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बिंदुखत्ता नगर पालिका भंग
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Wed, 07 Sep 2016 01:42 AM IST
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बिंदुखत्ता नगर पालिका भंग हो गई। पालिका का मुद्दा मंगलवार को श्रम मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल के घर (क्षेत्र) से मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंचा। श्रम मंत्री की सिफारिश पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पालिका भंग करने का औपचारिक घोषणा कर दी है। हालांकि, इसका आदेश अभी नहीं हुआ।
पालिका मुद्दे पर श्रम मंत्री बिंदुखत्ता की आम जनता ही नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से भी चौतरफा घिर गए थे। जिससे चुनाव में दुर्गापाल और कांग्रेस को नुकसान की आशंका थी। जनता के गुस्से को भांपते हुए श्रम मंत्री ने सुर बदले और पालिका भंग करने की सिफारिश मुख्यमंत्री हरीश रावत से कर दी। सिफारिश के लिए श्रम मंत्री बिंदुखत्ता की जनता को साथ लेकर गए थे। मुख्यमंत्री हरीश रावत से पालिका भंग करने की औपचारिक घोषणा कर दी। अमर उजाला ने सोमवार के अंक में ही पालिका भंग होने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की।
पालिका भंग करने की सिफारिश के लिए मेरे नेतृत्व में बिंदुखत्ता के 90 लोगों का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को देहरादून में मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि पालिका जनभावनाओं के अनुरूप ही बनाई थी। जनता का हित सर्वोपरि है। अब जनता पालिका नहीं चाहती है तो उसे औपचारिक रूप से भंग किया जाता है। एक सप्ताह के भीतर इसका आदेश भी जारी कर दिया जाएगा। 20 मार्च 2015 को कैबिनेट में बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ था। राजस्व गांव के लिए अब फिर से पहल की जाएगी।
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- हरीश चंद्र दुर्गापाल, श्रम मंत्री
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बिंदुखत्ता नगरपालिका की कुडंली
- 19 दिसंबर 2014 को बिंदुखत्ता को नगरपालिका बनाने की अंतरिम अधिसूचना जारी।
- 25 फरवरी 2015 से पालिका के विरोध में मुखर होने लगे थे लोगों के स्वर, कई दौर के हो चुके हैं प्रदर्शन।
- 24 फरवरी 2015 को बिंदुखत्ता को दे दिया गया नगरपालिका का दर्जा, कुछ लोग पक्ष में तो कुछ उतर आए थे विरोध में।
- 14 अक्टूबर 2015 को प्रदेश के श्रम मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल द्वारा क्षेत्रवासियों के भारी विरोध के बाद किया था नगरपालिका दफ्तर का उद्घाटन।
- 14 अक्टूबर 2015 को ही पालिका दफ्तर उद्घाटन के दिन प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने किया था लाठीचार्ज और 47 प्रदर्शनकारियों पर मुकदमा दर्ज।
- हाईकोर्ट में विचाराधीन है बिंदुखत्ता नगरपालिका का मामला। अखिल भारतीय किसान सभा (अभाकिस) ने नवंबर 2015 में राज्य सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका।
पालिका मुद्दे पर श्रम मंत्री बिंदुखत्ता की आम जनता ही नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से भी चौतरफा घिर गए थे। जिससे चुनाव में दुर्गापाल और कांग्रेस को नुकसान की आशंका थी। जनता के गुस्से को भांपते हुए श्रम मंत्री ने सुर बदले और पालिका भंग करने की सिफारिश मुख्यमंत्री हरीश रावत से कर दी। सिफारिश के लिए श्रम मंत्री बिंदुखत्ता की जनता को साथ लेकर गए थे। मुख्यमंत्री हरीश रावत से पालिका भंग करने की औपचारिक घोषणा कर दी। अमर उजाला ने सोमवार के अंक में ही पालिका भंग होने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की।
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पालिका भंग करने की सिफारिश के लिए मेरे नेतृत्व में बिंदुखत्ता के 90 लोगों का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को देहरादून में मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि पालिका जनभावनाओं के अनुरूप ही बनाई थी। जनता का हित सर्वोपरि है। अब जनता पालिका नहीं चाहती है तो उसे औपचारिक रूप से भंग किया जाता है। एक सप्ताह के भीतर इसका आदेश भी जारी कर दिया जाएगा। 20 मार्च 2015 को कैबिनेट में बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ था। राजस्व गांव के लिए अब फिर से पहल की जाएगी।
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- हरीश चंद्र दुर्गापाल, श्रम मंत्री
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बिंदुखत्ता नगरपालिका की कुडंली
- 19 दिसंबर 2014 को बिंदुखत्ता को नगरपालिका बनाने की अंतरिम अधिसूचना जारी।
- 25 फरवरी 2015 से पालिका के विरोध में मुखर होने लगे थे लोगों के स्वर, कई दौर के हो चुके हैं प्रदर्शन।
- 24 फरवरी 2015 को बिंदुखत्ता को दे दिया गया नगरपालिका का दर्जा, कुछ लोग पक्ष में तो कुछ उतर आए थे विरोध में।
- 14 अक्टूबर 2015 को प्रदेश के श्रम मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल द्वारा क्षेत्रवासियों के भारी विरोध के बाद किया था नगरपालिका दफ्तर का उद्घाटन।
- 14 अक्टूबर 2015 को ही पालिका दफ्तर उद्घाटन के दिन प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने किया था लाठीचार्ज और 47 प्रदर्शनकारियों पर मुकदमा दर्ज।
- हाईकोर्ट में विचाराधीन है बिंदुखत्ता नगरपालिका का मामला। अखिल भारतीय किसान सभा (अभाकिस) ने नवंबर 2015 में राज्य सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका।