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Uttarakhand High Court: उत्तराखंड हाईकोर्ट की कार्रवाई, सचिव एमडीडीए के खिलाफ जमानती वारंट जारी
Thu, 09 Nov 2023 10:59 AM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
Published by: हीरा मेहरा
Updated Thu, 09 Nov 2023 10:59 AM IST
सार
हाईकोर्ट (Uttarakhand High Court) ने टिहरी विस्थापित क्षेत्र देहरादून की अजबपुरकलां में टीएचडीसी की ओर से निर्धारित पार्कों की भूमि पर अवैध कालोनियों का निर्माण किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।
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उत्तराखंड हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तराखंड हाईकोर्ट (Uttarakhand High Court) ने टिहरी विस्थापित क्षेत्र देहरादून की अजबपुरकलां में टीएचडीसी की ओर से निर्धारित पार्कों की भूमि पर अवैध कालोनियों का निर्माण किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।
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पूर्व के आदेश के तहत सचिव एमडीडीए की ओर से जवाब पेश नहीं करने व कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं होने पर सचिव एमडीडीए के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए गए हैं। कोर्ट उन पर पूर्व में 15000 का जुर्माना भी लगा चुकी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
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मामले के अनुसार अजबपुरकलां निवासी वनमाली प्रसाद ने 2021 में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि टीएचडीसी ने अजबपुरकलां के साथ पार्कों की भूमि पर अवैध कॉलोनियों का निर्माण कर दिया है जो एमडीडीए द्वारा मान्यता प्राप्त थी। एमडीडीए को सूचना देने के बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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बागेश्वर के दर्शानी गांव में चुनाव नहीं कराने पर मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 से अब तक प्रधानविहीन ग्राम सभा दर्शानी गरुड़ ( बागेश्वर) में अब तक प्रधान का चुनाव नहीं कराने पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि गांव में प्रधान का चुनाव अब तक क्यों नहीं कराया गया है। कोर्ट ने इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। ग्राम दर्शानी निवासी भोला दत्त पांडे ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि दर्शानी गांव में वर्ष 2019 से ग्राम प्रधान के चुनाव नहीं कराए गए हैं। वर्ष 2019 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान का पद ओबीसी उम्मीदवार के लिए आरक्षित था लेकिन ओबीसी के किसी भी व्यक्ति के नामांकन पत्र दाखिल न करने से प्रधान का पद रिक्त है।