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Nainital News: सेब का उत्पादन 40 प्रतिशत गिरने के आसार
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भीमताल (नैनीताल)। हर साल बर्फबारी होने पर पर्वतीय क्षेत्रों में सेब का अच्छा उत्पादन होता था। इस साल अभी तक एक बार भी बर्फबारी नहीं होने से सेब का उत्पादन पिछले साल की तुलना में 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है। बर्फबारी नहीं होने से सेब के पेड़ को चिलिंग नहीं मिल पाई है। इस वजह से किसान चिंतित है। जिले में सेब का उत्पादन करने वाले 12 हजार से अधिक किसानों को लाखों रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। इसका सबसे ज्यादा असर जिले के रामगढ़ विकासखंड में पड़ रहा है।
900 से 1200 घंटे चाहिए चिलिंग
सेब के अच्छे उत्पादन के लिए चिलिंग 900 से 1200 घंटे की चिलिंग ;ठंडद्ध की जरूरत पेड़ को होती हैं। इस साल अभी तक बर्फबारी नहीं होने से सेब के उत्पादन में भारी कमी देखने को मिल सकती हैं। इसका अनुमान उद्यान विभाग की ओर से भी लगाया गया है।
जिले में 1248 हेक्टेयर भूमि पर होता है सेब का उत्पादन
जिले में 1248 हेक्टेयर भूमि पर सेब पर 12 हजार से अधिक किसान खेती करते है। इसमें 4734 मैट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है।
पिछले साल सेब का उत्पादन
ब्लॉक क्षेत्रफल उत्पादन
रामगढ़ 676 हेक्टेयर भूमि 2243 मीट्रिक टन
धारी 512 हेक्टेयर भूमि 2361 मीट्रिक टन
ओखलकांडा 42 हेक्टेयर भूमि 115 मीट्रिक टन
बेतालघाट 8 हेक्टेयर भूमि 0 7 मीट्रिक टन
कोटाबाग 8 हेक्टेयर भूमि 17 मीट्रिक टन
बर्फबारी नहीं होने का यह पड़ता है असर
1. सेब के उत्पादन में कमी
2. सेब का साइज छोटा होना
3. सेब के पेड़ पर फूल का टिक नहीं पाना
4. हल्द्वानी मंडी में किसानों को सेब का उचित दाम नहीं मिल पाना
देश और विदेशों तक है सेब की डिमांड
जिले में रामगढ़ का सेब देश ही नहीं विदेशों तक लोगों की पसंद है। रामगढ़ क्षेत्र का सेब दिल्लीए मुंबई, कोलकाताए चेन्नई, पंजाब, हल्द्वानी, देहरादून, लखनऊ, यूपी, राजस्थान के शहरों तक पहुंचता है। साथ ही इन शहरों से विदेशों तक सेब जाता है।
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कोट
पहली बार अभी तक बर्फबारी नहीं होने से सेब का उत्पादन 35 से 40 प्रतिशत तक कम होने के आसार हैं। सेब को चिलिंग की जरूरत होती है।बर्फबारी नहीं होने से सेब उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। अभी भी अगर बर्फबारी हो जाए तो ठीकठाक उत्पादन हो सकता है।
- आरके सिंह, जिला उद्यान अधिकारी, नैनीताल
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900 से 1200 घंटे चाहिए चिलिंग
सेब के अच्छे उत्पादन के लिए चिलिंग 900 से 1200 घंटे की चिलिंग ;ठंडद्ध की जरूरत पेड़ को होती हैं। इस साल अभी तक बर्फबारी नहीं होने से सेब के उत्पादन में भारी कमी देखने को मिल सकती हैं। इसका अनुमान उद्यान विभाग की ओर से भी लगाया गया है।
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जिले में 1248 हेक्टेयर भूमि पर होता है सेब का उत्पादन
जिले में 1248 हेक्टेयर भूमि पर सेब पर 12 हजार से अधिक किसान खेती करते है। इसमें 4734 मैट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है।
पिछले साल सेब का उत्पादन
ब्लॉक क्षेत्रफल उत्पादन
रामगढ़ 676 हेक्टेयर भूमि 2243 मीट्रिक टन
धारी 512 हेक्टेयर भूमि 2361 मीट्रिक टन
ओखलकांडा 42 हेक्टेयर भूमि 115 मीट्रिक टन
बेतालघाट 8 हेक्टेयर भूमि 0 7 मीट्रिक टन
कोटाबाग 8 हेक्टेयर भूमि 17 मीट्रिक टन
बर्फबारी नहीं होने का यह पड़ता है असर
1. सेब के उत्पादन में कमी
2. सेब का साइज छोटा होना
3. सेब के पेड़ पर फूल का टिक नहीं पाना
4. हल्द्वानी मंडी में किसानों को सेब का उचित दाम नहीं मिल पाना
देश और विदेशों तक है सेब की डिमांड
जिले में रामगढ़ का सेब देश ही नहीं विदेशों तक लोगों की पसंद है। रामगढ़ क्षेत्र का सेब दिल्लीए मुंबई, कोलकाताए चेन्नई, पंजाब, हल्द्वानी, देहरादून, लखनऊ, यूपी, राजस्थान के शहरों तक पहुंचता है। साथ ही इन शहरों से विदेशों तक सेब जाता है।
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कोट
पहली बार अभी तक बर्फबारी नहीं होने से सेब का उत्पादन 35 से 40 प्रतिशत तक कम होने के आसार हैं। सेब को चिलिंग की जरूरत होती है।बर्फबारी नहीं होने से सेब उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। अभी भी अगर बर्फबारी हो जाए तो ठीकठाक उत्पादन हो सकता है।
- आरके सिंह, जिला उद्यान अधिकारी, नैनीताल