नैनीताल: ज्योलीकोट के बाद चोपड़ा में भी जलजनित बीमारी का खतरा, अब तक 20 से अधिक लोग बीमार
ज्योलीकोट में जलजनित बीमारी के बढ़ते मामलों के बीच अब समीपवर्ती चोपड़ा गांव से भी चिंताजनक खबर सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार, चोपड़ा में बीते कुछ दिनों में 20 से 30 लोग बीमार हो चुके हैं, जबकि 10 से अधिक मरीज अस्पताल में भर्ती हैं।
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ज्योलीकोट में जलजनित बीमारी के बढ़ते मामलों के बीच अब समीपवर्ती चोपड़ा गांव से भी चिंताजनक खबर सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार, चोपड़ा में बीते कुछ दिनों में 20 से 30 लोग बीमार हो चुके हैं जबकि 10 से अधिक मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। कई लोगों में पीलिया के लक्षण सामने आने की बात कही जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने कैंप लगाकर ग्रामीणों की जांच शुरू कर दी है।
चोपड़ा ज्योलीकोट का समीपवर्ती गांव है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों क्षेत्रों के बीच लोगों की लगातार आवाजाही रहती है। चोपड़ा के लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ज्योलीकोट बाजार पहुंचते हैं जबकि कई बच्चे पढ़ने के लिए ज्योलीकोट के स्कूलों में जाते हैं। ऐसे में ज्योलीकोट में जलजनित बीमारी के प्रकोप के बाद चोपड़ा में भी लोगों के बीमार पड़ने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीण चंदन सिंह जीना ने बताया कि गांव के 10 से अधिक लोग उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती हैं।
ज्योलीकोट स्कूल और बाजार में पानी पीने से संक्रमण की आशंका
ग्राम प्रधान बीना जीना ने बताया कि चोपड़ा के ग्रामीणों का ज्योलीकोट में आना-जाना लगातार बना रहता है। उन्होंने आशंका जताई कि वहां पानी पीने या दूषित पानी के संपर्क में आने से लोगों की तबीयत खराब हो सकती है। चोपड़ा में पीलिया के कई मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्षेत्र में कैंप लगाकर लोगों की जांच की है। साथ ही चोपड़ा क्षेत्र के पानी के स्रोत से पानी के सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं।
क्षेत्र में सैंपलिंग की गई है। पानी की जांच भी कराई गई। लोगों को जागरूक किया जा रहा है। क्लोरीनेशन भी कराया गया है। लगातार क्षेत्र व बीमारों पर नजर रखी जा रही है। - डॉ. रश्मि पंत, सीएमओ, नैनीताल
शिविरों में 127 लोगों के स्वास्थ्य की जांच
सीएमओ डॉ. रश्मि पंत के निर्देश पर बृहस्पतिवार को बेलुवाखान, मनोरा और तल्ला चोपड़ा में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। सचल चिकित्सा वाहन और शिविरों में कुल 127 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जरूरत के अनुसार मरीजों को दवाएं वितरित की गई। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलीकोट में 47 मरीजों की जांच की गई। इनमें से छह मरीजों को भर्ती किया गया। 30 लोगों को चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। स्वास्थ्य टीम ने मरीजों से फीडबैक लिया। 38 लोगों के ब्लड सैंपल जांच के लिए लिए गए।
स्रोत से शुरू हुआ पानी का सफर, घरों तक पहुंचने से पहले सूख गई सुविधा
ज्योलीकोट में जलजनित बीमारी के संकट के बीच वर्षों पहले स्वीकृत पेयजल योजना की अधूरी कहानी फिर सामने आ गई है। डाडर गांव के जलस्रोत से ज्योलीकोट तक शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए वर्ष 2018 में करीब 80 लाख रुपये की योजना स्वीकृत हुई थी। चार साल बाद वर्ष 2022 में डाडर से ज्योलीकोट तक पाइपलाइन बिछाने और टैंक बनाने का काम हुआ लेकिन घरों तक पानी पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही बजट की कमी के चलते आगे के कार्य रोक दिया गया। अब बीमारी के संकट के बीच सवाल उठ रहा है कि जब वर्षों पहले शुद्ध पानी का स्थायी इंतजाम तैयार किया जा सकता था तो योजना अधूरी क्यों छोड़ी गई।
ज्योलीकोट और आसपास के क्षेत्रों में जलजनित बीमारी के संकट ने पेयजल व्यवस्था की खामियों को भी सामने ला दिया है। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए डाडर गांव के जलस्रोत से पानी लाने की योजना वर्ष 2018 में स्वीकृत की गई थी। करीब 80 लाख रुपये की लागत वाली इस डाडर-ज्योलीकोट पेयजल योजना का उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना था। योजना स्वीकृत होने के बाद भी धरातल पर काम शुरू होने में करीब चार वर्ष लग गए। वर्ष 2022 में योजना पर काम शुरू हुआ। इसके तहत डाडर से ज्योलीकोट तक पेयजल लाइन बिछाई गई और 10 किलोलीटर क्षमता का टैंक भी तैयार किया गया। योजना को वर्ष 2024 तक पूरा किया जाना था लेकिन बजट की कमी के चलते काम रोक दिया गया।
बीमारी के बीच फिर उठे सवाल
क्षेत्रवासी मनोज बर्गली ने कहा कि जब शुद्ध पानी का स्रोत उपलब्ध था और योजना भी स्वीकृत हो चुकी थी तो इसे पूरा कराने में वर्षों तक गंभीरता क्यों नहीं दिखाई गई। उनका कहना है कि योजना का काम समय पर पूरा होता तो आज क्षेत्र को पेयजल संकट से इस तरह नहीं जूझना पड़ता। गोविंद बर्गली ने जल संस्थान की तत्कालीन कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि योजना अधूरी रहने का खामियाजा अब पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है। बीमारी सामने आने के बाद टैंकर भेजना और पानी की जांच कराना जरूरी कदम हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए अधूरी पेयजल योजना को पूरा करना होगा।
ज्योलीकोट और आसपास के क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुचारु करने के लिए पूर्व में निर्मित और अधूरे पड़े 10 केएल के टैंक का काम पूरा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। टैंक के साथ ही लाइन की मरम्मत और उसकी चेकिंग का काम किया जा रहा है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद क्षेत्र में इससे पेयजल आपूर्ति सुचारु कर दी जाएगी। -अनीष पिल्लई, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान