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एनएच-74 भूमि घोटाले में आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
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नैनीताल। ऊधमसिंह नगर जिले के चर्चित एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले के एक आरोपी की जमानत अर्जी बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश और विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम आरके खुल्बे ने खारिज कर दी।
अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सुशील कुमार शर्मा ने न्यायालय को बताया कि आरोपी जगदीश अरोड़ा पुत्र निहाल चंद्र निवासी जसपुर खुर्द ऊधमसिंह नगर ने ग्राम गढ़ी हुसैन स्थित खसरा नंबर 191 की भूमि एनएच 74 के विस्तारीकरण के लिए एनएच प्राधिकरण ने अधिग्रहित की। यह भूमि दिनांक 19-6-2013 और 24-05-2014 के अनुसार कृषि में अधिसूचित थी।
न्यायालय को बताया गया कि आरोपी जगदीश अरोड़ा ने सह अभियुक्त विकास चौहान और अनिल कुमार के साथ मिलकर राजकीय धन के गबन की नीयत से बैक डेटेड एक वाद को आधार बनाकर और एसएलएओ दिनेश प्रताप सिंह से मिलकर 9 करोड़ 13 लाख 84 हजार रुपये अकृषि दर के आधार पर प्राप्त कर सरकार को हानि पहुंचाई है। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय को बताया कि एनएच घोटाला प्रकाश में आने के बाद आरोपी ने एसडीएम कोर्ट जसपुर के पेशकार विकास चौहान के साथ मिलकर आठ से दस गुना अधिक प्रतिकर प्राप्त करने वाली फाइल को भी गायब करा दिया था। इसके बाद मामले की रिपोर्ट जसपुर थाने में दर्ज कराई गई थी।
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बुधवार को बचाव पक्ष की ओर से आरोपी का जमानत प्रार्थना पत्र न्यायालय में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने यह कहते हुए जमानत का विरोध किया कि आरोपी ने साजिश के तहत प्रतिकर के रूप में सरकार से करोड़ों रुपये प्राप्त किए हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश आरके खुल्बे ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सुशील कुमार शर्मा ने न्यायालय को बताया कि आरोपी जगदीश अरोड़ा पुत्र निहाल चंद्र निवासी जसपुर खुर्द ऊधमसिंह नगर ने ग्राम गढ़ी हुसैन स्थित खसरा नंबर 191 की भूमि एनएच 74 के विस्तारीकरण के लिए एनएच प्राधिकरण ने अधिग्रहित की। यह भूमि दिनांक 19-6-2013 और 24-05-2014 के अनुसार कृषि में अधिसूचित थी।
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न्यायालय को बताया गया कि आरोपी जगदीश अरोड़ा ने सह अभियुक्त विकास चौहान और अनिल कुमार के साथ मिलकर राजकीय धन के गबन की नीयत से बैक डेटेड एक वाद को आधार बनाकर और एसएलएओ दिनेश प्रताप सिंह से मिलकर 9 करोड़ 13 लाख 84 हजार रुपये अकृषि दर के आधार पर प्राप्त कर सरकार को हानि पहुंचाई है। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय को बताया कि एनएच घोटाला प्रकाश में आने के बाद आरोपी ने एसडीएम कोर्ट जसपुर के पेशकार विकास चौहान के साथ मिलकर आठ से दस गुना अधिक प्रतिकर प्राप्त करने वाली फाइल को भी गायब करा दिया था। इसके बाद मामले की रिपोर्ट जसपुर थाने में दर्ज कराई गई थी।
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बुधवार को बचाव पक्ष की ओर से आरोपी का जमानत प्रार्थना पत्र न्यायालय में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने यह कहते हुए जमानत का विरोध किया कि आरोपी ने साजिश के तहत प्रतिकर के रूप में सरकार से करोड़ों रुपये प्राप्त किए हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश आरके खुल्बे ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।