{"_id":"67860589b128016ee10f1c08","slug":"atlas-coming-near-earth-after-1-lakh-60-thousand-years-2025-01-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Uttarakhand: एक लाख 60 हजार साल बाद धरती के पास आ रहा एटलस, आसमान में अपनी चमक बिखेरेगा; ऐसा दिखेगा नजारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Uttarakhand: एक लाख 60 हजार साल बाद धरती के पास आ रहा एटलस, आसमान में अपनी चमक बिखेरेगा; ऐसा दिखेगा नजारा
Tue, 14 Jan 2025 12:11 PM IST
हीरा मेहरा
गिरीश रंजन तिवारी
गिरीश रंजन तिवारी
Published by: हीरा मेहरा
Updated Tue, 14 Jan 2025 12:11 PM IST
सार
16 हजार अरब किलोमीटर की दूरी से सफर पर निकला एक धूमकेतु एक लाख साठ हजार साल बाद 13 जनवरी, 2025 को सौर मंडल में प्रवेश कर अपने पेरीहेलियन पर सूर्य के सर्वाधिक निकट 13.5 मिलियन किमी की दूरी पर पहुंचेगा।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
16 ट्रिलियन किलोमीटर यानी 16 हजार अरब किलोमीटर की दूरी से सफर पर निकला एक धूमकेतु एक लाख साठ हजार साल बाद 13 जनवरी, 2025 को सौर मंडल में प्रवेश कर अपने पेरीहेलियन पर सूर्य के सर्वाधिक निकट 13.5 मिलियन किमी की दूरी पर पहुंचेगा। यह दूरी सूर्य से सर्वाधिक निकट स्थित बुध ग्रह और सूर्य की औसत दूरी के एक तिहाई से भी कम है। इसके कुछ ही समय बाद यह पृथ्वी के भी सर्वाधिक निकट लगभग 14 करोड़ किमी की दूरी पर पहुंचेगा। यह धूमकेतु सूर्यास्त के बाद दक्षिणी गोलार्ध से दिखाई देगा।
विज्ञापन
वैज्ञानिकों के अनुसार धूमकेतु संभावित रूप से -4.5 तीव्रता तक चमक सकता है, जो रात के आकाश में शुक्र की चमक के बराबर है। सूर्य के इतना ज्यादा निकट आने के कारण वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि इसकी बर्फ सूर्य की गर्मी से वाष्मीकृत हो जाएगी और इसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों को जानकारी मिली कि अब से एक लाख साठ हजार साल पहले भी यह सूर्य के इतने निकट से सुरक्षित अपने सफर पर - लौट गया था।
विज्ञापन
विस्फोट से बढ़ी चमक, बना दो दशक में सबसे चमकीला धूमकेतु
धूमकेतु जीउ एटलस (सी/2024) की खोज 5 अप्रैल, 2024 को चिली में एस्टेरॉयड टेरेस्ट्रियल इंपैक्ट लास्ट अलर्ट सिस्टम (एटीएलएए एटलस) की ओर से की गई थी। शुरुआत में इसकी चमक कम थी। हाल में 2 जनवरी को अचानक विस्फोट के कारण इसकी चमक में लगभग चार गुना वृद्धि हो गई और अब यह बीते दो दशकों में सबसे चमकीला धूमकेतु बन गया है।
विज्ञापन
ऊर्ट वादलों से निकलते हैं धूमकेतु
आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान, एरीज, के डॉ. मोहित जोशी ने बताया कि ऊर्ट बादल हमारे सौर मंडल को घेरने वाले अनगिनत अरबों बर्फीले पिंडों से बना एक विशाल बुलबुला है जो सूर्य से 16 ट्रिलियन किमी दूर स्थित है। ऊर्ट क्लाउड से निकलने वाले छोटे धूमकेतु अक्सर पेरीहेलियन, सूर्य के निकटतम, पहुंचने से पहले ही सूर्य की गर्मी से विघटित हो जाते हैं।