फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Astronomers succeeded in detecting hiccups in the black hole of the galaxy

Nainital News: आकाशगंगा के ब्लैक होल में हो रही हिचकियों का पता लगाने में सफल हुए खगोलविद

Sat, 30 Mar 2024 01:51 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Sat, 30 Mar 2024 01:51 AM IST
विज्ञापन
Astronomers succeeded in detecting hiccups in the black hole of the galaxy
नैनीताल। सुदूर आकाशगंगा के केंद्र में स्थित ब्लैक होल में लगातार हो रही हिचकियों के मामले को खगोल वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने सुलझाने में सफलता हासिल कर ली है। इस टीम में आर्यभट्ट विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) नैनीताल के एक खगोल वैज्ञानिक भी शामिल हैं। खगोलविदों ने एक छोटे ब्लैक होल को बड़े ब्लैक होल की गैस की डिस्क में बार-बार छेद करते हुए पाया है।
विज्ञापन

एरीज के खगोल वैज्ञानिक डा. वीरेंद्र यादव ने बताया कि दूर आकाशगंगा के केंद्र में नजर आई एक घटना ने खगोल वैज्ञानिकों को काफी समय से भ्रमित किया हुआ था। यह खोज ब्लैक होलों में अब तक अनदेखे व्यवहार के बारे में भी जानकारी देती है। लगभग 80 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर आकाशगंगा के केंद्र में स्थित एक महाविशाल ब्लैक होल द्वारा प्रदर्शित इस व्यवहार को वैज्ञानिक ''''लगातार हो रहीं हिचकियां'''' कहते हैं। यह हिचकियां प्रत्येक 8.5 दिन में गैस उत्सर्जन के आवधिक विस्फोट के रूप में प्रकट होती हैं, जिसके बाद यह अपनी सामान्य, निष्क्रिय अवस्था में लौट आती हैं।
विज्ञापन

बताया कि यह अभूतपूर्व व्यवहार ब्लैक होल अभिवृद्धि डिस्क, जिसे पहले केंद्रीय ब्लैक होल के चारों ओर घूमने वाली अपेक्षाकृत समान संरचना माना जाता था, की पारंपरिक समझ को चुनौती देता है। उन्होंने बताया कि इस शोध के मुख्य लेखक और एमआईटी के कावली इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोफिजिक्स एंड स्पेस रिसर्च के शोध वैज्ञानिक डॉ. धीरज पाशम ने टिप्पणी की कि हमने सोचा था कि हम ब्लैक होल के बारे में बहुत कुछ जानते हैं, लेकिन यह शोध दिखाता है कि और भी बहुत कुछ कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

डा. यादव ने बताया कि इस टीम में केंद्रीय सुपरमैसिव ब्लैक होल के द्रव्यमान का अनुमान लगाने और नई घटनाओं की व्याख्या में महत्वपूर्ण योगदान देने में एरीज के डॉ. सुवेन्दु रक्षित शामिल हैं। अभी हाल में साइंस एडवांसेज नामक पत्रिका में प्रकाशित इस शोध के निष्कर्ष से इन आवधिक विस्फोटों के लिए एक दिलचस्प स्पष्टीकरण प्रस्तावित किया गया है। ऐसा माना गया है कि एक छोटा ब्लैक होल केंद्रीय सुपरमैसिव ब्लैक होल की परिक्रमा करते हुए, समय-समय पर इसकी गैस की डिस्क को बाधित करता है और इस प्रक्रिया में गैस का गुबार छोड़ता है। इस खोज से पता चला है कि अभिवृद्धि डिस्क में अलग-अलग पिंड हो सकते हैं, जिनमें अन्य ब्लैक होल और यहां तक कि संपूर्ण तारे भी शामिल हैं।
टीम में शामिल डॉ. रक्षित का कहना है कि हम इस घटना को देखकर आश्चर्यचकित थे और इस व्यवहार को समझने और उसके बारे में बताने में टीम को खासी मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि यह खोज ऑटोमेटेड सर्वे फॉर सुपरनोवा (असास-एसएन), रोबोटिक दूरबीनों का एक नेटवर्क (जिसने दूरस्थ आकाशगंगा में प्रकाश के विस्फोट का पता लगाया) के द्वारा संभव हुई। उन्होंने बताया कि टीम ने विस्फोट के दौरान आकाशगंगा के एक्स-रे उत्सर्जन की बारीकी से निगरानी करने के लिए नासा के न्यूट्रॉन स्टार इंटीरियर कंपोजिशन एक्सप्लोरर (नाइसर) दूरबीन का उपयोग किया।
टीम ने पाया कि दिसंबर 2020 की खोज से पहले आकाशगंगा अपेक्षाकृत शांत थी। डॉ. रक्षित ने बताया कि आकाशगंगा का केंद्रीय महाविशाल ब्लैक होल पांच करोड़ सूर्यों जितना भीमकाय है। विस्फोट से पहले, ब्लैक होल के चारों ओर एक धुंधली, फैली हुई अभिवृद्धि डिस्क घूम रही होगी, जिसके साथ 100 से 10 हजार सौर द्रव्यमान वाला एक दूसरा, छोटा ब्लैक होल, अनभिज्ञता से परिक्रमा कर रहा था।


चार माह में तारकीय मलबे को खा गया महाविशाल ब्लैक होल
शोधकर्ताओं का कहना है कि दिसंबर 2020 में एक तीसरा पिंड संभवतः पास का एक तारा इस तंत्र के बहुत करीब आ गया और महाविशाल ब्लैक होल के प्रचंड गुरुत्वाकर्षण द्वारा टुकड़े-टुकड़े हो गया। ऐसी घटना को खगोलविद ''''ज्वारीय व्यवधान घटना'''' कहते हैं। जब तारे का मलबा ब्लैक होल में समाने लगा, तब तारकीय पदार्थ के अचानक प्रवाह ने क्षणभर के लिए ब्लैक होल की अभिवृद्धि डिस्क को उज्ज्वल कर दिया। चार माह में महाविशाल ब्लैक होल ने तारकीय मलबे को खा लिया और दूसरा ब्लैक होल परिक्रमा करता रहा। जैसे ही यह डिस्क से गुजरा इसने सामान्य से कहीं अधिक बड़ा गुबार उत्सर्जित किया, जो सीधे नाइसर के दृष्टिकोण की तरफ था। डॉ. रक्षित का कहना है कि ऐसी उल्लेखनीय घटनाओं को ढूंढने के लिए उच्च बारंबारता वाली निगरानी आवश्यक है और हम भविष्य में ऐसी और घटनाओं की उम्मीद करते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed