खरीदना है यह भी स्कूल वाले ही बता रहे हैं।
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बस यहीं से शुरू हो जाता है कोर्स के नाम पर मनमानी कीमतें वसूलने का खेल। एक बुकसेलर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहले ही पब्लिक स्कूलों से संपर्क कर कमीशन तय हो जाता है। हालांकि बुकसेलरों की तादाद भी अधिक होने की वजह से उनमें भी स्पर्धा रहती है। इसमें फायदा स्कूल प्रबंधन को होता है। बुकसेलर ठेका हासिल करने के लिए स्कूलों को बच्चों की तादाद के हिसाब से लाखों रुपये बतौर कमीशन पहले ही दे देते हैं।
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जब बुकसेलर इतना खर्चा करेगा तो अधिक दामों पर किताबें बेचेगा ही। इसी वजह से कम कीमत वाली किताब भी दो सौ से चार सौ रुपये में बेची जा रही है। जो कापी 25 से 30 रुपये तक में मिलनी चाहिए वह 40 रुपये में बेची जा रही है। पेंसिल बाक्स, ज्यामेट्री बाक्स और लंच बाक्स भी मनमानी कीमतों पर बिक रहे हैं।  बुकसेलरों की मनमानी को शिक्षा विभाग एवं प्रशासन भी अनदेखी कर रहा है जिसका खामियाजा अभिभावकों को महंगा कोर्स खरीद कर चुकाना पड़ रहा है।
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ऐसे चलता है कमीशनबाजी का खेल
हल्द्वानी। यूपी के मेरठ और साहिबाबाद समेत दूसरे शहरों के पब्लिशर्स के प्रतिनिधि दिसंबर और जनवरी में ही स्कूलों में आकर संपर्क करते हैं। इसके बाद प्रधानाचार्य अपने टीचरों से कौन सी बुक्स में अध्ययन सामग्री अच्छी है, इसका चयन कराते हैं। इसके बाद प्रति क्लास, प्रति बच्चे के कोर्स में कमीशन की राशि अलग-अलग तय होती है। छोटे-छोटे से स्कूल को भी एक लाख की बिक्री पर जब 15 हजार रुपये बतौर कमीशन मिलता है तो बड़े स्कूलों के कितना कमीशन मिलता होगा। 


उदाहरण स्वरूप कुछ स्कूलों के कोर्स की कीमतें
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1. नैनीवैली स्कूल
 (एलकेजी कोर्स 2000, कक्षा एक का कोर्स 2800, कक्षा पांच का कोर्स 4200 रुपये लगभग) 
2. सेंट थेरेसा स्कूल 
 (एलकेजी कोर्स 1430, कक्षा एक का 2571 एवं कक्षा पांच का 3059 रुपये लगभग)
3. निर्मला कान्वेंट स्कूल 
(एलकेजी कोर्स 1281, कक्षा एक का 2733 एवं कक्षा पांच का कोर्स 3898 रुपये लगभग)
4. महर्षि विद्या मंदिर
 (एलकेजी कोर्स 802, कक्षा एक कोर्स 1498 रुपये, कक्षा पांच कोर्स 2026 रुपये)
5. केंद्रीय विद्यालय
 (कक्षा छह से लेकर आठ तक का कोर्स मय कापियों सहित केवल 900 रुपये में)
6. सेंट लारेंस स्कूल 
(एलकेजी कोर्स 1430, कक्षा एक कोर्स 2571 एवं कक्षा पांच का कोर्स 3059 रुपये लगभग)
7. होली एंजिल्स स्कूल
(एलकेजी कोर्स 1197, कक्षा एक कोर्स 2180, कक्षा पांच का कोर्स 3815 रुपये लगभग)
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कोर्स पर दस प्रतिशत डिस्काउंट
हल्द्वानी। एक ओर जहां बुकसेलर किसी भी स्कूल की किताबों पर एक रुपये का डिस्काउंट देने को तैयार नहीं हैं, वहीं कुछ बुकसेलर बड़े स्कूलों के बच्चों 10 फीसदी तक छूट दे रहे हैं।  
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