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बर्ड फेस्टिवल : वॉचरों ने दो दिन में 160 प्रजातियों के पक्षी कैमरों में किए कैद
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हल्द्वानी। मनोरा क्षेत्र में आयोजित बर्ड फेस्टिवल के जरिये नई प्रजातियों के पक्षियों के मिलने का क्रम जारी है। दो दिनों में विभिन्न पक्षियों की 160 प्रजातियां ढूंढकर बर्ड वॉचरों ने उन्हें अपने कैमरों में कैद किया। दो दिनों के अंदर ग्रे हेडेड, फिश ईगल, स्माल निलतावा जैसे पक्षी मिले, जो अमूमन अब कम दिखते हैं।
मनोरा की वादियों में आयोजित फेस्टिवल में गुजरात, उत्तराखंड, दिल्ल्ली, महाराष्ट्र के 30 से ज्यादा बर्ड वॉचर भाग लेकर पक्षियों की प्रजाति को ढूंढ रहे हैं। वाइल्ड टस्कर्स सोसायटी के अध्यक्ष विकास किरौला ने इस आयोजन में बर्ड वाॅचरों को आमंत्रित किया और पक्षियों की प्रजाति ढूंढने में सहायक बने। फिश ईगल आमतौर शांत जगह पर रहते हैं और मानव से दूर रहते हैं। इन्हें पहली बार इस क्षेत्र में देखा गया। इसी जगह पर येलो थानेड मार्टिंन जानवर भी दिखा। यह पहली बार क्षेत्र में दिखा। आरेंज लीफ बर्ड, ग्रे हेडेड, क्रीम संस सन बर्ड, नील तावा, ग्रेवुश चैट, नाडर जार, वाडीटियर, बैरेड ओलेट, ब्लू थोट बार्बेड जैसी प्रजातियां भी दिखीं।
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मनोरा की वादियों में आयोजित फेस्टिवल में गुजरात, उत्तराखंड, दिल्ल्ली, महाराष्ट्र के 30 से ज्यादा बर्ड वॉचर भाग लेकर पक्षियों की प्रजाति को ढूंढ रहे हैं। वाइल्ड टस्कर्स सोसायटी के अध्यक्ष विकास किरौला ने इस आयोजन में बर्ड वाॅचरों को आमंत्रित किया और पक्षियों की प्रजाति ढूंढने में सहायक बने। फिश ईगल आमतौर शांत जगह पर रहते हैं और मानव से दूर रहते हैं। इन्हें पहली बार इस क्षेत्र में देखा गया। इसी जगह पर येलो थानेड मार्टिंन जानवर भी दिखा। यह पहली बार क्षेत्र में दिखा। आरेंज लीफ बर्ड, ग्रे हेडेड, क्रीम संस सन बर्ड, नील तावा, ग्रेवुश चैट, नाडर जार, वाडीटियर, बैरेड ओलेट, ब्लू थोट बार्बेड जैसी प्रजातियां भी दिखीं।
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